रांची,19फरवरी। झारखण्ड की राजधानी रांची के खेलगांव में पूरे देश के विश्वविद्य्नालयों ने कला कौशल और सांस्कृतिक प्रदर्शन से अन्तर विश्वविद्य्नालयीन यूथ फेस्टिवल 2018 में दर्शकों को खूब हंसाया और रुलाया।
युवा महोत्सव के तीसरे दिन आज ’राम दयाल मुंडा ऑडिटोरियम’, ’टाना भगत स्टेडियम’, ’म्यूजियम ऑडिटोरियम’ और ’राम दयाल मुंडा कला भवन’, ’बिरसा मुंडा स्टेडियम’ में आज’रंगोली’, ’माइम’,’ ’मिमिकरी’, ’एलोक्युशन’, ’इंस्टालेशन’“वेस्टर्न वोकल (सोलो), क्लासिकल इंस्ट्रूमेंट सोलो (नॉन पेर्क्युसन), ’वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट, समूह गान (पाश्चात्य) आयोजित की गयीं।
रंगोली प्रतियोगिता में पारंपरिक संस्कृति की दिखी झलक
खेलगांव स्थित ’राम दयाल मुंडा कला भवन’ में ’रंगोली’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका थीम था-’पारंपरिक रंगोली’. प्रत्येक प्रतिभागी को ढाई घंटे का समय दिया गया था. प्रतिभागियों ने पारंपरिक और संस्कार रंगोली बनाते हुए इस कदर रंग भरे कि लोग देखते रह गए. विभीन रंगों के शेड्स का साथ साथ कुछ प्रतिभागियों ने 3डी इफ़ेक्ट भी डाले. किसी ने इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में गोपाल कम्मर, पंडित पदम् चंद और आर.सी भवसार शामिल थे. प्रतियोगिता में निम्न विश्वविद्य्नालयों ने भाग लिया. इसमें गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, विश्व भारती, बनारस हिन्दू विश्वविद्य्नालय, श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी, एसएनडीटी विमेंस यूनिवर्सिटी, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, गुलबर्गा यूनिवर्सिटी, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, कर्नाटक यूनिवर्सिटी, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्य्नालय, मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट थे.
बिना बोले संवाद को देखकर अवाक रह गये दर्शक
खेलगांव स्थित ’रामदयाल मुंडा ऑडिटोरियम’ में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में सचिन नायक, अशोक आनंद, और त्याग राजा कुमार थे. माइम में कुल 15 विश्वविद्य्नालयों ने शिरकत की और 5-5 मिनट में ही बिना बोले ही दर्शकों से ऐसा संवाद स्थापित किया कि लोग अवाक रह गए.
प्रतियोगिता में निम्न विश्वविद्य्नालयों ने भाग लिया. इसमें गांधीग्राम रुरल इंस्टिट्यूट, तमिलनाडु, वाई एमसीए यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, फरीदाबाद, बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी, भोपाल, विश्वभारती यूनिवर्सिटी, महाराजा कृष्णा सिंह जी, भावनगर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ मुंब , एआ एसइसीटी यूनिवर्सिटी, भोपाल, सीयुएसएटी, कोच्ची, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी,भारतीदाशन यूनिवर्सिटी, मणिपुर यूनिवर्सिटी, महाराजा रंजीतसिंह यूनिवर्सिटी, भटिंडा, आरटीएम् यूनिवर्सिटी,नागपुर, एसएनडीटी वीमेंस यूनिवर्सिटी, अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने भाग लिया. निर्णायक मंडल के सदस्य सचिन नायक को अनिल ठाकुर ने मेमेंटो देकर सम्मानित किया. गांधीग्राम यूनिवर्सिटी ने प्रकृति की नुक्सान और पानी की कमी को दर्शाया. वा एमसीए ने विज्ञान और तकनीकी युग में आये पीढ़ीगत बदलाव को बखूबी बताया.बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी ने खेल के दौरान ड्रग्स न लें और खेल को खेल भावना से खेलें. महाराजा कृष्णा कुमारसिंह यूनिवर्सिटी ने यह बताया की यदि आपमें जज्बा और जूनून है तो दिव्यांग होते हुए भी आप सबको पछाड़ सकते हैं. सीयुएसएटी, कोच्ची के प्रतिभागियों ने महिषासुर मर्दनी को जीवंत बना दिया.
वेस्टर्न वोकल (सोलो) में 15विवि टीम ने हिस्सा लिया
खेलगांव स्थित ’म्यूजियम ऑडिटोरियम’ में वेस्टर्न वोकल (सोलो) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में जोहेन फोस्टर, राजेश मैथ्यू, और तेज़ मुंडू थे. वेस्टर्न वोकल (सोलो) प्रतियोगिता में कुल 15 विश्वविद्य्नालयों ने शिरकत की और प्रत्येक प्रतिभागी को 10 मिनट का समय दिया गया था.
इस प्रतियोगिता में गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, महर्षि मारकंडे यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ केरल, यूनिवर्सिटी ऑफ़ मुंब , मणिपुर यूनिवर्सिटी, बैंगलोर यूनिवर्सिटी ऑफ़ बैंगलोर, अमृता विश्वविद्य्नापीठं, नागपुर यूनिवर्सिटी, तेजपुर यूनिवर्सिटी, हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्य्नालय, खैरागढ़, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी, पारुल यूनिवर्सिटी, बड़ोदरा ने भाग लिया .
’ क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल सोलो ने मंत्रमुग्ध किया
खेलगांव स्थित ’म्यूजियम ऑडिटोरियम’ में ’क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल सोलो (नॉन पेर्क्युसन)’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रत्येक प्रतिभागी को 15 मिनट का समय दिया गया था. प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में दुर्गा शर्मा, पंडित अभिक सरकार और विद्वान रवि कुमार थे. प्रतियोगिता में निम्न विश्वविद्य्नालयों ने भाग लिया. इसमें महात्मा गाँधी यूनिवर्सिटी, विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला, शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर, डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी, असम, श्री वेंकटेश्वारा यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ केरल, राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक एंड आर्ट्स यूनिवर्सिटी, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्य्नालय, खैरागढ़, भारत विद्य्नापीठ ने भाग लिया.
एलोक्यूसन प्रतियोगिता में विदेशी छात्रों ने भी हिस्सा लिया
खेलगांव स्थित ’रामदयाल मुंडा स्टेडियम’ में ’एलोक्यूसन’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रत्येक प्रतिभागी को 10 मिनट का समय दिया गया था. प्रतियोगिता का शीर्षक था – भारत विवधताओं का देश है’. प्रतियोगिता में निम्न विश्वविद्य्नालयों ने भाग लिया. इसमें विद्य्नासागर यूनिवर्सिटी, पश्चिम बंगाल, ओस्मानिया यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखण्ड, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला, गुजरात यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर, बनस्थली विद्य्नापीठ, आ टीएम् यूनिवर्सिटी, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, महात्मा गाँधी यूनिवर्सिटी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, बंगलोर यूनिवर्सिटी गुवाहाटी यूनिवर्सिटी और पारुल यूनिवर्सिटी ने भाग लिया.
विदेशी छात्रों (अफ्रीका से आये हुए) ने भी इसमें भाग लिया और भारत की विविधता का बखूबी वर्णन किया. कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक और गुजरात से लेकर अरुणाचल तक भारत विविधताओं से भरा है और हर क्षेत्र की अपनी एक खासियत है. 15 विश्वविद्य्नालय के छात्रों ने प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधन के साथ उसकी, सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाजों और खानपान तक की विशेषता को बताया.
इंस्टालेशन प्रतियोगिता में दिखी आदिवासी सभ्यता-संस्कृति की झलक
खेलगांव स्थित ’रामदयाल मुंडा कला भवन में ’इंस्टालेशन’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. प्रत्येक प्रतिभागी को ढा घंटे का समय दिया गया था. प्रतियोगिता का शीर्षक था- आदिवासी समाज और संस्कृति’ तथा बॉर्डर. आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति को ध्यान नें रखते हुए प्रतिभागियों ने बेहतरीन तरीके से प्रतिरुप बनाया. आदिवासी क्षेत्र की समस्या पर आधारित माओवाद और सैन्यसुरक्षा पर भी प्रतिरुप बने. आदिवासी जीवन में शिकार, ग्रामीण जन जीवन, उनकी कला संस्कृति और कठिन जीवन शैली को भी दर्शाने की प्रतिभागियों ने कोशिश की. इसमें विभिन्न विश्वविद्य्नालयों ने भाग लिया. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, छत्रपति शिवाजी महाराज यूनिवर्सिटी, एआ एसइसीटी यूनिवर्सिटी, मोहन लाल सुखाडिया यूनिवर्सिटी, महाराजा कृष्णा कुमार सिंहजी यूनिवर्सिटी, गुवाहाटी यूनिवर्सिटी, एसआरटी यूनिवर्सिटी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्य्नालय, महात्मा गाँधी यूनिवर्सिटी, कश्मीर यूनिवर्सिटी, राजा मान सिंह तोमर यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैसूर, विश्व भारती शान्तिनिकेतन, पंजाब यूनिवर्सिटी. निर्णायक मंडल में पंडित पदम् चंद, प्रवीन शर्मा और गोपाल कम्मर थे.