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कोई मोह नहीं, पर हर दायित्व को संभालने को तैयारःरामजीलाल

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कई अधुरे कार्य को पूरा करने की इच्छा, छोटी-छोटी पुल-पुलिया बनाकर ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना संभव

हटिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ रहे रामजीलाल शारडा अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त नजर आते है। अलग राज्य गठन के बाद मंत्री रह चुके शारडा का कहना है कि अब उनके लिए किसी पद का कोई मोह नहीं रह गया है, वे सिर्फ एम.एल.ए. बनकर जनता की सेवा करना चाहते है। लेकिन यदि पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेवारी सौंपती है, तो वे हर दायित्व को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उनका यह भी कहना है कि वे लगातार 15वर्षां तक हटिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे, इस दौरान क्षेत्र के विकास के लिए कई काम किये, लेकिन कई काम अधुरे रह गये है, उसे पूरा करना है। उनका कहना है कि राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में बहने वाली कई नदियों और नालों पर छोटी-छोटी पुल-पुलिया बनाकर ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है। पेश है उनसे बातचीत का प्रमुख अंश
सवालः पुराने अनुभव और व्यक्तिगत संपर्कां का लाभ उपचुनाव में कितना मिल रहा है?
शारडाः हटिया विधानसभा क्षेत्र्ा में 60वर्षाें से अधिक समय से रहने वाले अधिकांश लोगों से व्यक्तिगत परिचय है। बाद में जो नये मतदाता आए, वे इसलिए मुझे जानते है कि उनके अभिभावक उनसे पूर्वपरिचित है। इसके अलावा 15वर्षाें तक इस क्षेत्र्ा का प्रतिनिधित्व करने के कारण हर गली-मुहल्ले में कोई न कोई परिचित मिल जाता है। ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र सभी लोगों से पुराना परिचय रहा है, उनके हर दुःख-सुख में सहभागी बनने का प्रयास किया हूं, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाया या जिस तरह की मदद की आवश्यकता पड़ी, उनका दरवाजा हर लोगों के लिए दिन-रात खुला रहा। हालांकि अपवाद में कुछ लोग यह कहकर भी आलोचना करते है कि मंत्री रहते, उनके परिचन को नौकरी नहीं लगाया, लेकिन सरकार में रहने के बावजूद एक सीमा होती है, कोई भी उस सीमा से बाहर नहीं जा सकता है। 15वर्षां तक लगातार क्षेत्र्ा का विधायक रहने के बाद पिछले छह-सात वर्षाें का गैप हुआ, इसके बावजूद लोगों से संपर्क नहीं टूटा, लगातार लोगों से जुड़ाव बना रहा।
सवालः 15वर्षाें तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया,महत्वपूर्ण यादगार काम,जिसके बल पर मतदाताओं से दुबारा वोट मांग सके?
शारडाः 15-20वर्ष पहले विधायक कोटे की राशि काफी कम थी, इसके बावजूद हर गली-मुहल्ले के पक्कीकरण और अन्य कार्याें को बखूबी ढंग से करने का प्रयास किया गया। हर क्षेत्र में काम किये, लोग आज चुनाव प्रचार के दौरान मिलते है, तो उनके द्वारा किये गये कार्याें के बारे में खुद ही बताते है। उनके ही प्रयास से शहर में दो-दो विऊनुत शवदाह गृह बनाया गया, लेकिन उनके चुनाव हार जाने के बाद आज तक उसे शुरु नहीं किया जा सका है। लोगों की समस्याओं के लिए हर पल घर का दरवाजा खुला रहता है।
सवालः कुछ वर्षाें से आप जनप्रतिनिधि नहीं है, कई काम अधुरे रह गए होंगे, जिसे पूरा करने की चाहत होः ?
शारडाः राजधानी की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम, समुचित पेयजल और निर्बाद्ध बिजली आपूर्ति है। पाइप लाइन जलापूर्ति योजना के माध्यम से हर गली-मुहल्ले के घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सबसे प्रमुख समस्या ट्रैफिक जाम है। शहर और आसपास में बहने वाली नदियों में यदि छोटे-छोटे पुल-पुलिया बना दिये जाएं, तो बड़ी हद तक जाम की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। प्रत्येक आधा या एक-डेढ़ किमी की दूर पर पुल-पुलिया बना देने से जहां लोगों को सहुलियत होगी, वहीं प्रमुख सड़कों पर वाहनों का भार भी कम हो जाए।उदाहरण के तौर पर यदि पुनदाग-ढेलाटोती से रातू रोड आने के लिए एक-दो पुल बना दिया जाए, तो लोगों को ज्यादा घूम कर नहीं आना पड़ेगा। इसी तरह से आईटीआई से पुनदाग आने वाले रास्ते या फिर नेपाल हाउस से एयरपोर्ट जाने और नेपाल हाउस से चुटिया जाने के लिए नदी-नाले पर पुल-पुलिया बना दिये जाए, तो लोगों को ज्यादा घूमना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा हरमू हाउसिंग कॉलोनी से पीपी कंपाउंड और विऊनानगर से हरमू व रातू रोड जोड़ने वाले रास्ते में पुल-पुलिया बन जाए, तो समस्याओं का समाधान हो सकता है। हाईकोर्ट से आगे चुरचू चौक व एयरपोर्ट के लिए सड़क चौड़ीकरण मास्टर प्लान के अनुरुप 60 से 80 किमी हो जाएं, तो समस्या का समाधान संभव है। जबकि शहर में 40 फीट से कोई भी कम का रास्ता नहीं होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से 18-20 फीट की सड़क में अपार्टमेंट बना दिया गया है, इससे लोगों की परेशानी बढ़ी है। स्लम एरिया में रहने वाले गरीबों के लिए बहुमंजिला अपार्टमेंट बना देने से और चार-पांच सार्वजनिक शौचालय एवं स्नानघर बना देने से अतिक्रमण की समस्या का भी निदान हो जाएगा। शहरी क्षेत्र में अधिकांश नलियां जर्जर हो चुकी है, 40 से 50वर्ष पुरानी है और हाल के वर्षाें में जो नालियां बनी व दो-ढ़ाई फीट गहरी है, बनने के बाद उसकी अब तक सफाई तक नहीं हुई है। इसे भी दुरुस्त किये जाने की जरुरत है। थाने में नियमानुसार तीन महीने, छह महीने या एक वर्ष के अंदर जब्त सामानों की नीलामी कर देनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, आज शहर के अधिकांश थाने कबाड़खाने में तब्दी हो गये है, पांच-दस वर्षाें से जब्त वाहन थाने में पड़े-पड़े सड़ रहे है, यह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान है।
सवालः पार्टी में टिकट के कई दावेदार थे, सभी का समर्थन मिल रहा है या पार्टी के अंदर किसी प्रकार की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है?
शारडाः किसी भी दल में टिकट के लिए कई दावेदार रहते है, भाजपा में भी हटिया क्षेत्र्ा के लिए कई दावेदार थे, लेकिन टिकट मिलने के बाद पूरी पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है। कुछेक लोगों में नाराजगी थी, जिसे दूर कर लिया गया है। भाजपा एक अनुशासित पार्टी है, पार्टी के नेता-कार्यकर्त्ता व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि दल को चुनाव जीताते है, इसी भावना के तहत काम हो रहा है।
सवालः वर्ष 2005 में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा, बाद में फिर से पार्टी में वापसी हुई, पार्टी छोड़ना कितना सही था ?
शारडाः तीन बार 15वर्षाें तक लगातार विधायक रहा, लेकिन टिकट काट देने पर समर्थकों के दबाव में चुनाव लड़ना पड़ा, बाद में मैंने खुद यह महसूस किया कि यह गलत फैसला था, पार्टी ने भी गलती स्वीकार की, पुनः टिकट दिया गया, लेकिन 25 वोट से हार गये। यह सब कुछ पारिवारिक मामला था, जिसे घर में ही आपस में मिल-बैठकर सुलझा लिया। कभी भी मैंने भाजपा या जनसंघ के खिलाफ टिप्पणी नहीं की, बचपन से आज तक पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्त्ता बना हूं।
सवालःराज्य में भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार है,इसका किस तरह से फायदा मिल रहा है?
शारडाः राज्य की अर्जुन मुंडा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार जनकल्याण और लोगों के विकास के प्रति कृतसंकल्पित है। पिछले कुछ वर्षाें में राजधानी समेत पूरे राज्य के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए है, इसका फायदा निश्चित रुप से भाजपा उम्मीदवार होने के कारण उन्हें मिल रहा है। राज्य सरकार ने गरीबों, आदिवासियों व अन्य पिछड़े वर्गाें के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये, जिसका फायदा चुनाव में मिलने की उम्मीद है। हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि राज्य में अब तक किसी एक पार्टी की सरकार नहीं बन पायी, अनेक दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चलने वाली सरकार से ज्यादा अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
सवालः महंगाई और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा है, लोगों में इसे लेकर कितनी नाराजगी है और इसका असर उपचुनाव में किस प्रकार पड़ेगाहै?
शारडाः महंगाई और भ्रष्टाचार का मसला एक राष्ट्रीय मुद्दा है और उपचुनाव में भी इसका असर पड़ेगा। लोग यह कहते भी है कि कांग्रेस आई जब-जब सरकार में आई, महंगाई आई। केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की गलत नीतियों के कारण आज देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है। पूंजीपतियों के पास और पैसा आता जा रहा है, वहीं गरीबों की स्थिति और दयनीय होती जा रही है। इस महंगाई के युग में सबसे ज्यादा प्रभाव मध्यम वर्ग पर पड़ा है, आम लोग त्र्ास्त है।
सवालः अलग झारखंड राज्य गठन के बाद आपको मंत्र्ाी बनने का भी अवसर मिला, जीत के बाद क्या उम्मीद करते है, नई जिम्मेवारी संभालने को तैयार हैै?
शारडाः 15वर्षाें तक विधायक रहा, पद को लेकर कोई मोह नहीं है, पार्टी की ओर से जो भी दायित्व सौंपा जाएगा, उसे निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। एक एम.एल.ए. के रुप में जनता की सेवा करना चाहता हूं, इससे ज्यादा कोई इच्छा नहीं है।
सवालः विरोधियों द्वारा यह आरोप लगाया जाता है कि चुनाव हारने के बाद राजनीतिक रुप से आप शिथिल हो गए ?
शारडाः राजनीतिक शिथिलता का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। पिछली बार 25 वोट से चुनाव हारने के बाद कोर्ट में केस लड़ रहा था। इस बीच पार्टी की ओर से सीधे तौर पर कोई अन्य जवाबदेही नहीं सौंपी गयी थी। दुर्याग से इस बीच बीमारी भी हो गयी, पिछले छह-सात वर्षाें से बीमारी से लड़ने के बाद अब थोड़ा स्वस्थ हुआ हूं, इसके बावजूद जिला कमेटी की हर बैठक और कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहा हूं। कोई भी ऐसी बैठक या कार्यक्रम नहीं होगा, जिसमें बुलाया गया और नहीं जा सके।
सवालः यह भी कहा जाता है कि आपकी उम्र अधिक हो गयी है, अब पहले जैसी आपकी सक्रियता नहीं रही?
शारडाः इस तरह की बात वैसे लोग करते है, जो मानसिक रुप से बुढ़े हो गये है। जब 80 वर्ष का व्यक्ति प्रधानमंत्री बन सकता है, 86वर्ष के लालकृष्ण आडवाणी चुनाव लड़ सकते है, तो फिर मुझमें क्या कमी है। 45 से 50वर्ष के विरोधी भी यह आरोप लगाते है कि मेरी आयु अधिक हो गयी, जबकि आयु को दो रुप में समझा जा सकता है, पहला शारीरिक आयु और दूसरा मानसिक आयु। शारीरिक रुप से अब भी वे पूरी तरह से स्वस्थ है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ चल रहे नौ नौजवानों को लू लग गयी और उनका सुरक्षा प्रहरी समेत कई समर्थक बीमार होकर घर में बैठ गये, लेकिन अब भी दिन भर वे चुनाव प्रचार में जुटे है, सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक कड़ी धूप और लू में भी वे पैदल और जनसंपर्क अभियान चलाकर चुनाव प्रचार अभियान चला रहा है। यह घमंड की बात नहीं है, आज भी मेरी तरह से कोई दूसरा व्यक्ति चुनाव प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका नहीं निभा सकता है। जबकि मानसिक रुप से भी नौजवानों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत है।
सवालः सरकार में शामिल सहयोगी दल जदयू और ऑजसू प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में है, इसका कितना असर पड़ेगा?
शारडाः राज्य में सरकार चलाने के लिए गठबंधन किया गया, चुनाव पूर्व कोई समझौता नहीं है, लोकतंत्र में हर दल चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है। हटिया विधानसभा क्षेत्र में सरकार में शामिल सहयोगी दलों के चुनाव लड़ने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, पार्टी का परपंरागत वोट है और लोगों से उनका व्यक्तिगत संबंध है, जिसका फायदा मिलेगा। कुछ क्षेत्रीय दल चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि वोट काटने के लिए मैदान में रहते है। चुनाव जीतने से पार्टी और सरकार की गरिमा बढ़ेगी, लेकिन एक सीट से सरकार के सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। साथ ही गठबंधन सरकार पर भी इस चुनाव परिणाम का कोई असर नहीं पड़ेगा।
सवालः बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो द्वारा भी आपके कार्यकाल की आलोचना की जा रही है?
शारडाः बाबूलाल मरांडी खुद यह कहते है कि उनके मुख्यमंत्र्ाित्वकाल में राजधानी रांची समेत तेजी से विकास हुआ, अब उनकी ओर से ही यह कहा जा रहा है कि उनके कार्यकाल में विकास नहीं हुआ, तो सही क्या है, इसका खुलासा उन्हें ही करना चाहिए।

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