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झारखण्ड का गौरव – सैनिक स्कूल तिलैया

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16 सितम्बर को स्कूल का 48वां स्थापना दिवस पर विशेष
रांची,15सितम्बर । कोडरमा शिक्षा के क्षेत्र्ा में सैनिक स्कूल तिलैया ने झारखण्ड में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। 16 सितम्बर को स्कूल अपना 48वां स्थापना पूरा करेगा। मालूम हो कि लगातार तीन शैक्षिक सत्र्ाों ने 2006-07, 2007-08, 2008-09,2009-10 में दशम वर्ग के परिणाम में विद्य्नालय देश के समस्त सैनिक विद्य्नालयों में प्रथम स्थान में रहा। 05 सितम्बर 2008 को झारखण्ड सरकार ने सैनिक स्कूल तिलैया को राज्य का सर्वश्रेष्ठ विद्य्नालय घोषित किया। विद्य्नालय के शिक्षक, जी0एल0दास, जेड0 सईद एवं ए0 के0 मजूमदार राष्ट्रपति पुरस्कार द्वारा सम्मानित किये जा चुके हैं।
48 वर्षों के इस सफर में विद्य्नालय को अनेक उपलब्धियॉं प्राप्त हुई है तथा अपने उददेश्य व आदर्श “अग्रे सरत् सर्वदा’ को प्राप्त करने हेतु शिक्षक एवं छात्र्ाों का सामूहिक योगदान रहा है। बताते चलें कि सैनिक स्कूलों की श्रृंखला में अन्य राष्ट्रीय स्तर के पब्लिक विद्य्नालयों के समुदाय के मध्य सैनिक स्कूल तिलैया अपना एक विशिष्ट स्थान रखता है।
सन् 1962 ई0 में भारत-चीन युद्ध के पश्चात् तत्कालिन रक्षा मंत्र्ाी के0के0 कृष्णामेमन ने परिकल्पना की ऐसे विद्य्नालयों की जो छात्र्ाों में शिक्षा के साथ-साथ सैन्य गुणों का भी विकास करे। इसी कल्पना के साकार के रुप की एक कड़ी है सैनिक स्कूल तिलैया। जिसकी स्थापना 16 सितम्बर 1963 को हुई। जो कि वर्तमान समय तक राज्य का एकमात्र्ा सैनिक स्कूल अपनी अलग पहचान बनाया हुआ है। इसके संस्थापक प्राचार्य कर्नल एल0ई0जी0 स्मिथ की छत्र्ाछाया में स्कूल की नींव रखी गई। मुख्य रुप से भारतीय सेना के अधिकारियों में क्षेत्र्ाीय असंतुलन को दूर करने के लिए स्थापित सैनिक स्कूल में मेधावी ग्रामीण छात्र्ाों को प्रवेश मिलता रहा है ताकि वे उच्चस्तरीय विद्य्नालयों की तरह शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर शैक्षिक, मानसिक, बौद्धिक रुप से विकसित हो सके और उनमें भारतीय सेना में प्रवेश पाने की जागृति आए। विद्य्नालय के पी0आर0ओ0 अंजनी कुमार के अनुसार यह पूर्णतः आवासीय विद्य्नालय सिर्फ लड़कों के लिए है तथा यहांॅ कक्षा-6 से 12 तक की 7िाक्षा प्रदान की जाती है। वर्तमान समय में विद्य्नालय में 871 छात्र्ा पढ़ाई कर रहे हैं। छात्र्ाों के व्यक्तित्व एवं चरित्र्ा पर वि7ोष ध्यान दिया जाता है, ताकि वे एन0डी0ए0 नेवल अकादमी तथा वायुसेना अकादमी के अलावा अन्य क्षेत्र्ाों में भी अपनी योग्यता का प्रदर्7ान कर सके। उल्लेखनीय हो कि इस विद्य्नालय मेें सी0बी0एस0ई0 पाठ्यक्रम लागु है तथा प्लस टू में केवल विज्ञान शाखा के छात्र्ा ही पढ़ सकते हैं। इस विद्य्नालय में प्रवेश 6 एवं 9 वर्ग के लिए लिया जाता है। सैनिक स्कूल तिलैया में लगभग एक हजार से अधिक कैडटों को एन0डी0ए0 में भेजने तथा विभिन्न परीक्षओं के माध्यम से 500 से अधिक कैडेटों को सेना की अन्य अकादमियों से कमीशन प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है।
दूसरी ओर स्कूल को कुछ उपलब्धियॉं ऐसी भी प्राप्त हुई है जिसका सदैव गौरव रहेगा। जैसे ले0 चन्द्रमौले7वर तिवारी ने सन् 1982-83 ई0 में राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी में स्वार्ड ऑफ ऑनर की उपाधि प्राप्त की है। सन् 1986 ई में ले0 जनरल समरेन्द्र मोहन भारतीय सैन्य अकादमी परेड का नेतृत्व कर स्वर्ण पदक एवं स्वार्ड ऑफ ऑनर का विजेता बने। 28 सितम्बर 1985 में “कोर ऑफ इंजीनियर“ द्वारा प्रायोजित एक साहसिक अभियान में भाग लेने पर कैप्टन चन्द्रहास भारती को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। आई0एन0एस0 लोनवाला में प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए कैप्टन बी0एन0शुक्ला ने सीरिया सरकार द्वारा प्रायोजित ’दमसकस स्वार्ड“ प्राप्त करने का गौरव हासिल किया है। महे7ा कुमार ने हांगकांग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलम्पियाड में भाग लेकर कांस्य पदक प्राप्त किया है। सन् 2009 में कैडेट चिराग शर्मा ने गणंतत्र्ा दिवस परेड में जुनियर डिवीजन में अखिल भारतीय स्तर पर सर्वश्रैष्ठ कैडेटों का सम्मान प्राप्त कर विद्य्नालय को गौरवांवित किया है।
इधर वर्तमान में विद्य्नालय के प्राचार्य लें0 कर्नल प्रेमलाल,टी0डी0 के कुशल मार्गदर्शन में सफलता की नित नई उॅचाईयों की ओर अग्रसर है। साहसिक प्रशिक्षण में हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान, दार्जिलिंग में छात्र्ाों का भाग लेना एवं तिलैया डैम सरोवर में “कायलिंग अभियान“ का आयोजन उल्लेखनीय है। वहीं विद्य्नालय सामाजिक सरोकारों के प्रति भी पूर्णतः जागरुक है। मालूम हो कि पॉंच वर्ष पूर्व विद्य्नालय में तत्कालिन रक्षामंत्र्ाी प्रणव मुखर्जी भी कार्यक्रम में शिरकत किये हैं। वहीं समय-समय पर राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्र्ाी, शिक्षामंत्र्ाी सहित कई मंत्र्ाी कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर स्कूल का गौरव बढ़ाते रहे हैं।
विद्य्नालय के पूर्व छात्र्ाों में ले0 जनरल ज्ञान भूषण एवीएसम, बी0एस0एम0, मे0जन0 एस0पी0 सिन्हा, मे0जन0 ब्रिजेश कुमार, बीएस0एम0, मे0जन0 एस0पी0 चौधरी, मे0जन0 एसक0 के0 सिंह, मे0जन0 ए0के0 चौधरी, मे0जन0 एन0एस0 विद्य्नार्थी ने सैन्य सेवा क्षेत्र्ा मंे अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है और वर्तमान समय में विभिन्न राज्यों में अपनी सेवा बखूबी निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त मनोरंजन जगत में प्रकाश झा एवं मंजूला सिन्हा प्र7ाासनिक सेवा में त्र्ािपुरारी शरण उल्लेखनीय नाम शामिल है।
सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र्ाों में लगभग 9 छात्र्ाों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। इसमें देश के लिए ये अमर हुए हैं। स्थापना दिवस 16 सितम्बर को इनको श्रद्धांजलि दी जाएगी। इनमें निम्नलिखित उल्लेखनीय है:-
ले0 शैलेश कुमार, जून-1984, ऑपरेशन-ब्लू स्टार।
के0 मनोज कुमार, अक्टूबर-1987, ऑपरेशन-पवन।
ले0 राजेश कुमार, फरवररी-1989, ऑपरेशन-पवन।
ले0 निर्भय कुमार, मई-1989 ऑपरेशन-पवन।
मे0 रविरंजन कुमार, अगस्त-1996
मे0 आशुतोष कुमार, अगस्त-1996
मे0 संजीत चौधरी, 18 नवम्बर-1997
मे0 ब्रिज किशोर शर्मा, 9 नवम्बर-1997
चन्द्रभूषण द्विवेदी, जून-1989, ऑपरेशन-विजय।

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