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मध्यम आय वर्ग के लिए आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाने की घोषणा संभव
पूर्ण बजट 2019-20 की संभावनाएं व चुनौतियां
रांची,27जून। भारी जनसमर्थन के साथ दोबारा जीतकर सत्ता में आयी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की वित्त मंत्री निर्मला-सीतारमण 5 जुलाई को लोकसभा में पूर्ण बजट पेश करेंगी।बजट, सरकार के सालाना आय और खर्च के ब्यौरे के अलावा एक ऐसा दृष्टि पत्र है जिसमें नीतिगत रास्तो का खुलासा किया जाता है जिन पर चलकर विकास के घोषित लक्ष्यों का पानेकी सरकार को समग्र सोच समाहित रहती है।
खपत में कमी और निवेश में कमजोरी के कारण देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार गत वित्त वर्ष में पिछले पांच वर्षों के रिकार्ड न्यूनतम पर रही थी। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथग्रहण के ठीक एक दिन बाद 31 मई के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जी0डी0पी0 ग्रोथ के जनवरी-मार्च तिमाही 2019 के लिए 5.8 प्रतिशत की धीमी वृद्धिदर वाला आंकड़ा जारी किया जो लगातार तीन तिमाही से गिरावट पर थी। नेशनल सेम्पल सर्वे का बेरोजगारी डेटा भी जारी हुआ जो 2017-18 के लिए मौजूदा श्रम बल में 6.1 प्रतिशत की बेरोजगारी दर बता रहा था और यह पिछले 45 वर्षों में सर्वाधिक बेरोजगारी का आंकड़ा था। विकास दर में गिरावट और बेरोजगारी में वृद्धि की खबर अर्थव्यवस्था मे आयी मंदी को बयां कर रही है।
सड़क और आवास पर अधिक खर्च करने के चुनावी वादे को पूरा करने के साथ-साथ जनाकाक्षाआें पर खरा उतरने का जहां एक ओर सरकार पर दबाव है वहीं पिछले वित्त वर्ष में राजस्व संग्रहण में एक लाख अड़सठ हजार करोड़ रूपय की गिरावट भी सरकार की िंचंता बढ़ा रही है। क्योंकि धीमी होती अर्थव्यवस्था में कर से प्राप्त होने वाली आय में गिरावट की आशंका बनी रहती है।
पिछले पन्द्रह वर्षों से हमारी अर्थव्यवस्था खपत आधारित रही है। यात्रीवाहन, दोपहियावान टै्रक्टर की बिक्री में रिकार्ड गिरावट दर्ज की गयी है जो शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में खपत में कमी की ओर इशारा करती है और लोगों के पास खर्च करने योग्य आय में घटोत्तरी को स्वीकार करती है। अर्थव्यवस्था में ग्रोथ की सुस्ती को दूर करने के लिए खपत बढ़ाने की कयायद सरकार करेगी। ऐस में उपभोक्ता के पास खर्च करने लायक अतिरिक्त आय का सृजन सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। इससे लिए मध्यम आय वर्ग के लिए आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाने की घोषणा बजट में किये जाने की ज्यादा संभावना है। इनकम टैक्स की धारा 80 सी0सी0 के तहत छूट के लिए बचत निवेश की सीमाएँ बढ़ायी जा सकती है। कारपोरेट टैक्स में भी कमी की घोषणा हो सकती है। यानि रियायतें और प्रोत्साहन सरकार के हाथ में वे बजटीय टूल्स हैं जिनके सहारे सुस्त अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है।
कृषि क्षेत्र में भी विकास दर धीमी रही है। सरकार ने किसानों की उपज का समर्थन मूल्य तो बढ़ाया परन्तु ढांचागत व्यवस्था में कमी के कारण किसानों के उपज की एक निश्चित मात्रा की खरीदी सुनिश्चित नहीं की जा सकी जिसमें एम0एस0पी0 में वृद्धि का फायदा किसानों को नही मिल पाया। खाद्य प्रसंसकरण उद्योगों को प्रोत्साहन बाजार की ढांचागत व्यवस्था में सुधार और ग्रामीण स्टार्टअप को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय में वृद्धि की जा सकती है। राजकोषीय घाटे का नम्बर किसी भी बजट का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा होता है जिस पर अर्थजगत की नजरेंं टिकी होती है। तय लक्ष्यों से फिसलन बजट की विश्वसनीयता को खतरे में डालता है और निवेश की संभावनाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
अंतरिम बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का जो लक्ष्य तय किया गया है वह जी0डी0पी0 की तुलना में 3.4 प्रतिशत तक सीमित रखना है। वित्तीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन कानून के तहत राजकोषीय घाटे की सीमा तथा कर्ज और डी0जी0पी0 के रेशियों के मानक तय किये गये हैं जो हमें कर्ज की तय सीमा के अन्दर रहने के लिए अनुशासित करते हैं।
सरकार के सामने विकास कार्यों पर खर्च करने की चुनौती है ताकि विकास को रफ्तार मिल सके। खपत बढ़ाने के लिए उपभोक्ता को रियायतें देनी की चुनौती है ताकि उपभोग के लिए अतिरिक्त आय सुनिश्चित हो पाये। और मांग बढ़ सके तो अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ लें। सरकार के सामने चुनौती है धीमी होती अर्थव्यवस्था में कमजोर कर संग्रहण की आशंका से निपटने की। सरकार को राजस्व आय बढ़ाना है ताकि खर्च बढ़ाकर विकास को गति दी जा सके। रियायतें भी देनी है और प्रोत्साहन भी देने है, ताकि उपभोक्ता के पास खर्च करने की अतिरिक्त राशि का सृजन हो। प्रोत्साहन देना है ताकि उद्योग व्यवसाय में तेजी आये और रोजगार के अवसर बढ़े। विकास को गति देने के लिए बैकिंग सिस्टम में तरलता की कमी का समाधान सरकार को करना होगा। देश का सम्पूर्ण क्रेडिट सिस्टम 14 लाख करोड़ रूपय के बैडलॉन के कारण अवरूद्ध सा हो गया है। जिसका हल खोजे बिना मंदी की भंवर से अर्थव्यवस्था को निकालना आसान नहीं होगा। सुस्त अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाने के लिए सरकार बजट में साहसिक निर्णय ले सकती है। राजकोषीय सृदृढ़ता के रोड मैप में ढ़ील देने का निर्णय ले सकती है और यदि ऐसा निर्णय सरकार लेती है तो राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्य 3.4 प्रतिशत की सीमा को लांधा जा सकता है। इसके विपरीत राजस्व आय बढ़ाने के लिए क्रूड आयल, पेट्रोल डीजल, बिजली और रियल इस्टेट को जी0एस0टी0 के दायरे में ला सकती है।
/लेखक-सूर्यकांत शुक्ला (आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ)
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