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रिम्स से मरीज को धक्का मार कर बाहर निकाला गया
एचआईवी पीड़ित होने की आशंका
रांची,6अगस्त। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने रिम्स के कॉरिडोर में पड़े जिस मरीज को देखकर निदेशक को फटकार लगायी, वह मूल रुप से गढ़वा जिले का रहने वाला है और उसके एचआईवी पॉजिटिव होने की आशंका है।
पीड़ित मरीज को रिम्स लेकर आयी उसकी पत्नी ने बताया कि पेट में दर्द, दस्त व उल्टी की निरंतर शिकायत के बाद रविवार की शाम को वह रिम्स पहुंची थी। उन्होंने बताया कि ओपीडी में डॉक्टर द्वारा देखे जाने के बाद पानी चढ़ाया गया, बाद में जांच रिपोर्ट आने पर रिम्स के कर्मियों ने उसे धक्का देकर बाहर निकाल दिया। उन्होंने बताया कि वह अपने तीन-चार वर्ष के छोटे बच्चे को लेकर पति के साथ बेंच पर बैठी थी, लेकिन वहां से भी उसे धक्का देकर निकाल दिया और चेतावनी दी गयी कि वह अस्पताल से बाहर नहीं जाती हैं, तो उसे उठा कर बाहर फेंकवा दिया जाएगा।
रिम्स के निदेशक डॉ. तुलसी महतो ने पत्रकारों को बताया कि स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने जिस मरीज को कॉरिडोर में पड़ा पाया था, वह कल सुबह अस्पताल पहुंचा था,जहां चिकित्सकों ने उसे पानी चढ़ाया। उन्होंने बताया कि मरीज का किडनी खराब है और उसे एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसका वह खुलासा नहीं करना चाहते है।
इस बीच रिम्स के चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित मरीज द्वारा रिम्स के बाहर के किसी लैब से उपलब्ध जांच रिपोर्ट सौंपी गयी,उसमें उसके एचआईवी पीड़ित बताया गया, लेकिन रिम्स के लैब में पुनः जांच कराने के बाद आयी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार वह एचआईवी से पीड़ित नहीं है, बल्कि उसे हेपेटाईसिस-बी से पीड़ित बताया गया। फिलहाल मंत्री के निर्देश के बाद मरीज को रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्त्ती कराया गया ,जहां उसका इलाज जारी है।
कॉरिडोर में पड़े मरीज को देखकर भड़के स्वास्थ्य मंत्री, कहा-
रिम्स का यह हाल रहेगा,तो राज्यभर में क्या संदेश जाएगा
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह विभाग का प्रभार संभालने के दूसरे ही दिन आज राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में कॉरिडोर में पड़े मरीज को देखकर स्वास्थ्य मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की और इस तरह की लापरवाही बरतने वाले दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया।
रिम्स पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने सबसे पहले विभाग के सचिव के.विद्य्नासागर और रिम्स के निदेशक डॉ. तुलसी महतो समेत अन्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। समीक्षा बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण शुरु किया। सबसे पहले उन्होंने पीजी लैब और प्रोफेसर रिसर्च लैब को देखा। इस बीच उन्होंने चिकित्सकों व नर्सिंग संघ से जुड़े प्रतिनिधियों से भी बात की और उनकी समस्याओं का भरोसा दिलाया। स्वास्थ्य मंत्री कुछ दूर आगे बढ़े, तो कॉरिडोर में पड़े एक मरीज को देखकर वहां रुक गये। मरीज के साथ आयी महिला अपनी गोद में एक बच्चे को लिये हुए बैठी थी और मरीज वहीं जमीन पर ही पड़ा था।मरीज को इस हाल में देखकर स्वास्थ्य मंत्री भड़क गये। उन्होंने महिला से जानकारी ली, तो पता चला कि वह चार अगस्त को ही रिम्स में अपने बीमार पति को लेकर आयीं थी, लेकिन चिकित्सकों ने उसे भर्त्ती करने से इंकार कर दिया। इतना सुनते ही मंत्री ने रिम्स निदेशक डॉ. तुलसी महतो से उक्त मरीज के संबंध में तत्काल रिपोर्ट मांगी और मरीज को अविलंब भर्त्ती कर इलाज शुरु करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस मामले की छानबीन कर दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया। मंत्री के निर्देश पर रिम्स के अधीक्षक डॉ. एस.के. चौधरी ने मरीज की पूरी रिपोर्ट लेकर पहुंचे,जिसमें यह जानकारी दी कि कल सुबह साढ़े पांच बजे वह अस्पताल पहुंची,जहां ओपीडी में जांच के बाद उसे पानी चढ़ाया गया। इस दौरान कई अन्य मसलों पर मंत्री के निर्देश पर रिम्स के निदेशक ने अधीक्षक से जानकारी लेने के लिए मोबाइल पर फोन किया, तो अधीक्षक ने फोन ही रिसीव नहीं किया। इस पर राजेंद्र प्रसाद सिंह ने टिप्पणी की, कि जब रिम्स के निदेशक का अधीक्षक फोन नहीं उठा रहे है, तो आम लोगों की क्या स्थिति होगी, इसे सहज समझा जा सकता है। राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि रिम्स निदेशक को कहा कि वे इन कुव्यवस्था को सुधारें, अन्यथा वे देख लेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने रिम्स के जेनेरिक दवा केंद्र का भी निरीक्षण किया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि केंद्रीय संस्थान की ओर से 158 जेनरिक दवाईयां उपलब्ध करायी जाती है, लेकिन फिलहाल 65 जेनरिक दवा ही उपलब्ध है। राजेंद्र प्रसाद सिंह ने इतनी कम संख्या में दवा की उपलब्धता और जेनरिक दवा मरीजों को नहीं मिल पाने पर नाराजगी जतायी। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत करने का भरोसा दिलाया। राजेंद्र प्रसाद सिंह ने रिम्स के न्यूरो वार्ड, जनरल वार्ड समेत स्थानों का निरीक्षण करने के बाद परिसर के बाहर लगे दुकानों की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। रिम्स के बाहर राज्य में प्रतिबंधित तंबाकू व खैनी की हो रही खुलेआम बिक्री को देखकर भी उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। रिम्स के निदेशक को उन्होंने तत्काल इन दुकानों को हटवाने का निर्देश दिया। इसके अलावा उन्होंने बाहर परिसर में लगे कई ठेला व चाय बनाने वाले दुकानदारों से भी बात की। उन्होंने ठेला पर चाय व खाने-पीने की चीज बनाने वाले दुकानदारों को सख्त हिदायत दी कि यदि वे साफ-सफाई व अच्छी सामग्री नहीं बनाएंगे, तो रिम्स परिसर से उनके ठेले को हटा दिया जाएगा। इस बीच एक ठेला लगाने वाले दुकानदार ने मंत्री को अपना पुराना मित्र बताते हुए धुसका व जेलबी खिलाने की भी पेशकश की।
15-20 दिन का समय दें, स्वास्थ्य सुविधा में सुधार होगाःमंत्री
सुपर स्पेशालिटी का शीघ्र होगा उदघाटन
राज्य स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने राज्य की जनता से आग्रह किया गया है कि उन्हें 15-20 दिन का समय दें, सूबे में स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार नजर आएगा। उन्होंने रिम्स में नवनिर्मित सुपर स्पेशालिटी सेंटर के शीघ्र उदघाटन की भी बात कही।
स्वास्थ्य विभाग का प्रभार संभालने के दूसरे ही रिम्स का निरीक्षण करने पहुंचे राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने यह फैसला लिया है कि राज्य के हर पंचायतों में आठ दिनों में मेडिकल कैंप लगाया जाएगा और इस कैंप की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जाएगी, वह खुद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति पर नजर रखेंगे। उन्होंने बताया कि पंचायत में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो उसे अनुमंडल अस्पताल व बाद में जिला अस्पताल में भर्त्ती कराया जाएगा, वहां भी स्थिति में सुधार नहीं होगा, तो रिम्स में भर्त्ती कराया जाएगा,यहां से भी जरुरत पड़ेगी, तो उसे राज्य के बाहर देश के बेहतर अस्पताल में भर्त्ती कराया जाएगा, सरकार गरीबों के इलाज में पैसे की कोई कमी नहीं होने देगी।
राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि वह डंडा चलाकर काम निकालने में विश्वास नहीं रखते है, बल्कि सभी का दिल जीत कर काम होगा, लेकिन गरीबों के इलाज में किसी प्रकार की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि रिम्स के समक्ष कई समस्याएं है, आगामी 17 अगस्त को गर्वनेंस बॉडी की बैठक है, इस बैठक में सभी समस्याओं पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रिम्स के निदेशक की ओर से उन्हें यह जानकारी मिली है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान रिम्स के चिकित्सकों व अन्य मेडिकल कर्मियों वेतन-भत्ते के भुगतान में कुछ कठिनाई आयी है, लेकिन इसे ठीक कर लिया जाएगा और वित्त विभाग का प्रभार होने के कारण वह विश्वास दिलाना चाहते है कि महीने में 1 से 3 तारीख के बीच उनका भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए पहले रिम्स प्रबंधन को उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना होगा। राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि रिम्स के निदेशक की ओर से यह जानकारी दी गयी थी कि राज्य के किसी भी हिस्से से आने वाले मरीज का आधे घंटे के अंदर निष्पादन कर दिया जाता है, लेकिन आज कॉरिडोर में पड़े एक मरीज को देखने इस दावे की पोल खुल गयी है। उन्होंने कहा कि चावल के एक दाने को देखने से ही पता चलता है कि चावल पूरी तरह से पक्का है या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वे 8 अगस्त को विभागीय अधिकारियों के साथ रिम्स के मसले पर समीक्षा करेंगे, यह अस्पताल पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। उन्होंने जेनरिक दवा की कमी को भी दूर करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी कहा कि आज ही वे भवन निर्माण विभाग की सचिव राजबाला वर्मा से बात करेंगे और रिम्स भवन के खास्ताहाल व रंग-रोगन तथा मरम्मति पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने बताया कि सुपर स्पेशालिटी सेंटर का उदघाटन भी शीघ्र ही होगा, यह उदघाटन चाहे प्रधानमंत्री करें या मुख्यमंत्री या कोई अन्य करें, इस संबंध में वे स्वयं पहल करेंगे और यह चाहेंगे कि मुख्यमंत्री भी पूरी स्थिति का जायजा लें।
मरीजों का दबाव, रिम्स में बेड की कमीः निदेशक
रिम्स के निदेशक डॉ. तुलसी महतो ने कहा है कि संस्थान में राज्य से बड़ी संख्या में मरीज आते है और जितनी संख्या में अस्पताल में बेड है,उससे कहीं अधिक मरीजों के पहुंचने से प्रबंधन पर भारी दबाव बना रहता है।
डॉ. तुलसी महतो ने बताया कि मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के प्रावधान के अनुसार निर्धारित संख्या से अधिक मरीजों को संस्थान में भर्त्ती नहीं किया जा सकता, लेकिन जनदबाव और मानवता के नाते अतिरिक्त मरीजों को भर्त्ती कर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि रिम्स न सिर्फ एक अस्पताल है, बल्कि यहां पढ़ाई भी होती है, इलाज भी चलता है, प्रशिक्षण भी दिया जाता है और शोध का काम भी होता है, ऐसी स्थिति में एमसीआई के मानक के रुप में ही काम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि रिम्स में आने वाले हर मरीज का तुरंत इलाज शुरु कर दिया जाता है और आधे घंटे के अंदर मामले का निष्पादन कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने आज कॉरिडोर में जिस मरीज को देखा, उसका कल ओपीडी में इलाज किया गया था, उस मरीज का किडनी खराब है और एक ऐसी बीमारी है,जिसका अभी खुलासा नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि रिम्स प्रबंधन के समक्ष कई मजबूरियां है,इसके बावजूद मरीजों का बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने की कोशिश की जा रही है।
प्रबंधन से नाराज रिम्स के चिकित्सकों ने मंत्री से की मुलाकात
मंत्री ने बैठक के लिए बुलाया, समस्या के समाधान का भरोसा
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह के रिम्स पहुंचने पर प्रबंधन से नाराज चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की और अपनी समस्याओं को रखा। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों को अलग से बुला कर उनकी समस्याओं को सुनने का भरोसा दिलाया।
रिम्स के चिकित्सकों के प्रतिनिधि के रुप में डॉ. प्रभात कुमार व अन्य डॉक्टरों ने आज स्वास्थ्य मंत्री से निदेशक के चेंबर में मुलकात की। बाद में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि उनकी ओर से स्वास्थ्य मंत्री को अपनी मांगों से संबंधित एक मांग पत्र भी सौंपने के लिए तैयार किया गया था। लेकिन मंत्री महोदय की ओर ये कहा गया कि वे आठ अगस्त की समीक्षा बैठक के बाद उनसे अलग से आकर मिलेंगे, उनकी समस्याओं को दूर किया जाएगा।
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि रिम्स में कार्यरत चिकित्सकों को सरकारी सेवकों की तरह सभी तरह की सुविधा और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिल रहा है, इस पर मंत्री ने उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्री व सरकार से चिकित्सकों की कोई नाराजगी नहीं है, बल्कि नाराजगी तो रिम्स प्रबंधन से है।
अनुबंधित नर्सिंग कर्मियों की मांगों पर विचार का दिलाया भरोसा
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान, रिम्स में कार्यरत अनुबंधित नर्सिंग कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।
रिम्स का औचक निरीक्षण करने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष अनुबंधित नर्सिंग कर्मियों की प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को रखा। अनुबंधित नर्सिंग कर्मियों की प्रतिनिधि निशा कुमारी ने मंत्री को यह जानकारी दी कि सैकड़ों की संख्या में अनुबंधित नर्सिंग कर्मी पिछले दस वर्षाें से कार्यरत है, लेकिन अब तक उनके सेवा का नियमितीकरण नहीं हो पाया है, जबकि उनसे एक नियमित मेडिकल कर्मी से कहीं अधिक काम लिया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने नर्सिंग अनुबंधित कर्मियों की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आज उनकी रिम्स के निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के निदेशक से भी बात हुई है। उन्होंने कहा कि आखिर दस वर्षां में क्यों नहीं सेवा नियमितीकरण हो पाया, इस मामले को वह खुद देखेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 8 अगस्त को रिम्स मसले पर वे प्रबंधन व अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले है, पूरी जानकारी हासिल करने के बाद वे आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
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