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चारा घोटाले मामले में लालू-जगन्नाथ समेत 45 दोषी करार

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लालू समेत 37 अभियुक्तों के सजा की बिन्दू पर सुनवाई 3 को, आठ दोषियों को तीन वर्ष कारावास तथा 50 हजार से 50 लाख तक जुर्माने की सजा सुनायी गयी

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रांची,30सितंबर। अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत 45 अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। लालू प्रसाद समेत 37 अभियुक्तों के सजा की बिन्दू पर 3 अक्टूबर को सुनवाई होगी, वहीं आठ दोषियों को अदालत ने आज तीन वर्ष कारावास तथा 50 हजार से 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की विशेष अदालत ने चाईबासा कोषागार से 37.70 करोड़ रुपये अवैध निकासी से जुड़े कांड संख्या आरसी 20ए/96 मामले में सभी 45 आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने भा.द.वि. की धारा 120बी, 420, 409, 467, 468, 471 व 477 तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून 13(1) के तहत दोषी करार दिया। सीबीआई की विशेष अदालत ने आज जिन आठ अभियुक्तों को तीन वर्ष तक की सजा सुनायी है, उन्हें औपबंधिक जमानत भी दे दी गयी। जबकि शेष बचे सभी 37 आरोपियों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया गया।
सीबीआई के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने आज जिन आठ अभियुक्तों को तीन वर्ष कारावास की सजा सुनायी, उनमें राजनीतिज्ञ विद्य्ना सागर निषाद, ध्रुव भगत, भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिृवत्त अधिकारी के.अरुमुगम, आपूर्तिकर्त्ता सुनील कुमार सिंह, राजेश वर्मा, विमला शर्मा, शिव कुमारी और मधु मेहता शामिल है। वहीं अदालत ने विभागसार निषाद तीन वर्ष के कारावास की सजा के साथ ही एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है, वहीं ध्रुव भगत को 3लाख रुपये का जुर्माना तथा आईएएस अधिकारी रहे के.अरुमुगम को 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि आपूर्तिकर्त्ता विमला शर्मा को 50 लाख रुपये, मधु मेहता को 5 लाख रुपये, शिव कुमारी को 3लाख रुपये, राजेश वर्मा को तीन लाख रुपये और सुनील कुमार सिन्हा को 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सीबीआई अधिवक्ता ने बताया कि आज अदालत में 45 में से 42 आरोपी उपस्थित थे, जबकि स्वास्थ्य कारणों से बीबी प्रसाद, अजीत कुमार झा और केएन झा उपस्थित नहीं हो सके।
उन्होंने बताया कि लालू प्रसाद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भादवि की विभिन्न धाराओं व भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत जो दोष सिद्ध हुआ है, उन आरोपों में एक वर्ष से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने जिन अभियुक्तों को तीन वर्ष तक की सजा देनी थी, उनके सजा के बिन्दुओं पर आज ही फैसला सुना दिया गया,ऐसी स्थिति में 3 अक्टूबर को शेष बचे आरोपियों को 3 वर्ष से अधिक और सात वर्ष से कम की सजा सुनाये जाने की संभावना है। सीबीआई अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने करीब 475 पृष्ठों और नौ खंडों में अपना फैसला सुनाया है। पहले खंड में इंट्रोडक्शन है, दूसरे खंड में बचाव पक्ष की दलीलें है, तीसरे पक्ष में आपूर्तिकर्त्ताओं का पक्ष, चौथे खंड में पशुपालन विभाग के सात अधिकारियों का पक्ष, पांचवें खंड में भाप्रसे के चार अधिकारियों का पक्ष, छठे खंड में राजनेताओं का जिक्र व सातवें खंड में निष्कर्ष, आठवें खंड में भ्रष्टाचार के प्रभाव तथा नौ खंड में अदालत में पेश दलीलों को रखा गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 450 गवाह और बचाव पक्ष की ओर से 40 गवाह पेश किये गये। उन्होंने बताया कि चारा घोटाले के एक अन्य मामले आरसी 64ए /96 में भी जल्द ही फैसला आने की संभावना है, वहीं कुछ अन्य मामलों में गवाही की प्रक्रिया चल रही है।
अदालत द्वारा आज जिन 45 अभियुक्तों को सजा सुनायी गयी उनमें कई राजनेता, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, पशुपालन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी तथा आपूर्तिकर्त्ता शामिल है। आरोपी राजनेताओं में पूर्व मुख्यमंत्र्ाी लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र, जगदीश शर्मा, आर.के.राणा, धु्रव भगत और विद्य्ना सागर निषाद शामिल है। जबकि प्रमुख बड़े आरोपी अधिकारियों में तत्कालीन वित्त आयुक्त फूलचंद सिंह, तत्कालीन पशुपालन सचिव महेश प्रसाद, तत्कालीन पशुपालन सचिव बेक जूलियस, तत्कालीन पशुपालन सचिव के.अरुमुगम और तत्कालीन आयकर आयुक्त अधीक चंद्र दास शामिल है। चारा घोटाला के इस मामले में कुल 56 अभियुक्त थे, इसमें से 7 अभियुक्तों का निधन सुनाई के दौरान हो गया, जबकि एक अभियुक्त कोडस्चार्ज कर दिया गया, वहीं 2 सरकारी गवाह बन गये और 1 अभियुक्त ने खुद दोष स्वीकार कर लिया। जिन सात अभियुक्तों का निधन सुनवाई के क्रम में हो गया, उनमें डॉ.देबराज दोराई (मैनेजर,गवर्नमेंट कैटल फार्म), डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा (सेवानिवुत्त संयुक्त क्षेत्रीय निदेशक द.छोटानागपुर प्रक्षेत्र पशुपालन विभाग), डॉ. रामराज राम (निदेशक पशुपालन विभाग पटना), भोला राम तूफानी (तत्कालीन पशुपालन मंत्री,बिहार), चंद्रदेव प्रसाद शर्मा (तत्कालीन केंद्रीय मंत्री), हरीश खंडेलवाल (पार्टनर,एसबी सेल्स रांची) और परेश चंद्र कुंडू (पार्टनर सर्वेश्वरी ड्रग एजेंसी,रांची) शामिल है। वहीं चाईबासा के पूर्व आयुक्त सजल चक्रवर्ती आरोप मुक्त हो गये है। इसके अलावा सरकारी गवाह बनने वाले अभियुक्तों में पूर्व प्रशासनिक पदाधिकारी पशुपालन विभाग (मुख्यालय)पटना आर.के.दास और दीपेश चंडोक (श्रीबद्री नारायण एंड कंपनी) शामिल है, जबकि प्रमोद कुमार जायसवाल (प्रोपराइटर भगत एंड कंपनी,रांची) ने दोष स्वीकार कर लिया।
सीबीआई की विशेष अदालत आज जिन 45 अभियुक्तों के खिलाफ फैसला सुनाएगी, उनमें ब्रजनंदन शर्मा, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, गया प्रसाद त्रिपाठी, डॉ. अर्जुन शर्मा, सिलस तिर्की, डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद, डॉ. कीर्ति नारायण झा, ब्रजभूषण प्रसाद, बेक जुलियस, जगदीश शर्मा, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, विद्य्नासागर निषाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र, धु्रव भगत, डॉ. आर.के. राणा, अधीप चंद्र चौधरी, डॉ. अजीत कुमार वर्मा, रवि कुमार सिन्हा, त्र्ािपुरारी मोहन प्रसाद, सुनील कुमार सिन्हा, सुशील कुमार, मो. सईद, मो सैनुल हक, मो. एकराम, मो.हसैन, मो. तौहीद, विजय कुमार मल्लिक, महिन्द्र सिंह बेदी, मधु मेहता, हरीश कुमार, राजन मेहता, अजय कुमार सिन्हा, डॉ. गौरी शंकर प्रसाद, संजय सिन्हा, राजेश वर्मा, शिव कुमारी, सत्येंद्र कुमार मेहरा, रवींद्र कुमार मेहरा, सुनील गांधी, दयानंद कश्यप, महेंद्र प्रसाद, विमला शर्मा और के.अरुमुगम शामिल है।

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लालू पहुंचे जेल, लोस सदस्यता पर भी संकट
तीन अक्टूबर को सुनायी जाएगी सजा

बहुचर्चित चारा घोटाले मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा आज राजद प्रमुख लालू प्रसाद को दोषी करार दे दिया है। दोषी करार दिये जाने के साथ ही पूर्व मुख्यमंती लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र समेत सभी 37 अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा के बीच राजधानी रांची के खेलगांव के निकट होटलवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा ले आया गया।
राजनीतिक विश्लेषक लालू प्रसाद को दोषी ठहराये जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य के समक्ष संकट उत्पन्न होने और पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरु होने की अटकलें तेज हो गयी हैं। जबकि उच्चतम न्यायालय के हाल में आये फैसले के मद्देनजर राजद प्रमुख के समक्ष लोकसभा सदस्य के रुप में अयोग्य ठहराये जाने का खतरा भी पैदा हो गया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था िक यदि किसी सांसद या विधायक को किसी अदालत द्वारा दो साल या इससे अधिक की सजा वाले किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है, तो वह तत्काल अयोग्य माना जाएगा। आशंका इस बात की भी है कि वह अगला चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि लालू के जेल जाने की स्थिति में उनकी पार्टी बिखर जाएगी। हालांकि, खुद आरजेडी सुप्रीमो संकेत दे चुके हैं कि उनकी गैरमौजूदगी में उनके बेटे तेजस्वी पार्टी का नेतृत्व करेंगे। लेकिन आज लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह नेतृत्व के सवाल को टाल गये, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं ने राबड़ी देवी को अपना नेता बताया है। फिलहाल पार्टी के कई बड़े नेता रांची में है, वहीं कुछ नेता पटना से बाहर है,ऐसी स्थिति में इन बड़े नेताओं द्वारा एक स्थान पर बैठने के बाद ही कोई निर्णय लिये जाने की संभावना है। हालांकि जेल जाने से पहले लालू प्रसाद ने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को अपनी रणनीति से अवगत करा दिया है। लालू जब सरेंडर करने जा रहे थे, तब उनकी पार्टी के कई दिग्गज नेता सीएम की कुर्सी पाने के लिए टकटकी लगाए हुए थे, लेकिन लालू ने राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया था। जानकारों के मुताबिक अब लालू की पार्टी पर उनकी पकड़ भी खत्म होने के पूरे आसार हैं। 1997 में जब लालू जेल गए थे, तब उनकी तूती बोलती थी। इसलिए वह पत्नी को मुख्घ्यमंत्री की कुर्सी सौंप कर जेल से भी राज चलाने में कामयाब रहे थे। लेकिन आज वह राजनीतिक रुप से हाशिये पर थे। ऐसे में इस बार शायद ही वह अपनी राजनीतिक विरासत परिवार को सौंप सकें। वैसे, फैसले से पहले लालू ने कहा था कि उनके बेटे तेजस्घ्वी ही राजद की कमान संभालेंगे। लेकिन तेजस्वी के पास न तो पार्टी चलाने का अनुभव है और न ही स्थिति ऐसी है कि राजद के वरिष्ठ नेता आसानी से कमान उन्हें सौंप दें।
कानून के जानकारों का मानना है कि आज चारा घोटाले के आरसी 20ए/96 मामले में जिस तरह आठ आरोपियों को तीन साल की सजा 50 हजार से 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है,ऐसे में कानूनविदों का मानना है कि भी तीन से सात साल की सजा हो सकती है। सजा होने पर भी लालू जहां अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, वहीं मौजूदा लोकसभा की सदस्यता भी गंवाएंगे।

चारा घोटाले मामले में लालू पहले भी जा चुके है जेल

मामले के उजागर होने के बाद सीएम की कुर्सी पड़ी थी छोड़नी,राबड़ी को मुख्यमंत्र्ाी बनाया था
रांची,30सितंबर। चारा घोटाले मामले में वर्ष 1997 में भी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को जेल जाना पड़ा था और इस मामले के उजागर होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी भी छोड़नी पड़ी थी और उनके मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिये जाने के बाद राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री के रुप में शपथ दिलायी गयी थी।
25 जुलाई, 1997 को लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर सीबीआई कोर्ट में समर्पण करना पड़ा था। यह मामला चाइबासा ट्रेजरी (अब झारखंड में) से अवैध निकासी से जुड़ा था। सीबीआई का कहना था कि उसके पास इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री को न सिर्फ इस मामले की पूरी जानकारी थी, बल्कि उन्होंने कई मौकों पर राज्य के वित्त मंत्र्ाालय के प्रभारी के रुप में इन निकासियों की अनुमति दी थी। सीबीआई की ओर से अदालत में यह जानकारी दी गयी कि लालू प्रसाद को 1993 से ही सारे मामले की जानकारी थी और उन्होंने जानबूझ कर अवैध निकासी के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की,तथा कैग की रिपोर्ट की भी अनदेखी की गयी।

एक सप्ताह बेकन फैक्टरी में बंद थे लालू प्रसाद

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद एक सप्ताह तक बेकन फैक्टरी में बंद करके रखे गये थे। वर्ष 2001 में चारा घोटाले के मामले आरसी 47ए/96 की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद लगभग तीन महीनों जेल में रहे थे। 26 नवंबर, 2001 को मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश हरिचंद्र मिश्र की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने कांके स्थित बेकन फैक्टरी को कैंप जेल बनाने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। तीन दिसंबर, 2001 तक लालू बेकन फैक्टरी में बनाये गये कैंप जेल में रहे. तीन दिसंबर को ही अदालत ने उनको पटना स्थित बेऊर जेल भेजने की अनुमति दे दी थी। पटना हाइकोर्ट ने 1996 मे चारा घोटाले के सभी मामलों की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। सीबीआइ ने आरोपपत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के भी नाम जोड़े।

फंसाया गया,हाईकोर्ट में अपील करेंगेःतेजस्वी यादव

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने कहा है कि, ’हमारे नेता को फंसाया गया है, इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। कुछ शक्तियों ने पार्टी प्रमुख को फंसाने की कोशिश की, ऐसे लोगों के खिलाफ जनता की अदालत में भी जाएंगे और ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।’ उन्होंने कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते है और जल्द ही अपने वरीय अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

राबड़ी को हिम्मत से काम लेने की सलाह

फैसला आने के बाद लालू ने राबड़ी से फोन पर की बात
चारा घोटाले मामले में आज लालू प्रसाद को सीबीआई की अदालत द्वारा दोषी के तुरंत बाद जेल जाने के पूर्व मोबाइल पर फोन कर अपनी पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से बातचीत की। सूत्र्ाों से मिली जानकारी के अनुसार लालू ने राबड़ी को हिम्मत से काम करने की सलाह दी।

1993-94 में खुली चारा घोटाले की पोल

चाईबासा कोषागार में अवैध निकासी का पहला मामला उजागर हुआ था, पटना एयरपोर्ट पर एक करोड़ की नकद राशि पकड़े जाने पर मचा था बवाल, हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को सौंपी गयी थी जांच
वर्ष 1993-94 में पश्चिमी सिंहभूम जिले के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने सबसे पहले चाईबासा कोषागार से 34करोड़ रुपये से अधिक के अवैध निकासी से जुड़े मामले को उजागर करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था, इसके बाद बिहार पुलिस ने (तब झारखंड,एकीकृत बिहार का हिस्सा था) गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा के कोषागारों से फर्जी बिलों के जरिये करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किये थे। रातों-रात सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिये गये, कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और राज्य भर में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। बात यहीं खत्म नहीं हुई। एकीकृत विपक्षी दलों ने मांग उठाई कि घोटाले के आकार और राजनीतिक मिली-भगत को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए। इस बीच पटना एयरपोर्ट से एक करोड़ रुपये की नकद राशि को जब्त किया गया था, जिसके संबंध में यह आरोप लगाया कि यह पैसा पशुपालन घोटाले से जुड़ा था और इसे बिहार के एक बड़े राजनेता के पास पहुंचाया जा रहा था। बाद में हाईकोर्ट द्वारा मामले भाजपा नेता सुशील मोदी की जनहित याचिका पर मामले की जांच की जिम्मेवारी सीबीआई ने मामले की जांच की कमान संयुक्त निदेशक यू एन विश्वास को सौंपी और यहीं से जांच का रुख बदल गया।
इसके बाद बहुचर्चित चारा घोटाला सन् 1996 में सामने आया था। इसे पशुपालन घोटाले के नाम से भी जाना जाता है। यह 950 करोड़ का घोटाला था। इस मामले में लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और जेल भी जाना पड़ा था। लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवा कर जेल से ही बिहार का शासन चलाया था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा भी इस घोटाले में फंस गए थे। इसके अलावा राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी इसमें शामिल थे। सोमवार को लालू और मिश्रा सहित 45 आरोपी इस घोटाले से जुड़े एक मामले में दोषी करार दिए गए।
सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच के बाद कहा था कि मामला उतना सीधा-सादा नहीं है, जितना बिहार सरकार बता रही है। सीबीआई का ये भी कहना था कि चारा घोटालेमें शामिल सभी बड़े अभियुक्तों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और दूसरी पार्टियों के शीर्ष नेताओं से रहे हैं और उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि काली कमाई का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया है। सीबीआई के अनुसार, राज्य के खजाने से पैसा पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के मद के अंतर्गत निकाले। इसके बदले करोड़ों रुपए के फर्जी बिल जमा कराए गए। इस मामले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा के अलावा कई अन्य राजनेताओं के नाम भी सामने आये है।
चारा घोटाले के मामले में बिहार और झारखंड के अलग-अलग जिलों में कुल 53 केस दर्ज कराए गए थे। वहीं, इसमें राज्य के दिग्गज नेताओं और अधिकारियों समेत 500 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, लालू प्रसाद यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, भोला राम तूफानी, विद्य्नासागर निषाद सहित कई अन्य मंत्रियों पर मामले दर्ज हुए थे। अब तक इस मामले में 45 केसों की सुनवाई ही पूरी हो पाई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने अदालत को यह जानकारी दी कि फर्जी आवंटन पत्र बनाकर पैसे की निकासी की जाती थी, जबकि बिना माल सप्लाई किये पैसे का भुगतान प्राप्त किया गया। इस मामले में तत्कालीन लोक सेवक, मुख्यमंत्र्ाी, मंत्र्ाी विभागीय सचिव, आदि ने मिलकर घोटाले की राशि का बंदरबांट करने का आरोप है। ऐसी जानकारी दी कि पशुपालन विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक श्याम बिहारी सिन्हा नेताओं के पास पैसे पहुंचाते हैं, जबकि कृष्ण मोहन प्रसाद- पशुपालन विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक रहते हुए इन्होंने अफसरों के बीच पैसे बांटने में अहम रोल अदा किया। वहीं श्याम बिहारी सिन्हा का नौकर महेंद्र पशु आहार सप्लाई करने के साथ ही नेताओं तक पैसे का पैकेट समय पर पहुंचता था।

17वर्षाें तक चली लंबी सुनवाई के बाया आया फैसला
चाईबासा कोषागतार से जुड़े मामले का घटनाक्रम

चाईबासा कोषागार से 37.70करोड़ रुपये के अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले के मामले आरसी 20ए/96 में सीबीआई के रांची स्थित विशेष अदालत के जज प्रवास कुमार सिंह ने आज अपने एक बहुप्रतीक्षित फैसले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद समेत 45 अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
सीबीआई के विशेष जज प्रवास कुमार सिंह ने करीब 17वर्षा तक चली लंबी सुनवाई के बाद विगत 17 सितंबर को अभियोजन व बचाव पक्ष की ओर से बहस पूरी हो जाने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने कुल 45 में से सात लोगों को जहां आज ही 3 साल तक की कैद की सजा सुना दी गई वहीं शेष 38 लोगों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आगामी 3 अक्तूबर को सजा सुनाई जाएगी। जिन सात लोगों को आज सजा सुनाई गई उनमें दो राजनीतिज्ञ ध्रव भगत और बिहार के पूर्व मंत्र्ाी विद्य्नासागर निषाद तथा एक आईएएस अधिकारी और पांच आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।चारा घोटाला के आरसी 20ए/96 में मामले का घटनाक्रम इस तरह रही-

20 फरवरी 1996- चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने 1994-95 में पशुपालन विभाग से 34.64करोड़ रुपए फर्जी निकासी का केस दर्ज किया गया। सीबीआई जांच में यह बात सामने आई कि घोटाले की राशि 37.70 करोड़ है।

19 मार्च 1996- मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को सीबीआई जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया गया था।

23 जून 1997 – सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव समेत चाईबासा कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 56 लो गों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की।

31 जुलाई 1997- लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की विशेष कोर्ट में सरेंडर कर दिया। तीन माह तक जेल में रहकर जमानत पर बाहर आए।

5 अप्रैल 2000- पटना सीबीआई के विशेष जज ने सुनवाई के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया।

14 फरवरी 2012- लालू प्रसाद यादव ने अपना बयान दर्ज कराया।

21 जून 2013- चाईबासा मामले में सुनवाई के दिन लालू के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वे टाडा कोर्ट गया में उपस्थित होंगे। इसलिए 24 जून तक केस की सुनवाई रोक दी जाए।

24 जून 2013- लालू प्रसाद यादव के वकील ने कोर्ट में कहा कि सीबीआई के विशेष जज प्रवास कुमार सिंह बिहार के पूर्व महाधिवक्ता पीके शाही के रिश्तेदार हैं। इसके चलते केस में पक्षपात की आशंका है।

13 अगस्त 2013- सुप्रीम कोर्ट ने लालू की जज बदलने की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सीबीआई के जज नहीं बदले जाएंगे।

17 सितंबर 2013- सीबीआई कोर्ट के जज प्रवास सिंह ने केस में फैसले की तारीख 30 सितंबर तय की।

फैसला सुनने के बावजूद शांत आये लालू

रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराये जाने के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को आज जेल ले जाया गया। लालू (65) को यहां की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया। अदालत से बाहर आते हुए लालू शांत नजर आ रहे थे. उन्होंने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और अपनी कार से रांची के बाहरी इलाके में तथा राष्ट्रीय खेलगांव के नजदीक स्थित जेल चले गये।

सफेद एंबेसडर कार से पहुंचे थे लालू
समर्थकों का हाथ हिलाकर किया अभिवादन,शांति बनाये रखने की अपील की

सीबीआई की विशेष अदालत में चारा घोटाले में अदालत का फैसला सुनने आए लालू प्रसाद यादव ने अपने समर्थकों से शांति बनाये रखने की अपील की।
जेड प्लस सुरक्षा में सफेद एंबेसडर कार से होटल से अदालत परिसर पहुंचे लालू प्रसाद सहज नजर आए और पार्टी समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। जब न्यायाधीश ने उनके खिलाफ फैसला पढ़ना शुरु किया तो लालू अदालत कक्ष में दूसरी पंक्ति में बैठे थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्र्ाी एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद को दोषी ठहराए जाने के साथ ही उनके सामने सांसद के रुप में अयोग्य होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही इस बात का भी खतरा पैदा हो गया है कि वह कम से कम छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पायेंगे. अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद लालू प्रसाद को बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया। उच्चतम न्यायालय के हाल में आए फैसले के मद्देनजर राजद प्रमुख के सामने लोकसभा सदस्य के रुप में अयोग्य ठहराए जाने का तत्काल खतरा पैदा हो गया है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अगर किसी सांसद या विधायक को किसी अदालत द्वारा दो साल या इससे अधिक की सजा वाले किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है तो वह तत्काल अयोग्य माना जायेगा। उच्चतम न्यायालय के हाल में आए फैसले के मद्देनजर राजद प्रमुख के सामने लोकसभा सदस्य के रुप में अयोग्य ठहराए जाने का तत्काल खतरा पैदा हो गया है. शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अगर किसी सांसद या विधायक को किसी अदालत द्वारा दो साल या इससे अधिक की सजा वाले किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है तो वह तत्काल अयोग्य माना जायेगा।

लालू का रंग उड़ा, जगन्नाथ मिश्र पढ़ने लगे हनुमान चालीसा

चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा फैसले से ठीक पहले लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थीं। जगन्नाथ मिश्र तो इतने घबराए हुए थे कि वह कोर्ट रुम में हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को सुनने के लिए लालू ठीक साढ़े 10 बजे अपने चिरपरिचित पहनावे सफेद कुर्ते-पायजामे में पहुंचे। अपने राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम इस फैसले को लेकर उनके चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा था। भारी सुरक्षा के बीच वह कोर्ट में दाखिल हुए। कोर्ट रुम में वह पहली लाइन में जाकर बैठ गए। उनके समर्थन में साधु यादव व परिवार,पार्टी के अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। जगन्नाथ मिश्र भी कोर्ट पहुंचे थे, वह ज्यादा तनाव में दिख रहे थे। मिश्र अपने साथ हनुमान चालीसा लेकर आए थे। अपनी घबराहट कम करने के लिए वह कोर्ट रुम में हनुमान चालीसा पढ़ने लगे। कोर्ट रुम में 45 आरोपियों में से 43 मौजूद थे। इसके बाद जज प्रवास कुमार सिंह ने 475 पन्नों में लिखा फैसला पढ़ना शुरु किया और सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।फैसला सुनते ही लालू और जगन्नाथ मिश्र के चेहरे का रंग उड़ गया। आसपास बैठे उनके समर्थकों में भी मायूसी छा गई। कोर्ट के फैसले के बाद लालू और जगन्नाथ मिश्र समेत 38 दोषियों को कस्टडी में ले लिया गया।

धरे रह गये पटाखे,समर्थक हुए मायूस

सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा चारा घोटाले मामले में आज लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिये जाने के फैसले की सूचना बाहर आते ही उनके समर्थकों में मायूसी छा गयी। बताया गया है कि लालू प्रसाद के समर्थकों को उम्मीद थी कि उनके नेता अदालत से बरी होंगे और बरी होने पर समर्थकों ने अदालत परिसर से बाहर जमकर खुशियां मनाने की योजना मनायी थी। इसलिए लालू प्रसाद के समर्थक अपने वाहनों में पटाखों के साथ लेकर पहुंचे थेे, लेकिन कोर्ट का फैसला आते ही ये पटाखे रखे रह गए।

राजद के बिहार, झारखंड, यूपी के कई दिग्गज नेता जुटे

चारा घोटाले मामले में आज राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ फैसले आने की सूचना मिलने पर बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश के कई नेता रांची पहुंचे थे।
अदालत परिसर में आज जहां सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह और प्रभुनाथ सिंह मीडिया में छाये रहे, वहीं झारखंड सरकार के मंत्र्ाी सुरेश पासवान भी अदालत परिसर पहुंचे थे, जबकि पार्टी विधायक संजय प्रसाद यादव समेत बिहार से आये कई विधायक व सांसद अदालत परिसर में घूमते नजर आये। पार्टी के बिहार विधानसभा में पार्टी विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व केंद्रीय मंत्र्ाी मो अली अशरफ फातमी, जयप्रकाश यादव, रामकृपाल यादव, विधायक सम्राट चौधरी, डॉ फयाज अहमद, मो शाहीन, सुरेंद्र यादव, पूर्व मंत्र्ाी सुरेश पासवान, रामचंद्र राय, राम लखन राम, उत्तर प्रदेश राजद के अध्यक्ष अशोक सिंह, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के नेता मो गुलाम गौस और राजद के प्रदेश प्रवक्ता मनोज कुमार, वरिष्ठ राजद नेता कृष्णा यादव, विजय यादव, अशोक कुमार सिंह समेत अन्य नेता भी अदालत परिसर में उपस्थित थे।

तेजस्वी कोर्ट के बाहर घंटों रहे खड़े

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पुत्र् तेजस्वी यादव आज घंटों अदालत परिसर के बाहर खड़े रहे। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी। लालू प्रसाद आज ठीक 10.25मिनट में अदालत परिसर पहुंचे और 10.30बजे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत में प्रवेश कर गये।लेकिन उनके साथ ही अदालत परिसर पहुंचे तेजस्वी यादव अदालत कक्ष के बाहर ही खड़े रह गये। हालांकि बाद में पहुंचे राजद सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह और प्रभूनाथ सिंह अदालत कक्ष में चले गये।

जेल में जगन्नाथ मिश्र की तबीयत बिगड़ी,रिम्स में भर्त्ती

चारा घोटाले मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा बिहार के पूर्व ख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को दोषी करार दिया गया। अदालत का फैसला आते ही उन्हें राजद प्रमुख लालू प्रसाद समेत अन्य आरोपियों के साथ बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा ले जाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री रहने के कारण उन्हें वीआईपी सेल में रखा गया,लेकिन जेल में पहुंचते ही जगन्नाथ मिश्र को सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिसके बाद तत्काल आनन-फानन में रिम्स के कॉटेज में ही उनका मेडिकल चेकअप शुरु हुआ, लेकिन बाद में उनकी जेल चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान, रिम्स रांची में भर्त्ती कराया गया है।
जगन्नाथ मिश्र के परिजनों ने बताया कि पिछले दिनों गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में बाईपास सर्जरी कराया गया है और उनका चिकित्सकों की देखरेख में इलाज चल रहा है। इस आशय की सूचना आज जगन्नाथ मिश्र के अधिवक्ता की ओर से सीबीआई के विशेष अदालत को भी दी गयी थी,जिसके बाद अदालत ने जेल प्रशासन को जगन्नाथ मिश्र के लिए समुचित इलाज का प्रबंध करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा का अभूतपूर्व इंतजाम, पूरा इलाका छावनी में तब्दील

चारा घोटाले के बहुप्रतीक्षित मामले में आज फैसले की तिथि निर्धारित होने के कारण अदालत परिसर में सुरक्षा का अभूतपूर्व इंतजाम किया गया था। कचहरी स्थित सीबीआई के विशेष अदालत परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया था, यहां तक उस ओर जाने वाले सड़कों में बैरेकेटिंग की भी व्यवस्था की गयी थी।
नगर पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चौथे और अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार खुद सुरक्षा की जिम्मेवारी संभाले हुए थे। अदालत परिसर में बड़ी संख्या में अर्द्धसैन्य बलों के अलावा जैप और लाठीधारी जवानों की तैनाती की गयी। कचहरी के निकट ही सीबीआई के रांची स्थित कार्यालय के बाहर भी अर्द्धसैन्य बलों की तैनाती की गयी थी। करीब पांच सौ से अधिक संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ बड़ी संख्या में सादे लिबास में भी जवानों की तैनाती की गयी थी। सिटी डीएसपी पीएन सिंह समेत कई थानेदार मोर्चा संभाले हुए थे, स्थिति को पूरी तरह से नियंत्र्ाण में रखने के लिए कई दंडाधिकारियों की भी तैनाती की गयी थी।
सीबीआई कोर्ट जाने वाले रास्ते को सील कर दिया गया था। अदालत परिसर में राजद के आम कार्यकर्त्ताओं को जाने से रोका जा रहा था, लेकिन राजद के बड़े नेता आराम से अदालत परिसर में प्रवेश कर जा रहे थे। मीडियाकर्मियों को भी प्रवेश पत्र देखकर अंदर जाने की अनुमति दी जा रही थी, वहीं अधिवक्ताओं व कोर्ट के कर्मचारियों तथा अधिकरियों को भी बे-रोकटोक अंदर जाने की अनुमति थी। हालांकि इस दौरान रास्ते से गुजरने वाले आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जब-जब लालू जेल गये,राजद मजबूत हुआःप्रभूनाथ सिंह

राजद सांसद प्रभूनाथ सिंह ने कहा है कि जब-जब लालू प्रसाद जेल गये, पार्टी मजबूत हुई है,संगठन का ताकत बढ़ा है। अदालत परिसर पहुंचने पर प्रभूनाथ सिंह ने कहा कि यदि आज भी लालू प्रसाद को जबरन जेल भेजने की कोशिश की गयी, तो पार्टी की ताकत में 100 गुणा वृद्धि होगी, लेकिन उन्होंने रिहाई की उम्मीद जतायी थी
बाद में अदालत का फैसला आ जाने और लालू प्रसाद को दोषी करार दिये जाने के बाद प्रभूनाथ सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व में ही राजद प्रमुख की ओर से ऊपरी अदालत में याचिका दायर कर कहा गया था कि इस अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख जेल में रहे या बाहर संगठन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

राजद नेताओं-कार्यकर्त्ताओं के झलके आंसू

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश द्वारा चारा घोटाले मामले में आज राजद प्रमुख लालू प्रसाद को दोषी करार दिये जाने के बाद पार्टी के कई नेताओं-कार्यकर्त्ताओं के आंसू झलक पड़े।
राजद के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने नम आंखों से कहा कि आशा के विपरीत फैसला है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरी पार्टी राजद प्रमुख लालू प्रसाद के साथ है, यदि जरुरत पड़ी तो खून का एक-एक कतरा वे लालू प्रसाद के लिए देने को तैयार है। वहीं राजद के कई कार्यकर्त्ता रामकृपाल यादव को चुप कराने की कोशिश करते भी नजर आये।

अदालत के प्रति विश्वास की भावना बढ़ीःभाजपा

भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और प्रांत संयोजक चंद्रप्रकाश ने चारा घोटाले के एक मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद व पूर्व मुख्यमंत्र्ाी जगन्नाथ मिश्र समेत अन्य आरोपियों को सजा सुनाये जाने के फैसले से लोगों में न्यायपालिका के प्रति विश्वास की भावना बढ़ी है। इससे यह साबित हो गया है कि न्यायालय में किसी भी वर्ग के प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, न्यायिक ॰ष्टिकोण से प्राप्त साक्ष्यों के माध्यम से ही न्याय प्राप्त होता है।

न्यायिक प्रक्रिया पर सभी को विश्वासःकांग्रेस

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी डॉ.शैलेश सिन्हा ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया पर सभी को विश्वास रखने चाहिए। सीबीआई अदालत द्वारा आज चारा घोटाले मामले में राजद प्रमुख समेत अन्य के खिलाफ दिये गये फैसले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि अदालत के फैसले पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का रास्ता खुला है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस फैसले से राज्य सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

समाज के लिए अच्छा हैःकेडी सिंह

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता के.डी.सिंह ने आज चारा घोटाले पर सीबीआई अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह का फैसला समाज के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि आज समाज में नेताओं को लेकर भ्रष्ट मानते है, लेकिन इस तरह के फैसले से लोगों का विश्वास अदालत के प्रति बढ़ा है और इस तरह के फैसले से लोकतंत्र्ा को भी मजबूती मिलेगी।

दीपंकर भट्टाचार्य ने फैसले पर संतोष व्यक्त किया

भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने चारा घोटाले मामले में फैसला आने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह काफी पुराने घोटाले का मामला था । उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र्ा की मजबूती के लिए अच्छी शुरुआत है।

पार्टी के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगाःरघुवंश

राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि चारा घोटाले के पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद के जेल जाने से संगठन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के सेहत पर असर जनता के समर्थन से पड़ता है और अब भी जनता का समर्थन राजद को प्राप्त है। केंद्र सरकार द्वारा दागियों को बचाने के लिए लाये जा रहे अध्यादेश पर राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी करते हुए रघुवंश प्रसाद ने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी का निजी मामला है, इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

हेमंत सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगाःसंजीव कुमार

झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजीव कुमार प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत ने अभी सजा की बिन्दु पर सुनवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजद के वरिष्ठ नेताओं ने भी कहा है कि लालू प्रसाद का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा।

अदालत के फैसले का हर नागरिक को सम्मान करना चाहिएःबाबूलाल

झारखंड विकास मोर्चा सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुएक हा है कि देश के हर नागरिक को अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पर विश्वास रख कर लोग न्यायिक प्रक्रिया के तहत ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते है और इसी प्रक्रिया से न्याय की उम्मीद की जानी चाहिए।

न्यायपालिक व लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ाःनिशिकांत

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने कहा है कि अदालत के फैसले से न्यायपालिका और लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ा है। निशिकांत दूबे ने कहा कि इस फैसले यह साबित हो गया है कि समाज में चोरी करने वाले या चोरों अथवा भ्रष्टाचारियों की मदद करने वालों को सजा जरुर मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से लोगों का विश्वास अदालत के प्रति बढ़ा है।

कोई कितना बड़ा हो,सजा भुगतनी ही होगीःसीपी सिंह

झारखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सीपी सिंह ने सीबीआई कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि कोई कितना भी बड़ा क्यों नहीं हो, गलती करने पर आज न कल सजा भुगतनी ही होगी। उन्होंने कहा कि एक अदालत तो यहीं है, जबकि सभी ईश्वर पर विश्वास रखता है, लोगों को गलत का फल ऊपर जाकर भी भुगतना पड़ता है।

राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंटःसरयू राय

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सरयू राय ने कहा है कि यह फैसला राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आनन-फानन में दागियों को बचाने के लिए अध्यादेश लाने की कोशिश की गयी, उससे पूर्व पहला शिकार राजद प्रमुख लालू प्रसाद हो रहे है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश भर में एक अच्छा संदेश जाएगा।

जेल में पहली रात बेचैन रहे लालू


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चारा घोटाले मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को आज सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद उन्हें बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा ले जाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद रहने के कारण उन्हें केंद्रीय कारा में वीवीआईपी सेल में रखा गया,जहां टीवी व समाचार पत्र उपलब्ध कराये जाते है,लेकिन इसके बावजूद आज पहली रात में वे काफी बेचैन दिखे। बताया गया है कि रात में लालू को रोटी दूध व कैरले का भुजियां खाने को दिया गया। लालू के जेल जाने की सूचना मिलने पर उनके साले साधु यादव भी मिलने पहुंचे,जबकि होटवार जेल के बाहर बड़ी संख्या में राजद नेता-कार्यकर्त्ता और लालू प्रसाद के समर्थकों की भीड़ देखी गयी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद को उसी सेल में रखा गया है,जहां पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को रखा गया था। बताया गया है कि लालू को वह सारी सुविधाएं दी जाएगी,जो अपर डिविजन कैदी को मिलनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक जेल के सेल में पहुंचते ही लालू ने सबसे पहले पीने के लिए पानी मांगा,उसके बाद वहां रखे टीवी पर समाचार देखा।उनके नाश्ते और खाने का आइटम भी चर्चा का विषय रहा।
जेल अधिकारियों की ओर से सिर्फ इतना ही बताया गया है कि जेल मैनुअल के अनुसार उच्च वर्ग के बंदी को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वे सारी सुविधाएं उन्हें दी जाएगी।लालू प्रसाद को भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में छठी बार जेल में आना पड़ा है।

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