रांची,28 जून । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार जी के निर्देश पर खूंटी मामलों को लेकर गठित कमिटी की पहली बैठक आज कांग्रेस मुख्यालय, कांग्रेस भवन, रांची में संपन्न हुई। गठित कमिटी के सदस्य डॉ प्रदीप बलमूचू, डॉ रामेश्वर उरांव, नियेल तिर्की, कालीचरण मुंडा, एवं रमा खलखो हैं। यह कमिटी खूंटी का दौरा कर लोगों से मिलकर समस्याओं की जड़ तक जाएगी तथा इस संबंध में प्रतिवेदन प्रदेश कांग्रेस को समर्पित करेंगे।
आज की बैठक में सम्यक विचारोपरांत एक स्वर से नेताओं के विचार आये- खूंटी जिला का पूर्वी भाग वर्तमान समय अशांत चल रहा है। उस क्षेत्र में जो घटनाएं घटी है यथा, पांच लड़कियों के साथ आसामाजिक तत्वों द्वारा दु कर्म, श्री कडिया मुंडा के आवास से तीन अंगरक्षकों को अगवा कर ले जाना, कोचांग मिशन के फादर अलफोंस आईन्द को बिना पर्याप्त साक्ष्य अनुसंशाधन के गिरफ्तारी तथा कल की घटना में ग्राम घाघरा के एक ग्रामीण का पुलिस लाठीचार्ज के दौरान मृत्यु हो गई। इन सभी घटनाओं को कांग्रेस पार्टी निन्दा करती है।
सदस्यों ने कहा कि खूंटी में जो घटनाऐं घट रही है और सरकार जिस प्रकार से मुकदर्शक व संवेदनहीन बनी हुई है वह चिन्ता के वि ाय है। सरकार सिर्फ घटनाओं के रोक-थाम के लिए जिला प्रशासन, पुलिस बल का प्रयोग कर रही है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह काफी नहीं है, लोकतंत्र में जनता की शिकायतें सरकार तक पहुंती है, जिसकी अभिव्यक्ति सामान्य ढंग से बोलकर या आक्रोशित होकर होती है। अब सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि लोगों के बीच जाएं और सही स्थिति बताकर लोगों को शांत करें। परन्तु राज्य सरकार इस क्षेत्र में ऐसा कुछ भी करते हुए नहीं दिख रही है।
अगर हम इन आक्रोश के मूल में जाएं तो हम पाते है कि इन सब अशांति के लिए वर्तमान सरकार बहुत हद तक स्वंय जिम्मेवार है। पांचवीं अनुसूची इलाके में अशांति का माहौल जो बन रहा, वह रघुवर सरकार के नीतियों के कारण है। इलाका शांत था। इलाका अशांत तब से शुरु हुआ, जब रघुवर सरकार ने सीएनटी/एसपीटी एक्ट में संशोधन लाना शुरु किया। हालांकि उनको जनता के विरोध के सामने मुहंकी खानी पड़ी। सरकार के गलत नीतियों को लेकर आज पूरा झारखंड आंदोलनरत है। फिर भी सरकार हठधर्मिता दिखाते हुए अभी भू-अर्जन कानून में संशोधन लायी, जो पार्लियामेंट द्वारा पारित भू-अर्जन कानून-2013 के उलट है। स्थिति पुनः वही हो जाएगी जो भू-अर्जन कानून 1894 के लागू होने के दरम्यान थी। अब जिला पदाधिकारी जब चाहे किसी का भी जमीन अधिग्रहण कर सकते है। इसका भय लोगों में व्याप्त हो गया। रघुवर सरकार को जानना चाहिए कि इस क्षेत्र में जमीन को बचाने के लिए बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू का विद्रोह हुआ और जमीन बचाने के लिए सी.एन.टी. व एस.पी.टी. एक्ट बनाया गया।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कानून बने यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोध कानून-1989 बना। वर्तमान में इस कानून की स्थिति खास्ता है। फिर अधिकार देने पेशा कानून एक्ट 1996 लाया, जिसे राज्य सरकार अभी तक लागू नहीं कर पायी है, ग्राम सभा को अधिकार नहीं दिया गया है, जो पेशा कानून में वर्णित है। इसी तरह वन अधिकार कानून-2005 की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस सरकार द्वारा आदिवासियों की रक्षा के लिए जो कानून बने हैं उसे भाजपा सरकार उन कानूनों की अवहेलना कर रही है।
यह समिति प्रदेश कांग्रेस को प्रतिवेदन समर्पित करने के साथ-साथ राज्यपाल महोदया से मिलकर उनसे गुहार करेगी कि वह पांचवीं अनुसूची में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करें और सरकार को निर्देशित करें कि कानून का सही रुप से पालन कर इस क्षेत्र में शांति एवं सुशासन बहाल किया जा सके। बैठक में समिति के सदस्यगण के अलावा पिटर मुंडू एवं सतीश पॉल मुंजनी उपस्थित थे।