रांची,25अप्रैल। स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य की एक महत्वाकांक्षी योजना है पी.एल.ए. (पार्टिसिपेटरी लर्निंग एंड एक्शन)। गांवों में की जा रही पीएलए बैठकों के माध्यम से मां-बच्चे की मृत्यु में लगातार कमी आ रही है। वे आज रांची के रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित राज्यस्तरीय सामुदायीकरण संवाद के दौरान अपने वीडियो संदेश के माध्यम से कही। उन्होंने कहा कि गांव के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में सहियाओं की अहम भूमिका है।
इस दौरान खाद्य्न एवं आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने पीएलए गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य का कार्य सामुदायिक कार्य है। सहियाएं अपने कार्यों के द्वारा समुदाय में इसी सामुदायिक भावना का विकास कर रही हैं, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे समुदाय के लोगों पर भरोसा जताना होगा और इन्हें सशक्त बनाने की पहल करनी होगी। इसके लिए सरकार को भी सार्थक भूमिका में रहनी होगी।
इस अवसर पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चन्द्रप्रकाश चौधरी ने कहा कि राज्य में हो रहीं पीएलए की बैठकें सरकार की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसमें सामुदायिक कार्यकर्ता के रुप में सहियाओं का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि पीएलए बैठकों में जाने का मौका मिला है। इन बैठकों से महिलाएं में स्वास्थ्य मुद्दों पर समझ विकसित हुई है। वे जागरुक हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक कार्यकर्ताओं को सरकार की ओर से जो सुविधा मिलनी चाहिए, उसे दिलाने एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करुंगा।
मौके पर स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने कहा कि मां-बच्चे की मृत्यु को रोकना सरकार की चुनौती है और इसमें सहियाओं की अहम् भूमिका है। उन्होंने कहा कि माता मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बाल विवाह है, यहां 38 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी जाती है। झारखंड इसमें दूसरे सबसे राज्य क े रुप में जाना जाता है। इसलिए मातृ मृत्यु दर कम करने क े लिए 18 साल के बाद ही शादी करने को बढ़ावा देने की जरुरत है। यदि सहियाओं को सहयोग मिले, तो आने वाले दिनों में कई गांव बाल विवाहमुक्त हा े जाएंगे। श्रीमती खरे ने कहा कि आज से 10 साल पहले संपूर्ण टीकाकरण की उपलब्धि 8 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सहियाओं क े सामुदायिक गतिविधियों से लोगों में यह जागरुकता आयी है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले युवा अगर गांव में जाकर पीएलए बैठकों पर समझ बनाएंगे तो एक बेहतर चिकित्सक के रुप में स्वयं को विकसित कार्यक्रम समन्वयक कर सकते हैं। इसे डॉक्टरी की पढ़ाई का हिस्सा बना देना चाहिए। इसके पूर्व समुदाय उत्प्रेरण कोषांग की राज्य अकय मिंज ने राज्य में संचालित पीएलए कार्यक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला। एकजुट संस्था के डॉ प्रशांत त्रिपाठी ने सामुदायिक स्वास्थ्य की मजबूती में पीएलए बैठक की अवधारणा एवं महत्व की जानकारी दी और कहा कि पश्चिमी सिहभूम क े चक्रधरपुर स्थित छोटे से गांव से शुरु पीएलए बैठक पद्धति को आज विश्वस्तर पर सराहा जा रहा है। इस अवसर पर रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव, एनएचएम के समुदाय उत्प्रेरण कोषांग प्रभारी सह उपनिदेशक डॉ प्रदीप बासकी, उपनिदेशक डॉ पुष्पा मारिया बेक, झारखंड राज्य खाद्य्न आयोग के सदस्य हलधर महतो, सामाजिक कार्यकर्ता बलराम, रामगढ़ के जिला परिषद अध्यक्ष ब्रह्मदेव महतो आदि ने भी विचार रखे। गढ़वा, लोहरदगा, लातेहार सहित अन्य जिलों की सहियाओं ने मां-बच्चे की मृत्यु को रोकने पर आधारित पीएलए बैठक की प्रक्रियाओं का रोल प्ले के माध्यम से जीव ंत प्रदर्शन किया एवं अनुभव सुनाये। कार्यक्रम परिसर में पीएलए प्रशिक्षण, स्वास्थ्य कार्यक्रम, गांव में उपलब्ध प्राक ृतिक खाद्य्न पदार्थ आदि पर आधारित स्टॉल लगाए गए। कार्यक्रम में एकजुट के डॉ निर्मला नायर, शिवानंद रथ, राजक ुमार गोप, अमित बनर्जी, विकास नाथ क े अलावा सभी जिलों से आये जिला समन्वयक, एनएचएम के सहिया प्रशिक्षण समन्वयक, मीडिया परामर्शी, क्ष ेत्रीय समन्वयक, जिला कार्यक्रम समन्वयक, जिला प्रशिक्षक दल, प्रखंड प्रशिक्षक दल सहित 1000 सहियाओं ने भाग लिया। शाम में पद्मश्री मुक ुद नायक व उनकी टीम की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए। मंच संचालन मिनाक्षी शर्मा ने किया।