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बच्चे की मौत का इंतजार करते गिद्ध की तस्वीर जिसने फोटोग्राफर को सुसाइड के लिए मजबूर किया उसकी हकीकत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

गिद्ध बच्ची की मौत का इंतजार कर रहा है। और गिद्ध बच्ची को खा लेता है। हम फोटो लेने वाले को गाली देते रहते हैं। कहते हैं बचाया क्यों नहीं । अफ़्रीका की ये तस्वीर तीन दशकों से वायरल है। जब कभी बड़ी आफत आती है व्यवस्था की नाकामी की बात उठती है तो ये तस्वीर इंटरनेट पर वायरल होने लगती है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जमाने में ये बिजली के करंट के रफ्तार से फैलती है।
भारत में Covid19 की वजह से लॉक डाउन है। हाईवे पर मजदूरों के पलायन की एक से बढ़कर एक तस्वीरें आ रही हैं। गर्भवती की मौत, नवजात की मौत की खबर देख लोग सरकारी व्यवस्था की तुलना गिद्ध से करने लगें है खासतौर से आत्मनिर्भर वाले स्लोगन के बाद से।
गिद्ध के सामने बेबस बच्चे की मौत की इस तस्वीर की हकीकत हम जो बताएंगे उसे जान आपकी सब गलत फहमियां ना सिर्फ दूर हो जाएंगी बल्कि आपके सोचने का नज़रिया भी बदल जाएगा।
1993 में अकाल और भूखमरी के बीच खींची गई थी तस्वीर
बात 1993 की है। अफ़्रीकी देश सूडान में भयंकर अकाल पड़ा था, ब्लैक फीवर से हजारों की मौत हो रही थी। देश पर मिलिशिया का कब्जा था। गुरिल्ला युद्ध जारी था। युद्ध,अकाल, महामारी और भूखमरी के बीच पत्रकारों की भी एंट्री मौत को दावत के समान थी। ऐसे में फोटो जर्नलिस्ट के बैंग बैंग क्लब के सदस्य केविन कार्टर ने सूडान जाने का फैसला कर लिया। साउथ अफ्रीका के फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर को सूडान के अकालग्रस्त इलाके में जाने के लिए पापड़ बेलने पड़े। केविन कार्टर ने गिद्ध और बच्चे की जिस तस्वीर को कैमरे में कैद की उसकी कई साल तक आलोचना होती रही लेकिन उस वक़्त सूडान मै काम कर रही UN की संस्था लाइफलाइन सूडान को अंतरराष्ट्रीय मदद की सख्त जरूरत थी। पत्रकारों को आने की इजाजत नहीं थी लिहाजा दुनिया दक्षिण सूडान में हर दिन मर रहे 12-15 वयस्कों और कई बच्चो की मौत से बेखबर थी। 20 हजार से ज्यादा लोग अकाल और ब्लैक फीवर की चपेट में आकर मर चुके थे । किसी तरह केविन कार्टर और सिल्वा को लाइफलाइन सूडान ने स्थानीय विद्रोहियों से 24 घंटे की इजाज़त दिलाई। केविन कार्टर उस वक़्त तक इक आम फोटो जर्नलिस्ट थे जो फ्रीलांस के जरिए कैरियर बना रहे थे।
इसी तस्वीर पर केविन कार्टर को मिला पुलित्सर पुरस्कार
बहरहाल यूनाइटेड नेशंस की फ्लाइट से केविन कार्टर और सिल्वा साउथ सूडान के अयोड में लैंड किए। अयोड में राहत शिविर था। कैंप से कुछ ही दूरी पर गिद्ध और बच्चे की वो तस्वीर ली गई जिसने केविन कार्टर को 1994 का पुलित्सर पुरस्कार दिलाया। दरअसल केविन जब कैंप की और जाते बच्चे की तस्वीर ले रहे थे तभी वो गिद्ध आकर बच्चे के पास बैठ गया। कार्टर ने क्लिक किया और दुनिया पर असर डालने वाली अब तक की सबसे प्रभवशाली फोटो कैमरे मै कैद हो गई।

टाइम मैगज़ीन ने 100 सबसे प्रभवशाली तस्वीरों में इसे पहले नंबर पर रखा है। कई साल तक इसपर विवाद होता रहा की क्या केविन को मदद नहीं करनी चाहिए थी बच्चे की गिद्ध के खाने के लिए क्यों छोड़ दिया। पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठते रहे । इस बीच pulitzar पुरस्कार लेने से पहले 27 जुलाई 1994 में केविन कार्टर ने जोहांसबर्ग में खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली।
सब यही समझते रहे कि गिद्ध ने बच्चे को खा लिया
किसी ने उस बच्चे को मरते नहीं देखा, किसी को ये मालूम नहीं हो सका की गिद्ध ने बच्चे को खाया या नहीं । पूरी दुनिया मानती रही कि केविन कार्टर ने बच्चे को गिद्ध से
बचाने की बजाय उसकी तस्वीर ली। तब तक ये राज ही रहा जब साल 2011 में स्पेनिश अखबार अल मुंडो ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि उस बच्चे का क्या हुआ। और जो जानकर मिली उसने सब बदल कर रख दिया। वो बच्चा इस तस्वीर लेने वाले साल 1993 के बाद भी कई वर्षों तक जीवित रहा था।

दरअसल आयोड में बच्चे को उसकी मां ने मैदान में छोड़ दिया था और खुद राहत सामग्री लाने गई थी। इसी दौरान केविन कार्टर पहुंचे तस्वीर ली और चले गए। ये सब हुआ 20 मिनट में। केविन ने अपने जहाज पर चढ़ने से पहले सिल्वा को इस तस्वीर के बारे में बताया और कहा कि उस बच्ची को देखने के बाद उसे अपनी बेटी मेगन याद आ गई । उसने गिद्ध को भागने की कोशिश की लेकिन 50 मीटर की दूरी थी और गिद्ध भागा नहीं । कार्टर को अपने जीवित रहते ये भी मालूम नहीं चला कि जिसे वो लड़की समझता रहा वो लड़का था।
20 साल तक जीवित रहा ये बच्चा
अल मुंडो अखबार ने 2011 में ख़बर छापी तो कार्टर के बारे में नजरिया बदल गया। हालाकि अभी भी ज्यादातर लोग हकीकत से वाकिफ नहीं है। सबसे बड़ी हकीकत तो यह है कि जिसे पूरी दुनिया बच्ची समझती रही दरअसल वह एक 4 साल का बच्चा था और इसका नाम कॉन्ग यॉन्ग था ( Kong Nyong) । कार्टर ने जब यह तस्वीर ली तब 4 साल का Kong Nyong अपनी मां के पीछे पीछे सूडान लाइफ लाइन कैंप की तरफ जा रहा था जहां राशन सामग्री दवाइयां बांटी जा रही थी, बच्चा बहुत कमजोर था और चल भी नहीं पा रहा था इसी दौरान Kong Nyong गिर गया और केविन कार्टर ने उसकी तस्वीर ली । जब कार्टर तस्वीर ले रहे थे तभी एक गिद्ध आकर यहां बैठ गया। केविन ने लगभग 5 से 7 मिनट तक गीत को दूर से ही भगाने की कोशिश की लेकिन उसके जाने का वक्त हो चुका था जहाज वापस लौट रहा था केविन भागते भागते जहाज पर पहुंचे और सिलवा को तस्वीर के बारे में बताई।
बच्चे को देख कार्टर को अपनी बेटी आई थी याद
केविन कार्टर ने सिलवा को बताया कि उस बच्ची को देख उन्हें अपनी बेटी मेगन की याद आ गई। कार्टर भी यही समझते रहे कि जिनकी तस्वीर उन्होंने ली है वह एक बच्ची की तस्वीर थी। हाई रिजॉल्यूशन में इस तस्वीर को देखेंगे तो Kong Nyong के हाथ में एक प्लास्टिक की पट्टी नजर आती है जिस पर लिखा हुआ है। यह सूडान लाइफलाइन की ओर से दी गई पट्टी थी जिसका अर्थ था की इस बच्चे को फौरन मदद की जरूरत है क्योंकि यह कुपोषण का शिकार है। Kong Nyong थोड़ी देर में सहायता केंद्र में पहुंच चुका था। वह न सिर्फ गिद्ध से बचा बल्कि कई सालों तक जिंदा भी रहा।
बच्चे के पिता ने की तस्वीर की पुष्टि
साल 2011 में अल मोंडे अखबार ने इस तस्वीर के बाद की कहानी की तलाश शुरू की। पत्रकारों की एक टीम ने अयोड का दौरा किया काफी खोजबीन के बाद उस नर्स की तलाश पूर्वी जिसने साल 1993 में केविन कार्टर के तस्वीर लेने वाले दिन उस बच्चे को और उसकी मां को राहत सामग्री दी थी। कई ग्रामीणों से पूछताछ के बाद आखिरकार अल मोंडो की टीम मदद Kong Nyong के पिता के पास पहुंची और उन्हें केविन कार्टर द्वारा खींची गई तस्वीर दिखाइए पिता ने उसे पहचान लिया और कहा कि उनका बेटे की मौत साल 2007 में मलेरिया से हो गई थी। Kong Nyong लगभग 20 सालों तक जीवित रहा। उसे कभी यह जानकारी नहीं मिल पाई कि उसकी तस्वीर इतनी वायरल हो चुकी है और ना ही उसके पिता को इसकी खबर मिली। जब पत्रकारों ने बताया कि इस तस्वीर को खींचने वाले केविन कार्टर ने सुसाइड कर लिया था तो वह भी हैरान हुए।
विवेक सिन्हा
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