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नियमों की आड़ में काम में बाधा बनने वाले अधिकारी को वीआरएस दे देंगेःसीएम

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रांची,28जून। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में विकास की काफी संभावना है। यहां संसाधन और क्षमता होने के बाद भी समुचित विकास नहीं हो पाया है। यहां फाइल को लटकाने का काम नहीं चलेगा। जो अफसर नियमों की आड़ में काम में बाधा बनेगा, उसे वीआरएस दे देंगे। सरकार को समस्या नहीं, समाधान चाहिए। नियमों का पालन करते हुए समाधान। जो काम लटकायेगा, उसकी छुट्टी तय है। राज्य में अब और लालफीताशाही नहीं चलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के पूरा होने से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ होगा। यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधर जायेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के मामले में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। तय सीमा में काम पूरा करें। उक्त निर्देश उन्होंने झारखंड मंत्रालय में राज्य में चल रहे केंद्र सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान दिये। झारखण्ड हम सब का राज्य है हमें मिलकर इसे विकसित बनाना होगा। यह हर किसी की जिम्मेवारी है। जल्द परिणाम के लिए टीम वर्क की जरुरत है। हम टीम झारखंड बनाकर काम कर रहे हैं, तो नतीजे दिख रहे हैं। लेकिन अभी भी क ऐसे क्षेत्र है जहां हम धीरे हैं। इन क्षेत्रों में भी तेजी लाने की जरुरत है। जब को प्रोजेक्ट क्लियरेंश के लिए आये, एक साथ जितनी जानकारी मांगनी है, मांग लें। ये नहीं की एक जानकारी मांगे, जब उसका जवाब आ जाये तब दूसरे जानकारी मांगे। इसी से काम धीरे होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान सारी कागजी कार्रवाई पूरी कर लें। 20 अगस्त के बाद धरातल पर काम शुरु हो जाने चाहिए। पीएसयू कंपनियों की जमीन पर जो जनहित के तहत शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि का काम होना है, उसके लिए 30 दिन में एनओसी दें, अन्यथा एनओसी दिया माना जायेगा। जिला के उपायुक्त इस दिशा में तेजी से काम शुरु कर दें। इस संबंध में संबंधित पीएसयू के वरीय अधिकारियों के पास पत्र चला जायेगा। उन्होंने कहा कि जहां-जहां पाइप लाइन बिछाने का काम है, वहां के लोगों को जागरुक करें। उनकी जमीन नहीं ली जायेगी। जमीन के काफी नीचे से पाइपलाइन गुजरेगी, इसकी एवज में उन्हें मुआवजा भी मिलेगा। वे उस पर खेती-बाड़ी कर सकेंगे। इसी प्रकार जो लोग विस्थापित हुए हैं, उनके लिए चिन्हित जमीन का जल्द म्यूटेशन करायें। 15 अगस्त तक यह काम निपटा लें। इसके बाद बड़ा आयोजन कर लाभूकों को जमीन के कागजात दिये जायेंगे। लोगों को पता लगेगा कि सरकार उजाड़ नहीं रही, बसा रही है।
राज्य में बंद पड़े कोल ब्लॉक को जल्द शुरु करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक शुरु होने से स्थानीय स्तर पर काफी लोगों को रोजगार मिलेगा। डिस्ट्रीक माइनिंग फंड के तहत राशि मिलने से उस क्षेत्र में आधारभूत सरंचना का विकास होगा। सरकार को भी विकास कार्यों को चलाने के लिए राजस्व मिलेगा। जो कंपनी कोल ब्लॉक लेने में रुचि नहीं दिखा रहीं है, उनकी सूची बनायें। ताकी मंत्रालय को इसकी सूचना दी जा सके और नये निवेशक को आमंत्रित किया जा सके। जेएसएमडीसी की माइंस जल्द चालू करें। इसके चालू होने से राज्य के छोटे-छोटे उद्य्नोगों को कोयला मिलने में आसानी होगी। बैठक में उन्होंने कोल इंडिया से 15 अगस्त तक 1100 नौकरियां देने का निर्देश दिया। इस संबंध में राज्य सरकार में लंबित जरुरी मंजूरी को जल्द देने का निर्देश दिया।
रघुवर दास ने जिला के उपायुक्तों को निर्देश दिया कि हर मंगलवार जैसे कैबिनेट की बैठक होती है, उसी प्रकार हर मंगलवार किसी न किसी प्रखंड में लाभुक परक योजनाओं के लिए जनता दरबार लगायें। इसमें वृद्धा-विधवा पेंशन, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र आदि समस्याओं का तत्काल निदान किया जाये। उपायुक्त किसी भी एक मंगलवार बिना जानकारी एक बैठक में पहुंचें।
बैठक में मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, विकास आयुक्त डीके तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार बर्णवाल, पथ सचिव केके सोन, पीसीसीएफ संजय कुमार, एडीजी (अभियान) आरके मल्लिक समेत विभागों के सचिव, अधिकारी, जिलों के उपायुक्त, वरीय पुलिस अधिकारी, विभिन्न पीएसयू कंपनियों के अधिकारी, एनएचएआइ, रेलवे, गेल के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में नेशनल हाईवे से जुड़े कई मामले की भी गहन चर्चा हुई,जिसमें रांची-रड़गांव-महुलिया (163.500 कि.मी.), राजगंज-चास-वेस्ट बंगाल बोर्डर (56.889 कि.मी.), एन.एच.-02 बी.एच./जे.एच. बोर्डर (चोरडाहा)-गोरहार (71.490 कि.मी.), एन.एच.-02, (320.810 कि.मी.) गोरहर- (360.300 कि.मी.) खारेटुंडा (39.490 कि.मी.), एन.एच.-02, खारेटुंडा (360.30 कि.मी.)-बरवा अड्डा-(400.132 कि.मी.) (39.830कि.मी.), एन.एच.-31, बरही-कोडरमा- (27.600 कि.मी.), एन.एच.-23, पालमा-गुमला (26.00 कि.मी.)-88.00 (62.00 कि.मी.) शामिल है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टस ऑफ रेलवे के मामले की भी समीक्षा हुई, जिसके तहत हटिया-बंडामुंडा डबलिंग प्रोजेक्टस, चाईबासा आरओबी, नोवामुंडी आरओबी ,कोलेबिरा-हाट गम्हरिया रोड आरओबी, सरायकेला-खरसावां (राज खरसावां-सिनी रेलवे स्टेशन), सिल्ली-पतराहातु रोड आरओबी, कोडरमा-गिरिडीह नया बी.जी.रेल ला न प्रोजेक्ट, कोडरमा-तिलैया नया बी.जी.रेल ला न प्रोजेक्ट,जारंगडीह से रांची रोड डबलिंग रेल ला न प्रोजेक्ट, टोरी से शिवपुर रेल ला न प्रोजेक्ट, प्रधानखंटा आरओबी, रांची रोड आरओबी, हजारीबाग रोड आरओबी, भूली आरओबी, हंसडीहा-गोड्डा, हंसडीहा-मोहनपुर प्रोजेक्ट, एवं पिरपौंती-गोड्डा प्रोजेक्ट, कुमारधुबी-मुगमा आरओबी, मधुपुर-जोरामाव आरओबी, जामताड़ा-बोड़मा आरओबी , चितारगंज-बोड़मा आरओबी और शंकरपुर-जसीडीह आरओबी शामिल है।
वहीं बैठक के दौरान खान विभाग से जुड़े मामले पाचवारा नॉर्थ, जीतपुर, मोइत्रा, बृन्दा एवं सिस , मेराल, डुमरी, लोहारी, केरेडारी, राजबार और डी, शाहरपुर-जमारपानी, तुबेद, पाटल इस्ट, पाचवारा साउथ के कार्यां की भी चर्चा हुई। इस दौरान एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े मामले, देवघर एयरपोर्ट निर्माण, बोकारो एयरपोर्ट निर्माण, दुमका एयरपोर्ट निर्माण, जमशेदपुर एयरपोर्ट निर्माण, धालभुमगड़ एयरपोर्ट निर्माण और इनलैंड वाटरवेज ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के मामले पर भी चर्चा हुई।बैठक में इनलैंड वाटरवेज ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के अंतर्गत राज्य में 1390 किलोमीटर पाईपला न बिछाने के कार्य के संबंध में प्रगति प्रतिवेदन पर चर्चा की गई । मुख्यमंत्री ने कहा कि इनलैंड वाटरवेज के कार्य में तेजी लायें। इस कार्य हेतु भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले का निपटारा जल्द से जल्द कर लें ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नही हो।
मुख्यमंत्री ने गैस पाईपला न प्रोजेक्ट के मामले की भी समीक्षा की। बैठक में जगदीशपुर-हल्दीया-बोकारो-धामरा गैस पा पला न (कुल 3,365 कि.मी.) 12,940 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य की समीक्षा भी की गई। । यह कार्य देश के सात शहरों (वाराणसी, पटना, जमशेदपुर, रांची, भुवनेश्वर, कटक एवं कलकत्ता) में प्रारम्भ है।

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