संपादक के कलम से....
देश में पत्रकारिता जिस रूप में आज दिखती है, इसका अतीत ऐसा नहीं रहा है। पत्रकारिता तब देशभक्ति और समाजसेवा का पर्याय थी, आज की तरह प्रोफेशन नहीं थी, आजीविका का माध्यम भी नहीं थी।
सन् अस्सी के दशक के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उदय और और 21वीं सदी के प्रारंभ में सोशल मीडिया के आगमन ने पत्रकारिता के पूरे स्वरूप को बदल दिया है। सोशल और डिजिटल मीडिया के आगमन के बाद सूचना के क्षेत्र में नयी क्रांति आयी है। खबरों की बाढ़ आ गयी है, इसमें कई सूचनाएं भ्रमित, समाज को गुमराह करने और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भी होती है। कई खबरों के प्रकाशन और प्रसारण में निजी स्वार्थ भी छिपे रहते हैं, इस तरह की पत्रकारिता व्यक्ति, समाज और राज्य के लिए कभी हितकर नहीं हो सकती। इस वेब-पोर्टल के माध्यम से देश और विशेषकर झारखंड के सकारात्मक पहलु को सामने लाना है। सरस्वती की तरह लुप्त होती जा रही उस धारा के रूपांतरित होते जाने वाले घटनाक्रम को बिना किसी टिप्पणी के संजोना और उसे प्रकाश में लाना इसलिए भी जरूरी है, ताकि यह पता चले कि उस धारा की पावनता कम कैसे कम हुई। पत्रकारिता की यह गंगा-यात्रा गंगोत्री से हुगली तक खत्म होने वाली नहीं है, आगे भी जारी रहेगी, पर यह संपूर्ण यात्रा वृंतांत बिना किसी छेड़छाड़ लोगों तक पहुंच सके, इसकी कोशिश होगी। वेब-पोर्टल के माध्यम से झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक तथ्य और महापुरुषों की जीवनी तथा कार्यां के इतिहास को भी संजोना है, ताकि जिन व्यक्तियों ने अपने खून-पीसने से समाज बनाया और आज जो लोग उसे जैसा बना रहे है, वह काल के गाल में समाने से बच जाए, हमारा यह प्रयास बस इतना भर है। उसकी सूरत जैसी भी है, वह आपकी है और हमारी भी। जो आइए, देखे उसे, पहचाने उसे। उसमें कहीं हमारी आपकी सूरत भी कहीं दिखती है या नहीं।त भी कंही दिखती है या नहीं |
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