रांची,2अगस्त। झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पाटी ने सिंचाई, विस्थातिपों के पुनर्वास व आदिवासी विकास के लिए 15वें वित्त आयोग से पर्याप्त मदद की मांग की है।
पार्टी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश और उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने आयोग के समक्ष झारखंड के लोगों की हितों को रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से देश के सर्वांगीण विकास एवं आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु यहां के खनिज संपदा का दोहन होता रहा है, उस अनुपात में राज्य में मूलभूत सुविधाओं के विकास का कार्य नहीं हो सका है। राज्य सरकार अपने संसाधनों, केन्द्र के सहयोग तथा परिश्रमी मानव संपदा के बल पर आगे बढ़ रही है, आपके आगमन से एक नई आशा का संचार हुआ है।
पार्टी की ओर से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास में सहयोग के साथ-साथ ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया गया कि वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वर्ष 2014 तक राज्य में 9 सरकारें आयी और 3 बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य की प्रगति अपेक्षाकृत कम हुई। वर्ष 2014 से राजनीतिक स्थिरता आयी है और हमारी प्रगति तेज हुई है। इसमें वित्त आयोग से सहयोग की जरुरत है ताकि राज्य का और तेजी से विकास हो सके। राज्य में 30 प्रतिशत से अधिक वन भूमि है और देश के पर्यावरण संतुलन में राज्य की महती भूमिका है। वित्त आयोग से अनुरोध है कि हमारे राज्य में वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल करते हुए विकास कार्यों हेतु भूमि की उपलब्धता पर समुचित ध्यान दें।भाजपा की ओर से आयोग को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया कि राज्य में 27 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजातियों की है, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर करना आवश्यक है। वित्त आयोग को राज्य की इस विशेष स्थिति पर ध्यान देते हुए सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र में पर्याप्त संसाधन राज्य को उपलब्ध कराने के संबंध में निर्णय लेना चाहिए।
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि कोयला, लोहा एवं अन्य खजिन के उत्खनन एवं परिवहन के कारण प्रदूषण का स्तर बहुत उंचा है, जिससे गरीब लोगों को तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इन कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सीमित हैं। इन सभी के कारण यहां की जनता गरीब एवं कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं। वित्त आयोग को आम जनता के प्रति अधिक जवाबदेही निभाने की जरुरत है ताकि उनका जीवन स्तर सुधारा जा सके। भाजपा नेताओं ने बताया कि 70 प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है और मात्र 20-25 प्रतिशत खेती योग्य भूमि ही सिंचित हो सकी हैं। वर्षों से बड़ी-बड़ी सिंचाई परियोजनायें लम्बित पड़ी है जिनके लिए राज्य सरकार के पास समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं है। उदाहरण के लिए स्वर्णरेखा परियोजना, कन्हर बराज परियोजना आदि के नाम लिये जा सकते हैं। उम्मीद है कि वित्त आयोग सिंचाई के क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग राज्य सरकार को करेगा। पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य में एथनॉल की प्रचुर उपलब्धता से व्यावसायिक उपयोग एवं बाजारीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने के लिए भी हम वित्त आयोग की तरफ उम्मीद लगाये बैठे हैं। शिष्टमंडल की ओर से बताया गया कि राज्य के 24 में से 19 जिले उग्रवाद प्रभावित हैं। गत वर्षों में उग्रवादी घटनाओं को काफी नियंत्रित भी किया गया है, परंतु राज्य की पुलिस प्रशासन को और चुस्त-दुरुस्त तथा तकनीकी रुप से सक्षम एवं साधन सम्पन्न बनाने के लिए भी संसाधन की आवश्यकता है।
राज्य में रेल नेटवर्क का विस्तार पारम्परिक रुप से कच्चे खनिज के ढुलाई को ध्यान में रखकर किया गया है। आवश्यकता है कि इस मानसिकता में परिवर्तन लाया जाय और जनता की परिवहन आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य में रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाए। भारतीय रेल राज्य की दुर्लभ भूमि के अतिरिक्त भारी मात्रा में वित्तीय अंशदान की भी उम्मीद करती है, जबकि राज्य से रेलवे की जो कमाई होती है, उसमें से राज्य को अंशदान नहीं मिलता है। इस व्यवस्था को न्यायोचित बनाने के लिए हम वित्त आयोग से अपील करते हैं। राज्य में कई रेल परियोजनायें लम्बित है, जिन्हें कार्य की गति बढ़ाकर जल्द से जल्द परियोजना पूरी करने की आवश्यकता है। झारखंड में धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन की असीम संभावनायें हैं और उस पर्यटन क्षेत्र से रोजगार के क्षेत्र में गुणात्मक वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में आधारभूत संरचना के विकास हेतु विशेष ध्यान देने की आपसे निवेदन है।