कहा- प्रासंगिक मुद्दों पर विमर्श का अभाव सरकार संचालन का स्वस्थ लक्षण नहीं
रांची,11जनवरी। राज्य के संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने आज मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि प्रासंगिक मुद्छों पर विमर्श का अभाव सरकार संचालन का स्वस्थ लक्षण नहीं है।
सरयू राय ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कल 10जनवरी की मंत्रिपरिषद बैठक मे उपर्युक्त विषय के संबंध मे वे अपनी बात को रखना चाहते है। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली में विचार विमर्श की असहिष्णुता का स्थान नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद के भीतर और बाहर सहकर्मियों के बीच प्रासंगिक मुद्दों पर विमर्श का अभाव सरकार संचालन का स्वस्थ लक्षण नहीं है।
संसदीय कार्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य मे खनन पट्टों, ख़ासकर लौह अयस्क खनन पट्टों, का मामला लंबे समय से विवादों और पेंचदगियों से ग्रस्त रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी सहमत होंगे कि इससे राज्य की छवि धूमिल हुई है। वर्ष 2015 के आरम्भ मे मुख्यमंत्री का एक वक्तव्य संभवतः किरीबुरु से अखबारों मे आया था कि सरकार राज्य की सभी लौह अयस्क खनन पट्टों का लीज नवीकरण व अवधि विस्तार करेगी। उस समय भी मैंने कहा था कि ये खनन पट्टे इसके लायक नहीं है।उन्होंने बताया कि कुछ दिन बाद सरकार द्वारा इस बारे मे विकास आयुक्त की अध्यक्षता मे एक उच्च स्तरीय समिति बनायी गयी। उस समिति की अनुशंसा पर सरकार ने इस वर्ष के आरम्भ में 21 खनन पट्टों को रद्द कर दिया, कारण कि सभी पट्टाधारियों ने अनियमिततायें की है। इसके बाद सरकार ने सभी खनन पट्टों को अपने कब्जे मे ले लिया। उस समय मैंने सुझाव दिया था कि पट्टों के निरसन के उपरांत खदानों का वैज्ञानिक क्षेत्र निर्धारण कर पट्टों का आवंटन नीलामी के माध्यम कर देना श्रेयस्कर होगा।
इस बीच उनमें से तीन पट्टाधारी उच्च न्यायालय गये।सरकार के वक़ील द्वारा उपयुक्त दलील नहीं देने के कारण न्यायालय ने लेटे दे दिया। बाद मे उच्च न्यायालय ने विगत अगस्त मे निर्णय दे दिया कि ये सभी आवेदक दो माह के भीतर सुनिश्चित करे कि इन्होंने अनियमिततायें-उल्लंघन दूर कर ली है और सरकार इसे संपुष्ट करे, अन्यथा इनका खनन रोक दिया जाय। सरकार का इनका पट्टा अस्वीकृत करने का निर्णय भी न्यायालय ने इस आधार पर ख़ारिज कर दिया कि इसमें विहित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। इसके बाद होना यह चाहिये था कि सरकार इनके खनन पर रोक लगाये और विहित प्रक्रिया का पालन करते हुये अन्य सभी खनन पट्टों को अस्वीकृत करने की प्रक्रिया आरम्भ करे परंतु सरकार ने उल्टे इन सभी खनन पट्टों को अवधि विस्तार देने का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद को स्वीकृति के लिये भेज दिया और मंत्रिपरिषद ने गत 28 दिसंबर की बैठक मे इसे मान भी लिया। मैं उस बैठक मे उपस्थित नहीं था। अगले दिन मैंने इस बारे मे आपसे बात किया। मुझे लगा आप हमारे अनुरोध पर गौर करेंगे। पर कल की बैठक मे गौर करना तो दूर आप इस पर कुछ सुनने के लिये भी तैयार नहीं हुये। मुझे यह ठीक नहीं लगा।
सरयू राय ने कहा कि “मैं आपको सरल शब्दों मे बताना चाहता हू कि इससे सरकार की छवि धूमिल हुई है. इस विषय को मंत्रिपरिषद के समक्ष लाने का कोई औचित्य नहीं था. प्रासंगिक नियमों के अनुसार यह खान विभाग का मामला है. विभाग अपनी ज़िम्मेदारी मंत्रिपरिषद पर डाले यह उचित नहीं. आश्चर्य है कि जिन्हें उच्च न्यायालय ने अनियमितताये दो माह के भीतर दुरुस्त करने के लिये कहा उन्हीं का अवधि विस्तार के विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दिया. एम सी रुल के अनुसार जो खनन पटे दो साल से अधिक समय तक बन्द पड़े है उन्हें व्ययगत करने की विहित प्रक्रिया आरम्भ करने की जगह विभाग ने इनकी अवधि विस्तार का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद मे भेज दिया और मंत्रिपरिषद ने इस पर मुहर लगा दिया. उल्लेखनीय है कि दो-चार को छोड़कर सभी लौह अयस्क पट्टे इसी श्रेणी मे हैं । उन्होंने कहा कि विडम्बना तो यह है कि अन्य सभी लंबित खनन पट्टों को भी थोक भाव से अवधि विस्तार का प्रस्ताव कैबिनेट को खान विभाग ने भेज दिया और कैबिनेट ने बिना जानने की कोशिश किये कि ये पट्टे किस चीज के हैं, कहा है, इनकी समीक्षा भी हुई है या नहीं कैबिनेट ने इन पर भी स्वीकृति दे दी. यह अनियमितता है. खनन पट्टे जो उलंघन के दोषी हैं, लंबे समय से बंद है. शाह कमीशन ने जिन पर पेनाल्टी लगा है, न्यायालय ने जिन्हें उलंघन ठीक करने के लिये दो माह का समय दिया है, एमसी रुल के अनुसार जिन्हें व्ययत होना चाहिये उन्हें कैबिनेट से अवधि विस्तार दिला देने से बढ़कर दूसरी गलती क्या होगी. अन्य कई तकनीकी पहलू इसके है जिनका उल्लेख कर विषयवस्तु को बोझिल बनाना मैं नहीं चाहता. संपर्कों पता चल गया हो गया कि भारत सरकार ने आरसेलर मित्तल का सारेडा मे स्टेज 2 का खनन प्रस्ताव आज ख़ारिज कर दिया. ये सभी भी सारंडा मे ही है. जब अनियमितताओं और उल्लंघनों को दूर किये बिना खदानों से खनन असंभव है तो इन्हें अवधि विस्तार देने के प्रस्ताव पर मुहर लगाना बुद्धिमत्ता पूर्ण नहीं कहा जायेगा.