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बलबीर दत्त को पत्रकारिता में लाईफटाईम एचीवमेंट अवार्ड
26अन्य को मिला मीडिया फेलोशिप
रांची,18अगस्त । राज्य सरकार की ओर से आज वरिष्ठ पत्रकार और हिन्दी दैनिक रांची एक्सप्रेस के प्रधान संपादक बलबीर दत्त को झारखंड मीडिया के क्षेत्र में जीवन पर्यन्त सर्वोत्कष्ट सेवा सम्मान (लाईफटाईम एचीवमेंट अवार्ड) 2011-12 प्रदान किया गया।
राजधानी रांची में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा ’समाज, शासन एवं मीडिया अंतर्विरोध एवं समन्वयकारी तत्व’ पर आयोजित सम्मेलन में 26अन्य पत्रकारों को मीडिया फेलोशिप और 10मीडिया कर्मियों को विकासात्मक आलेख के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया। इस मौके मुख्य अतिथि के रुप में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मुख्य वक्ता के रुप में वरिष्ठ पत्रकार शशिशेखर और हरिवंश भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रत्यनों से व्यवस्था में सही संवाद की स्थिति बनेगी। उन्होंने फेलोशिप प्राप्त करने वाले युवा पत्रकारों से अपील की कि वे स्वतंत्र्ा और निर्भिक होकर लिखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रास्ता सही है,तो मंजिल जरुर मिलेगी। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के लिए यह जरुरी है कि स्पष्ट ॰ष्टिकोण है। जिन्दगी और समाज के लिए स्पष्ट ॰ष्टिकोण रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज, शासन व मीडिया के बीच असहजता चिंता और चुनौती का विषय है। पूरी व्यवस्था इस तरह बनाने की जरुरत है,जिससे परिणाम सहज व सुलभ हो। अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज लोग अलग झारखंड आंदोलन की चर्चा करते है, लेकिन इससे पहले भी झारखंड का एक गौरवमयी इतिहास रहा है। इस भूमि ने कभी किसी का अधिपत्य नहीं स्वीकार किया, कभी समझौता नहीं किया।
वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने लाईफ टाईम एचीवमेंट अवार्ड प्राप्त करने वाले बलबीर दत्त को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने झारखंड में पत्रकारिता की नींव डाली। उन्होंने पत्रकारिता के विकास के लिए राज्य सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास को संस्थागत रुप दिए जाने की जरुरत है।उन्होंने स्थानीय भाषा को मान्यता देने और कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत भवन की तरह से झारखंड अकादमी बनाए जाने की सलाह दी। हरिवंश ने कहा कि लोगों का यह मानना है कि पत्रकारिता नाकारात्मक और सरकार गोपनीयता पर बल देती है, लेकिन आज आवश्यकता इस बात की है कि दोनों के बीच परस्पर विश्वास का ब्रिज बन सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार की ओर से प्रखंड स्तर से लेकर सचिवालय स्तर तक प्रतिदिन के कार्याें को लेकर नियमित बिफ्रिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अभी ऐसा कोई फोरम नहीं है, जिससे व्यक्तिगत स्तर पर खबर निकाल कर छापी जाती है, जिससे एक-दूसरे अखबारों की खबर में तथ्य व आंकड़ों में भिन्नता होती है। उन्होंने प्रखंड व पंचायत तथा गांवों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया,ताकि आंचलिक पत्रकारों को भाषा-कौशल का हुनर व नई तकनीक के बारे में जानकारी दी जा सके। हरिवंश ने कहा कि मानव पूंजी को उत्कृष्ट व प्रशिक्षित किए जाने की जरुरत है। उन्होंने यह भी कहा कि शासन की ओर से जिसे बैड न्यूज (खराब खबर) माना जाता है, उसे निकालना और छापना एक मुश्किल काम है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उस महिला में इतना साहस था कि वह प्रेस के गलत करने पर उसे गलत बताने की शक्ति रखती थी।
वरिष्ठ पत्र्ाकार शशिशेखर ने कहा कि कई कारणों से आज पूरी दुनिया में कसमसाहट है और व्याकुलता का दौर है, यही कारण है कि विश्व भर में तरह-तरह के परिवर्त्तन हो रहे है। उन्होंने कहा कि पत्र्ाकारिता को प्रोफेशन बनाने वालों से अब यह उम्मीद की जाती है कि वे सत्य को अपनाते हुए अपने कर्त्तव्यों का निवर्हन करें। इस मौके पर वरिष्ठ पत्र्ाकार बैजनाथ मिश्र ने ख्यातिब्ध पत्र्ाकार बलबीर दत्त के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन पर्यंत पत्र्ाकारिता के लिए समर्पित बलबीर दत्त से उन्हें वर्षाें काफी कुछ सीखने को मिला।उन्होंने कहा कि वे 13-14वर्षाें तक बलबीर दत्त के साथ काम किए। 1985-86 में बलबीर जी उन्हें व अन्य पत्रकारों को डायरी दे देते थे और हफ्ते में होने वाली बैठक के दौरान उनसे अपनी गलतियों व दूसरे की गलती को लिखकर लाने को कहते थे। उन्होंने कहा कि बलबीर जी ने पत्र्ाकारिता का वर्णमाला तैयार किया और उन्होंने सैकड़ों पत्र्ाकारों को प्रशिक्षण देने का काम किया। बैजनाथ मिश्र ने कहा कि अलग झारखंड की लड़ाई में मीडिया ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और मीडिया की ओर से बलबीर जी ने ही आंदोलन का ध्वज अपने हाथों में ले रखा था।
जीवन पर्यन्त सर्वाेत्कृष्ट सेवा सम्मान पाने वाले वरिष्ठ पत्र्ाकार बलबीर दत्त ने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से शुरु किया गया इस तरह का सराहनीय प्रयास संभवतः देश के किसी अन्य राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने मौजूदा काल में मीडिया की बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि आज सीबीएससी द्वारा भी अपने पाठ्यक्रम में मीडिया को शामिल करने पर विचार कर रही है। झारखंड अलग राज्य के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1938 में आदिवासी महासभा की ओर से यह मांग उठने लगी थी, बाद में झारखंड पार्टी बनने के बाद यह आंदोलन जोर पकड़ने लगा। लेकिन वर्षाें तक यह माना जाता रहा कि इस आंदोलन को मीडिया की ओर से हवा दिया जा रहा है और दिल्ली में बैठक कुछ अधिकारियों का भी कहना था कि इस आंदोलन में दम नहीं है और अलग राज्य का गठन नहीं होगा। बलबीर दत्त ने शोध कार्याें को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रयास को आगे भी जारी रखने की जरुरत है। उन्होंने झारखंड आंदोलन पर पुस्तक व शोध की आवश्यकता पर बल दिया। बलबीर दत्त ने कहा कि मीडिया फेलोशिप से अध्ययन की प्रवृति बनेगी। उन्होंने युवा पत्र्ाकारों को सलाह दी कि वे प्रोफेशनल्स स्कील से संपन्न हो,इसके लिए जरुरी है कि पढ़ो, पढ़ो, पढ़ो और लिखो, लिखो, लिखो की सलाह को अपनाएं।
समारोह में झारखंड मीडिया के क्षेत्र्ा में जीवन पर्यन्त सर्वाेत्कृष्ट सेवा सम्मान में बलबीर दत्त को मुख्यमंत्र्ाी ने प्रशस्ति पत्र्ा व ढ़ाई लाख का चेक सौंप कर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। शोध एवं अन्वेषण योजना के अंतर्गत मीडिया फेलोशिप प्राप्त करने वाले संजय श्रीवास्तव, शेली खत्र्ाी, संजय कृष्ण, आलोका, मो. सलाउद्दीन, शैलेश कुमार सिंह, पंकज त्र्ािपाठी, शक्तिधर पांडेय, अनंत, विकास कुमार सिन्हा, अमित कुमार झा, मो. नौशाद आलम, मो. नदीम अख्तर, सर्वजीत सिंह, कुमार संजय, प्रशांत झा, चन्दोश्री ठाकुर, प्रशांत जयवर्द्धन, तनवी झा, महेश्वर सिंह छोटू, रुपक कुमार, ओम प्रकाश पाठक, युगेश्वर राम, सुरेंद्र लाल सोरेन, अनुपमा कुमारी और आशीष कुमार सिन्हा शामिल है। वहीं विकासात्मक आलेक के लिए वंदना टेटे, संतोष कुमार किरो, वीरेंद्र कुमार महतो, पुष्पा टेटे, अन्नी अमृता, अनुपमा कुमारी, संजय कुमार सुमन, नवतन कुमार, संजय यादव और ओली मिंज को पुरस्कार दिया गया। जबकि राष्ट्रीय पुरस्कार/अवार्ड से सम्मानित होने वाले फिल्म निर्देशक मेघनाथ व बीजू टोप्पू को भी पुरस्कृत किया गया।
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