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जनप्रतिनिधि मर्यादित तरीके से बातों को रखें व नियमों का पालन करें-सुमित्रा
विधानसभा की ओर से दो दिवसीय संसदीय कार्यशाला का आयोजन
रांची,4जुलाई। झारखंड विधानसभा की ओर से विधायकों के ज्ञान संवर्द्धन और लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली में जनता की आवाज को बेहतर तरीके से सदन में रखने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज रांची के एटीआई में आयोजित दो दिवसीय संसदीय कार्यशाला का उदघाटन किया।
लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे जनता की समस्याओं को सदन में गंभीरता के साथ मर्यादित होकर रखें और नियमों का पालन करें।उन्होंने कहा कि 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इस बार 34 नवनिवार्चित सदस्य हुए है यह गर्व की बात है, लेकिन साथ ही साथ संसदीय कार्यप्रणाली का भी उन्हें ज्ञान होना चाहिये इस के लिए झारखण्ड विधानसभा द्वारा आयोजित कार्यशाला में उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे सदन की कार्यवाही में उन्हें लाभ होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सदस्यों का कर्तव्य है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान दें और सदन के पटल पर उनकी समस्याओं को रखें । उन्होंने कहा कि बजट में विभिन्न येाजनाओं का लाभ जनता तक पहंुचाना विधानसभा सदस्याओं का दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में उनके द्वारा किये गये कार्यों का क्षेत्र में जाकर निरीक्षण करें और यह जानकारी लें कि जनता उनके कार्यों से कितने संतुष्ट हैं। विधानसभा सदस्य विधायक फंड खर्च करने में पारदर्शिता रखें ।उन्होंने कहा कि क्षेत्र में होने वाले विकासात्मक एवं कल्याणकारी कार्यों का अच्छा असर जनता पर होता है। इससे जनप्रतिनिधियों की छवि भी जनता के नजर अच्छी बनती है। अतः कार्य पर जनप्रतिनिधि विशेष ध्यान दें।
सुमित्रा महाजन ने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों में अन्योनाश्रय संबंध है, जनप्रतिनिधि जनता की आवाज बनते हैं, इसके लिए उनका कर्तव्य है कि संयमित होकर सदन में बात उठायें। उन्होंने कहा कि मर्यादित होकर कार्य करने से जनप्रतिनिधि की छवि लोगों के बीच अच्छी बनती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कर्तव्य है कि वे सरकार के कार्यों का मूल्यांकण करें और सरकार की कमियों के साथ ही अच्छे कार्यों से भी जनता को अवगत करायें। उन्होंने कहा कि जनता सदन की कार्यवाही की छोटी-छोटी बातों पर नजर रखती है। वे देखती हैं कि उनके जनप्रतिनिधि उनकी क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठा रहें है कि नहीं । इसलिए हर जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका पर गौर करते हुए अपना मूल्याकंण करें कि उनमें कमी कहां है।
संसदीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि
निर्वाचित विधायकों का आचरण इस तरह हो,जिससे लोकतंत्र के मंदिर की मर्यादा को कभी भी ठेस नहीं पहुँचें। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा देश में सबसे आर्दश विधानसभा के रुप में स्थापित हो और यह अन्य राज्यों के सदनों के लिए अनुकरणीय बनें, इस दिशा में समर्पण भाव से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि संसदीय व्यवस्था के तहत मंत्रिपरिषद के सदस्य विधानसभा के प्रति उत्तररदायी होते हैं। विधानसभा का प्रत्येक सदस्य जनता के प्रति जवाबदेह होगा, चाहे वो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष। देश एवं राज्य के अच्छे एंव बुरे परिस्थितियों के लिए मंत्रिमंडल एवं विधानमंडल के सदस्यगण जिम्मेदार होते हैं, इस बात का ध्यान सदैव सभी को रखना होगा। उन्होंने कहा कि झारखण्ड राज्य के समग्र विकास के लिए बहुत सी जन-कल्याणकारी नीतियाँ बनानी होगी। जनकल्याण के कई और कार्यक्रम तेजी से संचालित करने होंगे। इस कार्य एवं नीतियों के निर्माण में बेहतर वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सदस्यों का वित्तीय प्रबंधन में भी अहम भूमिका है। हमारे सदस्यगण बजट को और गहनता से देखें, उस पर चिन्तन करें, ऐसा करने से वे विभागीय बजट पर बेहतर ढ़ंग से परिचर्चायें कर सकते हैं और सदन की गरिमा को बिना ठेस पहुँचायें व अनुशासन में रहकर सरकार को सही व बेहतर सुझाव दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा के प्रत्येक सदस्य अधिक सक्रियता से कार्य करें।
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बताया कि सदन की गरिमा और मया्रदा बनाये रखना सभी सदस्यों की जिम्मेवारी है। उन्होंने निर्वाचित सदस्यों से कहा कि वे दूसरे को सुनने, प्रस्ताव तथा पक्ष रखने और जोरदार बहस की आदत डाले, लेकिन सदन की मर्यादा और गरिमा का ध्यान रखें
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े लेाकतंत्र के लिए जाना जाता है और हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र् का नारा लोकतंत्र की वास्तविक प्रतिबिम्ब को प्रदर्शित करता है। निर्वाचित प्रतिनिधि का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए की वे जनता के प्रति जवाबदेह रहे। सांसद और विधायक लोकतंत्र के आधार स्तंभ है। इनका दायित्व है जनता की आवाज बनकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती बनाने हेतु कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सभी का प्रशिक्षण कार्यक्रम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय के इस कार्यशाला से निश्चित रुप से झारखण्ड की संसदीय व्यवस्था में मजबूत होगी। रघुवर दास ने कहा कि आने वाले 28 महीनों के अन्दर झारखण्ड का अपना विधान सभा भवन बनकर तैयार हो जाएगा। हमारा देश डिजिटल इंडिया की ओर आगे बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए हम आने वाले दिनों में विधानसभा में होने वाले सत्रों को आई0टी0 के माध्यम से ऑनलाईन शुरुआत करेंगे। विधायक अपने टेबल पर लगे कम्प्युटर स्क्रीन में प्रश्नों के उत्तर देंगे। उन्होंने कहा कि हम विधान सभा के कार्यवाही को पेपरलेस बनायेंगे। आई0टी0 के माध्यम से हम जनता और सरकार के बीच फासलों को कम कर पाऐंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वित्तिय वर्ष 2016-17 का बजट जनता का बजट होगा। बजट सत्र की तैयारी सितम्बर माह से ही शुरु कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है, और 14वें वित्त आयोग में बढे़ टैक्स से राज्य को 5 हजार करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त होगी साथ ही 3 हजार करोड़ की अतिरिक्त राशि राज्य को और मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों में मानव संसाधन की कमी को देखते हुये सरकार जल्द ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दबे कुचले लोगों की आवाज बनेगी।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कार्यशाला को संबोधित
करते हुए कहा कि कार्यपालिका और विधायिका हल के दो बैल समान है, जिनके बीच सामंजस्य से ही राज्य का समुचित विकास संभव है। उन्होंने कहा कि संविधान के सिद्वांतों को सही तरीके से व्यवहार में लाना आवश्यक है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों इनके बीच सामजंस्य स्थापित करना होगा। इस कार्यशाला के जरिए इस बात पर प्रकाश डाला जाएगा जिससे संसदीय प्रणाली का विकास हो। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में युवाओं की जरुरत है,लेकिन युवा राजनीति में आने से कतराते है। इसके लिए हमारा प्रयास हो कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में युवाओं को राजनीति से जोड़ा जाय।
इससे पहले झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष डॉ0 दिनेश उरांव ने अपने संबोधन में कहा कि संसदीय प्रणाली में शासन के पृथक अंग का सम्मान हो और वे नियंत्र्ाण एवं संतुलन के सिद्धांत पर चलते हुए अपने दायित्वों का निवर्हन कर सकें, इस दिशा में यह कार्यशाला सहायक सिद्ध होगा।विधानसभा स्पीकर ने कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया, बजट आवंटन में प्राथमिकता निर्धारण के आधार, व्यय की पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी प्रत्येक सदस्यों को होनी चाहिए। सभा में बजट का समर्थन करने के लिए जितनी जानकारी की आवश्यकता है उससे ज्यादा जानकारी उसका विरोध करने के लिए आवश्यक है। राज्य का बजट सरकार के लिए जोड़-घटाव का और अधिकारियों के लिए गुणा-भाग का ही विषय नहीं होना चाहिए। जनसरोकार से जुड़ा बजट ही लोकल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सत्य सिद्ध कर सकता है। दिनेश उराँव ने कहा कि जनसरोकार से जुड़े सवाल और जनसमस्याओं को केन्द्र में रखकर बनाया गया बजट ही लोक कल्याणकारी हो सकता है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हो जाती है चाहे वे मंत्री हो, सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कहा कि विधानसभा के सदस्यों के लिए आयोजित इस कार्यशाला से विधानसभा सदस्यों की क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्वि होगी और हम जनता की समस्याओं का समाधान प्रभावी तथा बेहतर कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली में विधायिका और कार्यपालिका एक दूसरे से जुड़े हुए है। इसमें सरकार के मार्गदर्शन हेतु विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि सदन में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष एक दूसरे की आलोचना करके जनता का हित नहीं कर सकते। इस हेतु उन्हे एक साथ मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायती राज्य व्यवस्था को सुदढ़ करके ही देश को सही मायने में उन्नत बनाया जा सकता है।
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