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मत्स्य उत्पादन में झारखंड है देश का अग्रणी राज्य- राधामोहन सिंह
रांची29नवंबर। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि आज यह देख कर हर्ष हो रहा है कि झारखण्ड को पहली बार कोई ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो पूरी प्रतिबद्धता से गांव के विकास, गरीबों का सशक्तिकरण, किसानों की उन्नति के बारे सोचता है और उस निमित कार्य को अंजाम देता है। यह राज्य किसानों का अपने मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास का ही परिणाम है कि झारखंड मछली उत्पादन में दक्षिण के राज्यों को पीछे छोड़कर आज देश मत्स्य उत्पादन में अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। वर्ष 2013-14 में जहां 1 लाख टन उत्पादन हुआ था वहीं 2018- 19 में 2 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ। जबकि मत्स्य बीज उत्पादन में तो झारखण्ड 181प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2013 . 14 में 100 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ जबकि 2018-19 में 1060 करोड़ बीज का उत्पादन किया गया। उपरोक्त बातें केंद्रीय .षि एवं .षि कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहीं. श्री सिंह गुरुवार को खेलगांव में आयोजित वैश्विक .षि शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखण्ड तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य आपदा कोष में वृद्धि हुई, राज्य के किसानों को मिला सुरक्षा कवच मिला। केंद्रीय .षि मंत्री ने कहा कि सरकार गठन के बाद किसानों को सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य आपदा कोष में वृद्धि की गई। 4 वर्ष पूर्व यह कोष 33 करोड़ का था जिसे बढ़ा कर 61 करोड़ कर दिया गया। 21 करोड़ की राशि का वितरण इस मद में राज्य सरकार कर चुकी है। आज धान की लागत कम और फायदा ज्यादा है क्योंकि सरकार ने 2013-14 में लागू 961 रुपये को बढ़ा कर 2018-19 में 1750 रुपये कर दिया। जैविक खेती हेतु झारखण्ड में 250 क्लस्टर का निर्माण हुआ है। .षि यांत्रिकीकरण के लिए राज्य को 2014 से पहले कुछ नहीं मिलता था लेकिन 4 साल में 12 करोड़ 37 लाख की राशि दी गई ताकि छोटे किसानों को सस्ते दर पर .षि यंत्र मिल सके। लाह उत्पादन हेतु 4 वर्ष पूर्व तक 600 करोड़ का आवंटन होता था सरकार ने 4साल में 1,128 करोड़ की राशि आवंटित की है।
कुशल मानव संसाधन हेतु कार्य हो रहा है
श्री सिंह ने कहा कि झारखंड के हजारीबाग में बन रहे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बायो टेक्नोलॉजी का उद्घटान 2019 जनवरी में होगा। इसके माध्यम से हम।.षि के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद जो आपने राज्य में एक और .षि विश्वविद्यालय बनाने की सोंची। तकनीक को विकसित करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। किसान इस मेरुदंड को सशक्त करें. केंद्रीय .षि मंत्री ने कहा कि झारखण्ड लगातार सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है लेकिन दुग्ध उत्पादन में किसानध्यान नहीं दे रहें हैं। किसान भारत की मेरुदंड पशुधन को मजबूत करें। सरकार ने देशी नस्ल के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है। 1 हजार .त्रिम गर्भधारण केंद्र की स्थापना की गई है। देशी नस्ल के संरक्षण हेतु पूर्व की सरकार द्वारा 8 करोड़ दिए गए थे। विगत 4 साल में इस कार्य के लिए 58 करोड़ की स्वी.ति दी गई, जिसके तहत 25 करोड़ की राशि निर्गत कर दी गई है।
गांधी जी के सपने को साकार करने की दिशा में हो रहा है.
श्री सिंह ने कहा कि देश की आजादी के बाद महात्मा गांधी जी का स्पष्ट सपना था कि गांव और किसान को सशक्त बनाना है। लेकिन गांधी जी का यह सपना कहीं पीछे छूट गया और आशा के अनुरूप सपना धरातल पर नही सका। इसके निमित प्रयास हुए लेकिन सफलता नहीं मिली। अब केंद्र सरकार 2006 में किसानों के उत्थान के लिए लाई गई स्वामी नाथन के किसान कल्याण हेतु 201 सुझाव पर कार्य जर रही है इस हेतु किसान कल्याण के कई निर्णय लिये गये। 2018-19 में 2 लाख 11 हजार करोड़ का बजटीय निवेश किया गया। कॉर्पस फण्ड का निर्माण हुआ। 99 बड़ी परियोजनाओं में से 40 का कार्य पूर्ण हो चुका है ।
बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने का अभियान शुरू हुआ-रमेश घोलप
ग्लोबल एग्रीकल्चर सम्मिट के टेक्नीकल सेशन में रमेश घोलप निदेशक, .षि विभाग, झारखण्ड सरकार ने विभाग द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों को बताया। उन्होंने बताया कि झारखण्ड के .षकों के लिये सिंगल विंडो सिस्टम उप्लब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा बंजर और अयोग्य भूमि को खेती योग्य बनाने हेतु भी कार्य किया जा रहा है। .षकों की दक्षता के विकास के लिये छोटे छोटे मशीन विकसित किये जा रहे हैं और उसका प्रशिक्षण भी स्थानीय लोगों को दिया जा रहा है। जिससे उसके मरम्मती के लिये किसी और पर निर्भर ना रहना पड़े।
आईकार दिल्ली के एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग साइंटिस्ट डॉ रॉफ अहमद पारे ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान में किसान की औसत आय ₹6426 प्रति माह है। इसको दुगना करने का अर्थ है कि 2022 तक किसानों की आय को ₹12,852 प्रतिमाह करना। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए .षि के क्षेत्र में विकास दर 24þ होनी चाहिए जो कि वर्तमान विकास दर 4.9 प्रतिशत की तीन गुनी है।
किसानों की आय को दोगुना करने के साथ-साथ उसकी आय को स्टेबलाइज करने की आवश्यकता है। जिससे कि मांग एवं आपूर्ति में सामंजस्य बना रहे। इसके लिए उसके इनपुट की लागत को न्यूनतम करना, मूल्य संवर्धन और .षि क्षेत्र में विविधीकरण महत्वपूर्ण घटक हैं।
एम शिवा, निदेशक, समेति, गवर्नमेंट आफ झारखंड ने कहा कि झारखंड की विशेषता यह है कि सिंगल पॉइंट ऑफ कांटेक्ट सभी के लिए बनाया गया है। जो कि .षि के क्षेत्र में अनूठा प्रयोग है।
झारखंड ईस्टर्न इंडिया का द्वार कहा जाता है। झारखंड द्वारा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे सार्क देशों के लिए एक कॉरिडोर उपलब्ध है जिससे कि .षि के क्षेत्र की संभाव्यता का दोहन किया जा सके। झारखंड में बिजनेस का जीवंत वातावरण विद्यमान है, स्थिर सरकार और व्यापार का सीधा सरल वातावरण एवं नीतियां निवेश के लिए अत्युत्तम संयोग है।
राजेन्द्र, प्रोफेसर, एग्रीकल्चर ऐण्ड फूड इजीनियरिंग, आईआईटी. खड़गपुर ने झारखण्ड राज्य को निर्यातक राज्य बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के उपागम साझा किये। उन्होंने कहा कि झारखण्ड के किसानों के लिये सबसे बड़ी समस्या उनके पास जमीन की कमी है। झारखण्ड मे काफी कठोर जमीन है। इसे खेती योग्य बनाने के लिये उपयोग मे आने वाले मशीनों के इस्तेमाल के तरीकों को बताया। उन्होंने कठोर मिट्टी को भुरभुरा बनाने, खरपतवार हटाने, मकई के उत्पादन, धान की खेती मे इस्तेमाल करने मूंगफली की खेती में उपयोग में आने वाले उपकरणो के बारे मे बताया। भविष्य की रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के बारे में भी अपने विचार साझा किए।
डॉ डी के रूसिया एग्री इंजीनियरिंग पदाधिकारी, इंचार्ज, बीएयू रांची ने किसानों के द्वारा उपयोग में लाये जा रहे परम्परागत हल में ही परिवर्तन कर उसे .षकों के उपयोग के लायक बनाने के लिये उपकरणों के विषय में सारगर्भित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड की भूमि को दो से तीन साल में पलटने का कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने मशीनों के उपयोग से कम से कम लागत और मेहनत से अधिक से अधिक उत्पादन करने की तकनीक बतायी।
अनुवाक गोयल एजीएम सेल्स, एग्री बिजनेस यूनिट, टीएएफई लि॰ ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं मशीन से सेटों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जे-फार्मा ऐप्प द्वारा किस प्रकार .षि के उपयोग के लिये उपयोगी मशीनों को बुक कर सकते हैं एवं उसके उपयोग के बारे मे भी जानकारी को साझा किया।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा-
चार वर्षां में झारखंड की .षि विकास दर का 19फीसदी बढ़ना एक कीर्तिमान
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि चार वर्षां में झारखंड की .षि विकास दर का 19फीसदी बढ़ना देश के एक कीर्तिमान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में यहां की .षि क्षेत्र की प्रगति – 4प्रतिशत थी। वर्ष 2016-17 की .षि की विकास दर 14.3प्रतिशत थी।उन्होंने कहा कि पिछले 4 वर्षों में .षि विकास दर में एक बहुत ही बड़ी क्रांति आई है जो की नीति आयोग के हिसाब से एक कीर्तिमान है। इसके लिए झारखंड सरकार और यहां के मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत बधाई।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि झारखंड सरकार ने किसान भाइयों बहनों को इजराइल भेजा। और इजराइल की टीम भी यहां आई हुई है। एक छोटे से देश में कैसे पानी का सही उपयोग करके किस तरह से अपनी .षि का उत्पादन बढ़ाया यह निश्चित रूप से सीखने का विषय है। उन्होंने कहा कि इजराइल से खेती प्रणाली को सीख कर आए ये .षक नेतृत्वकर्ता की भूमिका में रहेंगे। जब किसान भाई खुद नेतृत्व करेंगे तो बहुत बड़ी क्रांति का सूत्रपात होगा। उन्होंने कहा कि केवल .षि क्षेत्र ही नहीं झारखंड में जो सबसे बड़ा बदलाव आया है वह मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में है। पिछले 4 साल में यहां का उत्पादन मत्स्य के क्षेत्र में करीब 83प्रतिशत बढ़ा है। यह तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, कहीं नहीं हुआ जो कि झारखंड में हुआ है।
अपने डैम में केज प्रोडक्शन के द्वारा उत्पादन बढ़ाया है। .षकों की आय को दोगुना करने के लिए केवल .षि ही नहीं बल्कि दुग्ध उत्पादन और अन्य संबद्ध क्षेत्र में आय बढ़ाकर ही यह संभव है। .षि में तकनीक का उपयोग जरूर करें। नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि झारखण्ड के 19 आकांक्षी जिलों में .षि के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जा रहा है।
मंगोलिया में भी निवेश की काफी संभावनाएं है-गोन्चिंग गैनबोल्ड
मंगोलिया के राजदूत गोन्चिंग गैनबोल्ड ने कहा कि झारखंड की तरह मंगोलिया में भी कई प्रकार के खनिज संसाधन पाए जाते हैं। जिससे कि वहां निवेश की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते है कि झारखंड के साथ हाथ मिलाकर आर्थिक क्षेत्र में और आगे बढ़ना चाहते हैं। मंगोलिया एक छोटा देश है। यहां की जमीन बहुत उपजाऊ है, यहां पर तरह-तरह की खेती बाड़ी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मंगोलिया के चारों तरफ चीन जैसे बड़े बाजार उपलब्ध हैं। किसी भी तरह के उत्पादन के लिए बाजार की उपलब्धता है।
कोका कोला झारखंड के लिए लोकल कंपनी की तरह साथ मिलकर काम करेगी-इश्तियाक अमजद
। कोका कोला इंडिया के वॉयस प्रेसिडेंट इश्तियाक अमजद ने कहा कि ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट हम सभी के लिए बहुत ही लाभदायक होगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में हम नया प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं। फूड समिट के माध्यम से हम इस पर आगे बात बढ़ाएंगे।उन्होंने बताया कि उनका जन्म और उनकी परवरिश इसी शहर में हुई है। यह प्रसन्नता का विषय है कि वे अपने घर में आपसे बात कर रहा हूं। हम एक साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि कोकोकोला भारत और झारखंड के लिए एक लोकल कंपनी की तरह साथ मिलकर काम करेगी।
उन्नतक तकनीक का प्रयोग का कृषि उत्पादन में बढ़ावा संभव-माया कदोश
एंबेसी ऑफ इजरायल की चार्ज दी अफेयर्स माया कदोश ने कहा कि .षि एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में किस तरह से उन्नत तकनीक का प्रयोग करके उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है इस दिशा में झारखंड के साथ मिलकर कार्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य खनिज, वन और .षि संपदा में समुन्नत राज्य है। .षि के क्षेत्र में अपने ज्ञान को साझा करते हुए झारखंड की खाद्य प्रसंस्करण संभाव्यता को और भी समुन्नत बनाने की दिशा में यह समिट कारगर प्रयास होगा।
माया कदोश ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का प्रयोग करके .षि उत्पादकता को बढ़ाने का उद्देश्य है। एक साथ मिलकर हम लाखों लाख .षकों की जिंदगी बदलने के लिए प्रयास करेंगे। और अपने अनुभवों को साझा करते हुए इजरायल और झारखंड इस दिशा में आगे और भी प्रयास करेंगे।
झारखंड में उम्दा किस्म का अमेरिकन स्वीट कॉर्न का उत्पादन हो रहा है- प्रदीप साहू
मदर डेयरी के बिजनेस हेड के प्रदीप कुमार साहू ने कहा कि झारखंड का ा मौसम इतना बढ़िया है कि यहां के किसानों को अमेरिकन स्वीट फॉर्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग सिखा कर अत्यंत उम्दा किस्म के अमेरिकन स्वीट कॉर्न का उत्पादन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कटहल को भी फ्रीज करके उसका प्रसंस्करण करके उसे पूरे देश के बाजार में भेजा गया है। सिंगापुर जैसे देश में यहां का कटहल प्रयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि
झारखंड के टमाटर को नेस्ले कंपनी को भेजा जाएगा। यहां करीब 13लाख टन टमाटर होता है। हम यहां 1,00,000 टन टमाटर का प्रसंस्करण कर सकते हैं। यहां के .षकों को मार्केट लिंकेज देने के लिए झारखंड सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, हाइब्रिड वैरायटी के माध्यम से करीब 50,000 किसानों के साथ जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की भलाई के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री की सोच को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इजराइल का अनुभव साझा किया किसान बिरसा मुंडा ने
। इजरायल में कृषि और उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे खूंटी के किसान बिरसा मुंडा ने कहा कि इजरायल जाकर उन्नत किस्म की तकनीकी सीखने का अवसर मिला। कम पानी में अधिक पैदावार कैसे की जाती है यह हमने सीखा। इजरायल के डेयरी फार्म में गए। डेयरी फार्म में हमने यह देखा कि वहां भी हमारे जैसा ही काम किया जाता है। लेकिन तकनीक के उपयोग के साथ किया जाता है। निश्चित रूप से इजरायल की समुन्नत तकनीक का समावेश झारखंड में करेंगे और अन्य .षकों के साथ उसको साझा भी करेंगे।
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