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योजनाओं से सिंचित भूमि की मैपिंग सुनिश्चित हो-राजबाला वर्मा

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4रांची,12अप्रैल। मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने जल संसाधन विभाग की समीक्षात्मक बैठक में निदेश दिया कि सिंचाई हेतु जो स्वीकृति योजनाएं हैं उनकी पूरी प्रोफाईल तैयार करें साथ ही उन योजनाओं से कितनी भूमि सिंचित होगी इसकी भी मैपिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कृषि एवं सिंचाई विभाग आपस में समन्वय बनाकर योजनाओं पर निर्णय लें ताकि गैर जरुरी योजनाओं का कार्यान्वयन न हो सके।
53 योजनाओं का डीपीआर तैयार करें
मुख्य सचिव ने 53 वृहत एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं के डीपीआर बनाने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुल प्रस्तावित 68 वृहत एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं में से बची हुई 53 योजनाओं की डीपीआर तीन माह में तैयार करें ताकि दो लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचित किया जा सके। विदित हो कि कुल 98 योजनाएं है जिनमें से 68 योजनाओं में रिनोवेशन का कार्य होना है, जिनमें से कुल 15 योजनाओं की टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, कई योजनाओं पर कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है।
2500 मध्यम सिंचाई योजनाओं की प्रोफाईल बनेगी
श्रीमती वर्मा ने प्रधान सचिव जल संसाधन सुखदेव सिंह को निर्देश दिया कि राज्य में पहाड़ी इलाकों में जो हिल एरिगेशन स्कीम बनाई जानी है, उनकी पूरी प्रोफाईल तैयार करें साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये कि उक्त योजनाओं से किस प्रकार का लाभ होगा और कितनी भूमि सिंचित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सभी सिंचाई योजनाओं के क्वालिटी कंट्रोल की निगरानी के लिये एक कंसल्टेंट की बहाली करें ताकि निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण किया जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्वर्णरेखा परियोजना की समीक्षा मुख्यालय में ही की जायेगी।
22 बृहत एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं का काम प्रगति पर
प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग सुखदेव सिंह ने बैठक में बताया कि फिलहाल 22 बृहत एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं का काम प्रगति पर है जिनमें से कई योजनाओं पर 98 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। यथा सोनुआ, उपरशंख, सुरंगी, अजय बराज, नॉर्थ कोयल सहित 22 योजनाओं पर तीव्र गति से कार्य हो रहा है। इन 22 सिचंाई योजनाओं पर 3080.47 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया था जिसमें से 31 मार्च 2016 तक 2903.47 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है।
2015-16 में सबसे अधिक व्यय
प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग सुखदेव सिंह ने मुख्य सचिव को बताया कि वित्तीय वर्ष2015-16 में विभाग द्वारा बीते पांच वित्तीय वर्षों में सबसे अधिक बजटीय राशि का व्यय किया गया है। उन्होंने बताया कि 1353.75 करोड़ के आउटले के विरुद्ध 1154.33 करोड़ रुपये ( 85.27 प्रतिशत ) राशि खर्च की गई है। जबकि वित्तीय वर्ष 1763.16 करोड़ के विरुद्ध मात्र्ा 724.62 करोड़ ही व्यय हुए थे।
बैठक में मुख्य रुप से प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग श्री सुखदेव सिंह, सहित मुख्य अभियंता समेत कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

शिक्षित आदिम जनजाति युवकों को चिन्हित करें-सीएस
राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने आज महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा की। समीक्षा के क्रम में उन्होंने निर्देश दिया कि आदिम जनजाति पेंशन योजना के कार्यान्वयन के लिये आदिम जनजाति टोलों के पढ़े लिखे युवकों को चिन्हित कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाये ताकि योजना का कार्यान्वयन जमीन स्तर पर हो सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में अन्तर को कम करने के लिये ऐसे जिलों का चिन्हित करें जहां योजना को लाभ लाभुकों को कम मिला है तथा संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगें।
श्रीमती वर्मा ने कहा कि सेविका- सहिया के परस्पर सहयोग से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न स्तरों पर आदेश निर्गत करने के साथ गाइडलाईन जारी करें साथ ही मुख्यमंत्र्ाी लक्ष्मी लाडली योजना के लक्ष्य को हासिल करने हेतु आबादी के अनुसार जिलों को कर्णांकित किया जाये। साथ ही विधवा सम्मान योजना के शुभारंभ के संबंध अग्रेतर कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि सी0डी0पी0ओ0 द्वारा बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ बैठक कर बैंकों की शाखाओं और डाकघर के खातों में ट्रांसफर/ निकासी की जांच की जाये।
पोषण सखी की बहाली 30 जून तक पूरी की जाये
मुख्य सचिव ने समीक्षात्मक बैठक में विभागीय सचिव को निदेश दिया है कि प्रथम चरण में राज्य पोषण योजना के कार्यान्वयन के लिये सभी चिन्ह्ति 6 जिलों यथा दुमका, गोड्डा, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा और चतरा में पोषण सखी की बहाली 30 जून तक सुनिश्चित की जाये। विदित हो कि इन 6 जिलों के कई प्रखंडों में अब तक 4800 पोषण सखियों की बहाली की जा चुकी है और 5526 पोषण सखियों की बहाली का कार्य किया जाना है। श्रीमती वर्मा ने निदेश दिया कि सभी पोषण सखी को प्रशिक्षित करने के लिये कार्यशाला का आयोजन जिला स्तर पर सुनिश्चित किया जाना चाहिये ताकि जमीन स्तर पर कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
महिला पर्यवेक्षिकाओं के कार्यों संबंधी लक्ष्य का हो निर्धारण
श्रीमती वर्मा ने समीक्षात्मक बैठक में कहा कि महिला पर्यवेक्षिका को आंगनबाड़ी केन्द्रों के कार्यों से संबन्धित लक्ष्य का निर्धारण किया जाय। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं को सूचीबद्ध करना, कुपोषित बच्चों को चिन्ह्ति करन एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों की गुणवत्ता में सुधार जैसे कार्यों का निर्धारण होना चाहिये। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के यूनिफॉर्म कलर पर भी निर्णय लिया जाना चाहिये।
मानव तस्करी के लिये ग्राम स्तर पर कमेटी का गठन
मुख्य सचिव श्रीमती राजबाला वर्मा ने निदेश दिया है कि राज्य में मानव तस्करी के मामले बहुतायत में होते रहे हैं। अतः मानव तस्करी पर रोक लगाने हेतु ग्राम स्तर पर चाईल्ड प्रोटेक्शन कमिटि का गठन करने के साथ साथ इस कृत्य में शामिल दलालों को भी चिन्हिृत करें और स्पेशल ब्रांच का भी सहयोग लें। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर भी डी0सी0पी0ओ0 की नियुक्ति की जाये। उन्होंने निदेश दिया कि देश के अन्य राज्यों में अवस्थित फैक्ट्रियों में जहां बाल श्रम की संभावना है, वहां के जिलाधिकारी से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिये।
फैक्ट्रियों का करें निरीक्षण
श्रीमती वर्मा ने विभागीय सचिव को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर रेडी टू फूड बनाने वाली फैक्ट्रियों का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि कौन सी फैक्ट्री कितना उत्पादन कर रही है और कितना फूड सप्लाई कर रही हैं, इसका जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही क्वालिटी किस प्रकार की है इसकी जांच प्रखंड स्तर पर होनी चाहिये। साथ ही थर्ड पार्टी ईवोल्यूशन के लिये दो माह के अन्दर कार्रवाई की जाये।
बैठक में मुख्य रुप से सचिव महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा श्री विनय कुमार चौबे, संयुक्त सचिव, निदेशक और युनिसेफ के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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