पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण पातर के खिलाफ की जा रही एनआईए जांच की पुनर्समीक्षा का आग्रह
रांची,8मई। झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर एनआईए द्वारा की जा रही जांच में त्रुटियों एवं एकपक्षीय होकर गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के मामले में जांच की पुनर्समीक्षा का आग्रह किया गया है।
उन्होंने बताया कि 9 जुलाई 2009 को बुंडू में विधायक रमेश सिंह मुंडा की अज्ञात अपराधियों ने गोली मार कर हत्या कर दी और इस हादसे में विधायक के अंगरक्षक और एक बच्चे की मौत हो गयी। इस कांड की सीआईडी जांच हुई और हत्याकांड में माओवादी संगठन के कुंदन पाहन व अन्य सदस्यों का नाम आया। पकड़े गए अपराधियों में बलराम साहू जोएनआईएआईए द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अभियुक्त हैं। उन्होंने पुलिस के समक्ष अपने बयान में तत्कालीन विधायक हत्याकांड में शामिल होने की बात कबूली है और यह भी बात कबूल किया कि विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या कराने की जिम्मेवारी माओवादी संगठन के अध्यक्ष कुन्दन पाहन के द्वारा मुझे दी गई थी। बलराम साहू ने यह भी बताया कि विधायक द्वारा माओवादियों के खिलाफ बोलने के लिए हत्या करने की योजना बनी थी। बलराम साहू ने उक्त हत्या में गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर की संलिप्तता होने से साफ इन्कार किया है।
इस घटना में एक और अभियुक्त राममोहन सिंह मुण्डा की गिरफ्तारी 31 मार्च, 2016 को होती है उन्होंने भी विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या में अपना संलिप्तता होने की बात कबूली है एवं अन्य कई घटनाओं में संलिप्त होने की बात कबूली है। उन्होंने भी गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर की संलिप्तता से साफ इन्कार किया है। जांच एजेन्सी द्वारा 30 सितम्बर, 2016 को कोर्ट में चार्जशीट समर्पित करती है। 14 मई, 2017 को कुन्दन पाहन रांची पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते हैं एवं रमेश सिंह मुण्डा हत्याकांड में अपना जुर्म कबूल करते हैं लेकिन उन्होंने भी राजापीटर की संलिप्तता से साफ इन्कार किया है।
इस बीच केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने उक्त कांड के जांच का जिम्मा एनआईए को दिया एव एनआईए ने 30 जून, 2017 कोप्राथमिकी दर्ज किया और 13 सितम्बर, 2017 कोएनआईने गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर उक्त कांड के सम्बन्ध में पूछताछ के लिए बुलाया।
आपको अवगत करना चाहूंगा कि गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर एवं इनकी पत्नी जो आवेदिका हैं ये वर्षों सेएनजीआ संजीवनी ग्राम ट्रस्ट‘‘ के तहत सामाजिक कार्य करते रहे हैं गरीबों के बीच अपनी अच्छी छवि होने के कारण ही तमाड़ विधानसभा उपचुनाव-2009 में भी गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबु सोरेन को पराजित किया था जिसके कारण शिबु सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। एक और महत्वपूर्ण तथ्य आपको स्मरण कराना चाहूंगा कि जब तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुण्डा की हत्या हुई थी तो दूसरे दिन प्रमुख समाचार-पत्र ‘‘हिन्दुस्तान‘‘ के मुख्य पृष्ट पर यह खबर प्रकाशित हुआ था कि वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में स्व0 रमेश सिंह मुण्डा ने लकड़ी तस्करों से मिलकर नक्सलियों से मदद लेकर अपनी जीत सुनिश्चित कराने के लिए नक्सलियों को 50 लाख देने का वादा किया था जिसमें प्रथम किस्त के तौर पर 20 लाख रुपये दिए गए थे बाँकी 30 लाख रुपये माओवादी कुन्दन पाहन को नहीं देने एवं नक्सलियों के खिलाफ बोलने के कारण रमेश सिंह मुण्डा की हत्या नक्सलियों द्वारा की गई थी। उक्त कांड के घटनाक्रम को देखा जाय तो यह आशंका को बल मिलता है कि एक राजनैतिक षडयंत्र के तहत गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजापीटर को फंसाने की साजिश है। इस कांड के मुख्य अभियुक्त सह माओवादी कुन्दन पाहन के आत्म समर्पण के 45 दिनों के बाद राज्य सरकार द्वारा इस कांड की जांच के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाना भी आशंका को जन्म देता है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश रची गई है। इसलिए इस मामले में चल रही जांच की पुनर्समीक्षा जरूरी है।