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पर्यटक स्थलों को स्वदेश दर्शन व प्रसाद योजना में शामिल करने की मांग

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चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह ने लोक सभा में उठाई मांग
रांची,7फरवरी। चतरा लोक सभा के सांसद सुनील कुमार सिंह ने आज संसद में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन एवं प्रसाद योजना में झारखण्ड राज्य के पर्यटक स्थलों को शामिल करने एवं राशि आवंटित करने की मांग की।
चतरा सांसद ने संसद में अपनी बात रखते हुए बताया कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना के विकास हेतू कई महत्वपूर्ण कदम उठायें हैं। वर्ष 2014-15 में दो नई योजनाएं लागू की गई। प्रथम स्वदेश दर्शन – थीम आधारित पर्यटक परिपथों का एकीकृत विकास करना और दूसरी प्रसाद-तीर्थ स्थल जीर्णोद्धार एवं आध्यात्मिक संवर्धन अभियान। प्रथम स्वदेश दर्शन योजना के तहत विकास के लिए 13 थीम आधारित परिपथों की पहचान की गई हैं। परन्तु इन परिपथो में एक भी झारखण्ड़ राज्य का कोई भी स्थल पर्यटक विकास के लिए शामिल नहीं किया गया है। जबकि झारखंड राज्य को प्रकृति ने अप्रतिम सौंदर्य और असीमित पर्यटन स्थलों से नवाजा है। उन्होंने बताया कि सदियों से प्राकृतिक खूबसूरत झरने, नदी, पहाड़, पठार और वन्य प्रदेश शामिल हैं। कई मानवनिर्मित उद्यान, मंदिर और प्राचीन कला स्थल आदि हैं। झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य व संस्कृति देश -विदेेश के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जंगल, पहाड़, घाटी, झरने, वन्य प्राणी, इतिहास, सभ्यता, संस्कृति में धनी झारखण्ड धरती पर स्वर्ग का एक हिस्से के रूप में खड़ा है।
सांसद सुनील सिंह ने बताया कि भारत सरकार के अतुल्य भारत के सहयोग से इण्डिया टुडे ट्यूरिज्म अवार्ड फरवरी 2017 में वन्यजीव अध्याय में झारखण्ड के बेतला वन का उल्लेख है। जिसमें साल और बांस का जंगल है एवं में वनस्पतियों और जीवेां की विविधता के लिए मशहूर हैं। राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा पा चुका यह जंगल बाघ, चीते, हाथियों और इंडियन गौर समते कई पशुओं का घर हैं। उन्होंने बेतला नेशनल पार्क, पलामू रिजर्व टाइगर, लावालौंग वण्यजीव अभायरण्य को स्वदेश दर्शन की वन्यजीव परिपथ या जनजातीय परिपथ में शामिल करने की मांग की
लोकसभा सांसद सुनील सिंह ने बताया कि राज्य के चतरा जिला अन्तर्गत ईटखोरी शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन, एवं बुद्ध मतावलंबियों को समाहित करता धार्मिक विविधता एवं सहिष्णुता के साथ – साथ सांस्कृतिक एकता का दिग्दर्षन कराता है। इसमें संस्कृति, विरासत, आध्यात्मिकता और इको पर्यटन का विवकेपूर्ण मिश्रण है। इंडिया टुडे ने भी झारखण्ड के पारसनाथ मंदिर, गिरिडीह, (झारखण्ड की सबसे ऊंची पहाडी पर 4480 फुट पर स्थित पारसनाथ मंदिर को जैनियों के सबसे पवित्र स्थलों में एक दर्जा हासिल हैं) का जिक्र विरासत स्थल में किया गया हैं। इसलिए ईटखोरी भद्रकाली मंदिर, कौलेश्वरी मंदिर, भवानी मठ चतरा, नगर भवानी प्राचीन मंदिर, चदंवा, लातेहार, श्रीकेदाल मंदिर व झारखंडी मंदिर, पारसनाथ मंदिर आदि मंदिरों को एक परिपथ में जोड़कर विकसित किया जायें। उन्होंने बताया कि राजा मेदनी राय द्वारा निर्मित पलामू किला एवं नावागढ़ किला प्राचीन धरोहर है। इसलिए इन मंदिरों एवं किलों को स्वदेश दर्शन की जैन, बौद्ध परिपथ , आध्यात्मिक परिपथ , विरासत परिपथ और इको परिपथ या ग्रामीण परिपथ मंे से किसी में सम्मिलित कर विकसित किया जायें।
उन्होंने कहा कि चतरा संसदीय क्षेत्र के तमासीन एवं लोध जल प्रपात, कमलदह झील सहित विभिन्न जल प्रपात एवं अन्य मनोहर घाटियां, इटखोरी और कौलेश्वरी पहाडि़यां आदि के लिए पर्यावरण आधारित पर्यटन विकसित करना चाहिए। नेतरहाट को पर्वतीय पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में पर्यटन विकसित होने से पर्यटकों का आवागमन बढे़गा। स्वदेश दर्शन की पर्वतीय परिपथ, जनजातीय परिपथ व इको परिपथ या ग्रामीण परिपथ मंे से किसी में सम्मिलित कर विकसित किया जायें।
प्रसाद योजना के अन्तर्गत धार्मिक महत्व के स्थलोें के विकास के लिए झारखण्ड राज्य से एकमात्र स्थान देवघर का चयन किया गया हैं। जबकि झारखण्ड में कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं जिनका विकास किया जाना आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 एवं वर्ष 2016-17 के लिए झारखंड को पर्यटन विकास के लिए कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई है। इसलिए आगामी वित्तीय वर्ष में चतरा जिलान्तर्गत इटखोरी प्रखण्ड स्थित ‘‘माँ भद्रकाली’’ मंदिर एवं हण्टरगंज प्रखण्ड स्थित ’’कौलेश्वरी’’ मंदिर, चतरा का भवानी मठ, नगर भवानी प्राचीन मंदिर, चदंवा नगर मंदिर, लातेहार, श्रीकेदाल मंदिर व झारखंडी मंदिर आदि प्राचीन एवं धार्मिक महत्व के मंदिरों के विकास के लिए प्रसाद योजना में शामिल कर राशि आवंटित की जायें।

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