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जब राजीव गांधी अपने ऊपर जानलेवा हमला करने वाले से मिलने दो बार जेल पहुंचे, हमलावार ने कहा- उनकी आँखों में नहीं थी नफ़रत
जब राजीव गांधी अपने ऊपर जानलेवा हमला करने वाले से मिलने दो बार जेल पहुंचे, हमलावार ने कहा- उनकी आँखों में नहीं थी नफ़रत
रांची। “मुझसे राजीव गांधी पुलिस कस्टडी में मिलने दो बार आए , वे जानना चाहते थे कि मैंने उन पर गोली क्यों चलाई । उन्हें क्यों मारना चाहता हूँ “ ये बयान है दो अक्टूबर 1986 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करने में कोशिश में उम्र क़ैद की सजा काट चुके । रहे करमजीत सिंह सोनाब का । लिट्टे के आतंकी साज़िश से वर्षों पहले राजीव गांधी पर पहली बार जानलेवा हमला हुआ था, दिल्ली दंगों की आग पूरी तरह बुझी नहीं थी और उस वक्त राजीव गांधी उस शख्स से मिलने जाते थे जो उनकी जान लेना चाहता था। जी हाँ 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या से पहले महात्मा गांधी की जयंती के दिन 2 अक्टूबर 1986 को पूर्व प्रधानमंत्री की जान जाते-जाते बची । इतिहास के पन्नों में राजीव गांधी की हत्या की ये पहली कोशिश की कहानी भले ही अब याददाश्त से गुम हो गई हो लेकिन 84 के सिख विरोधी दंगों से आहत करमजीत सिंह सोनाब उम्रक़ैद काटने के बाद जब जेल से बाहर निकला तो उसने एक टीवी चैनल में दिए इंटरव्यू में खुलकर अपनी साज़िश राजीव गांधी से मुलाक़ात के बारे में बातें की।
करीब चार साल पुराने इस इंटरव्यू में करमजीत सिंह बताते हैं कि मैं 55 दिनों की पुलिस रिमांड पर था। राजीव गांधी थाने में सीबीआई अधिकारियों की मौजूदगी में मुझसे मिलने दो बार आए । “वे मेरे से नफ़रत नहीं करते थे प्यार से बात करते और मैं भी उन्हें आप कह कर पुकारता था। उन्होंने मुझसे पूछा कि आप मुझे क्यों मारना चाहते थे तो मैंने कहा कि आपने सिखों के खिलाफ़ दंगें कराए । तो उन्होंने कहा ये दंगे मैंने नहीं कराए । “ सोनाब बताते हैं कि सीबीआई अधिकारियों ने राजीव गांधी को ज्यादा बात करने से मना कर दिया उन्हें डर था कहीं मैं गालियाँ नहीं दे दूँ ।
करमजीत सिंह सोनाब और राजीव गांधी की ये मुलाक़ात पूर्व प्रधानमंत्री की उस छवि का सबूत है जिसके दीवाने आज भी हैं । शायद उसी का आनुवांशिक असर है कि प्रियंका गांधी चेन्नई जेल में अपने पिता की हत्यारी से मुलाक़ात करने गई ।
बहरहाल उस लौटते हैं 35 साल पुरानी उस तारीख़ पर जब 2 अक्टूबर 1986 को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी पत्नी सोनिया गांधी के साथ राजघाट पर पहुँचते हैं। बापू को श्रद्धांजलि दे ही रहे थे कि गोली की आवाज़ आती है। सुरक्षाबलों ने फ़ौरन मोर्चा सँभाल लिया और राजीव सोनिया को सुरक्षा घेरे में लेते हुए गोली जिधर से आई उधर फ़ायरिंग शुरु की । करमजीत सिंह सोनाब बोगनबेला में छुपकर बैठा था और वहीं से फ़ायरिंग की थी चंद मिनटों में करमजीत सिंह सोनाब को पकड़ लिया गया। सोनाब ने बताया कि उस वक्त के गृह मंत्री बूटा सिंह ने सुरक्षाबलों को आदेश दिया गोली मारो लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया और मैं पकड़ा गया ।
सिख दंगों से आहत करमजीत सिंह से आहत बदला लेने के लिए राजीव गांधी पर पहली बार अटैक करने वाले इस शख्स ने जेल से छूटने के बाद चार साल पहले एक टीवी इंटरव्यू में साज़िश की सारी दास्ताँ सुनाई । उसने बताया कि एक साल उसने राजीव गांधी की हर गतिविधि पर नज़र रखी। 15 अगस्त को लाल क़िले पर झंडा फहराने जब राजीव गांधी गए तब वो तीन किलोमीटर की दूरी से राजीव गांधी को देखा और राजघाट जाकर उसने बोगलबेला की झाड़ियों में रहकर हमला करने की साज़िश रची। इसके लिए उसने पहले तो हरमंदिर साहिब जाकर कथित खालिस्तानियों से हथियार लेने की कोशिश की लेकिन उसे नहीं मिला तो तीन सौ रुपए में देसी कट्टा ख़रीदा। दस दिनों पहले बोगनबेला की झाड़ियों में जरुरत की बत्तीस चीजें लेकर छिप गया। उसने बताया कि दिल्ली में उन दस दिनों में 6 दिन लगातार बारिश हुई , बारिश से बुख़ार हो गया, कीड़े मकोड़े काटने लगे सातवें दिन वो नीच उतारा तो भीखारी जैसी स्थिति हो गई थी सुरक्षाबलों की नज़र पड़ी तो लेकिन पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया । दरअसल करमजीत सिंह ने पगड़ी हटा ली थी और क्लीन सेव था जिसकी वजह से सरदार होने का शक नहीं रहा और बातचीत में झांसा देने में कामयाबी हासिल कर ली । 10 रुपए का 800 ग्राम चने उसने लिए थे और उसी के सहारे 10 दिनों तक ज़िंदा रहा । 2 अक्टूबर को उसने तय वक्त पर फ़ायरिंग तो की लेकिन गोली किसी को नहीं लगी । बाद में राजीव गांधी ने बताया कि मेरी जान सुरक्षाबलों ने नहीं बल्कि सोनाब के ख़राब हथियार ने बचाई
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