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मुआवजा दिलाने में पीएम से हस्तक्षेप का आग्रह

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सीएम ने पीएम से झारखंड के हक की वकालत की
pmरांची,23सितंबर।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोल इंडिया द्वारा खनन के लिए अधिकृत की गयी 24 हजार एकड़ सरकारी भूमि का मुआवजा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप का आग्रह किया है, साथ ही उन्होंने खनन रॉयल्टी को बढ़ाने की मांग की और सार्वजनिक उपक्रमों में स्थानीय लोगों के नियोजन के लिए नीति तैयार करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया है। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साम्प्रदायिक सद्भाव बनाये रखना झारखण्ड सरकार की प्राथमिकता रही , ऐसे मामलों में राज्य सरकार निष्पक्षतापूर्वक कार्रवाई करती रही है और पुलिस प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गंुजाईश झारखंड में नही है।उन्होंने बताया कि राज्य में साम्प्रदायिक घटना नहीं के बराबर होती हैं।

सीएम ने कोयलामंत्री से मुलाकात की,बकाया भुगतान का आग्रह

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज भारत के केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल से मिलकर कोयला खनन से जुड़े राज्य सरकार के मांगों को उनके सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश के कुल कोयला उत्पादन का 60 प्रतिशत कोयला खनन करता है। झारखंड राज्य में कोल इंडिया लिमिटेड की सीसीएल (सेन्ट्रल कोल फिल्ड लिमिटेड), बीसीसीएल (भारत कोंकिग कोल फिल्ड लिमिटेड) एवं ईसीएल (ईस्टर्न कोल फिल्ड लिमिटेड) पिछले कई वर्षों से कोयला खनन का कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार इन्हें हर सम्भव सहायता प्रदान करती है। जैसा कि आप जानते हैं कि कोयला खनन से व्यापक प्रदूषण एवं विस्थापन होता है। अतः सभी कोयला कम्पनियों का यह नैतिक एवं विधिक दायित्व है कि वे झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के गरीब जनता के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करे, साथ ही राज्य सरकार को कानूनी दृष्टि से सभी बकाया का भुगतान करें। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा है कि कोयला खनन के विकास के लिए अधिग्रहित जमीन “कोल बियरिंग एरिया“ (एक्यूजीशन एण्ड डेवलपमेंट) एक्ट, 1957 के द्वारा की गई थी। 1971 में कोयला के खनन के राष्ट्रीयकरण के बाद एक नया अनुछेद 18-ए इस एक्ट में जोड़ा गया है जिसके द्वारा केन्द्र सरकार या कम्पनी को राज्य सरकार की लीज की गई भूमि के उपयोग के एवज में रॉयल्टी का भुगतान किए जाने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सन् 1971 से इस अनुच्छेद के जोड़े जाने के बाद भी झारखंड राज्य में काम करने वाली कोयला कम्पनियाँ राज्य के हजारों एकड़ जमीन अधिग्रहित रखने के बावजूद राज्य सरकार को इस बाबत कोई भी भुगतान नहीं किया है। इस तरह ये कम्पनियाँ न केवल केन्द्रीय अधिनियम का उल्लंघन कर रहें हैं बल्कि राज्य सरकार के उन नियमों जिसके तहत लीज धारी को राज्य सरकार को रॉयलिटि, सेस एवं किराया का भुगतान करना है, का भी घोर उल्लंघन कर रही है। मुख्यमंत्र् ने कहा कि राज्य सरकार के अभिलेखों के आलोक में यदि सीसीएल का उदाहरण लें तो राज्य सरकार के केवल चार जिलों मंे 24 हजार एकड़ भूमि सीसीएल के कब्जे में है। सीसीएल को इसके लिए लगभग 2763 करोड़ रु0 एकबारगी रॉयल्टी के रुप में भुगतान करना अपेक्षित है साथ ही, लगभग 138 करोड़ बकाया वार्षिक किराया तथा लगभग 200 करोड़ बकाया वार्षिक सेस का भुगतान करना है। इस तरह राज्य सरकार के प्रति केवल सीसीएल के पास ही 3100 करोड़ रु0 से अधिक देनदारी है। राज्य सरकार के भूमि पर सीसीएल एवं अन्य कोयला कम्पनियों द्वारा किए जा रहे भूमि उपयोग का आंकड़ा यदि संग्रहित किया जाए तो यह राशि और भी अधिक बढ़ जाएगी।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कोयला मंत्री को यह बताया कि राज्य सरकार के अधिकारी इन कोयला कम्पनियों के अधिकारियों के साथ निरंतर सम्पर्क में है तथा यह मुद्दा कई बार विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है, किन्तु कोयला कम्पनियाँ विलम्ब के तरीकों को अपना कर वैधिक बकाया राशि राज्य सरकार को भुगतान नहीं कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय कोयला मंत्री से इस मामले में अविलम्ब हस्तक्षेप करने तथा राज्य सरकार को लम्बे समय से वंचित विधिक बकाया राशि का भुगतान कराने का अनुरोध किया।

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