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मुख्यमंत्री ने राजदूतों के सम्मलेन में दिया निवेश का आमंत्रण
अस्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में विकास की राह पर, झारखण्ड बना उत्प्रेरक : रघुवर
रांची,5अगस्त। :मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में जहां अनिश्चितता है, अस्थिरता है वहीं भारत निरंतर विकास कर रहा है और झारखण्ड एक विशिष्ट उत्प्रेरक के तौर पर इसमें अपना योगदान दे रहा है।हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ’वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा में विश्वास रखते हैं।वे चाहते हैं कि प्रकृति के अवदानों का पूरी दुनिया उपयोग करे, यह किसी ख़ास क्षेत्र के लिए सीमित न हो।इसी सोच के तहत झारखण्ड के गोड्डा में मेगा पॉवर प्लांट लग रहा है जिसकी बिजली से केवल झारखण्ड ही नहीं पड़ोसी देश बांग्लादेश भी रोशन होगा।माननीय मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास आज न दिल्ली के होटल ली मैरेडियन में झारखण्ड में निवेश की संभावनाओं पर विमर्श के लिए आयोजित राजदूत सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे।इस सम्मलेन में 45 देशों के राजदूतों, दूतावासों के अधिकारियों एवं वाणिज्यिक दूतों ने हिस्सा लिया।
श्री दास ने विदेशी राजनयिकों को फरवरी में रांची में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मलेन में भागीदारी का आमंत्रण देते हुए कहा कि वे अपने देश के निवेशकों को बताएं कि झारखण्ड संसाधनों और संभावनाओं से भरा हुआ प्रदेश है।जहां देश की सबसे अधिक खनिज संपदा है।झारखण्ड ऐसा प्रदेश है जहां निवेशक शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, आधारभूत संरचना जैसे हर क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने मजदूर के रुप में अपनी यात्रा शुरु की।टाटा में करीब 15 साल काम किया और इसलिए मैं आर्थिक परि॰श्य का आकलन कर सकता हूँ। श्री दास ने कहा कि भारत समेत हर देश में गरीबी है, अशिक्षा है, बीमारी है पर यह तभी ख़त्म होगा जब हम आर्थिक प्रगति करें।उन्होंने निवेशकों का आह्वान करते हुए कहा ॰ “ आप झारखण्ड आयें, आपको हर सुविधा मिलेगी और हम मिलकर गरीबी, अशिक्षा, बीमारी जैसे अभिशापों से लड़ेंगे।‘
श्री दास ने कहा कि जब को निवेश करता है तो उसकी दो प्राथमिकताएं होती हैं ॰ लाभ और सुरक्षा।हमारी नीतियों और राज्य के सुरक्षित माहौल से निवेशकों को लाभ मिलेगा।झारखण्ड पूर्वोत्तर का गेटवे है, इस वजह से निवेशकों को यहाँ बड़ा बाजार मिलेगा।प्रदेश में एक हजार एकड़ में बंदरगाह बन रहा है जिसके जरिए बंगाल और बांग्लादेश तक सामानों की ढुला आसान होगी।
श्री दास ने कहाकि झारखण्ड बेहद खूबसूरत प्रदेश है, यहाँ सुरक्षा और शान्ति है, तभी तो क फिल्मों की शूटिंग यहाँ हो रही है और अनुपम खेर, विद्य्ना बालन, नसीरुद्दीन शाह, महेश भट्ट जैसे देश के क ख्यातिप्राप्त फिल्मकार फिल्म निर्माण के लिए झारखण्ड का रुख कर रहे हैं।आप भी यहाँ निश्चिन्त होकर आयें और झारखण्ड की नैसर्गिक ख़ूबसूरती और हमारी बेहतरीन मेजबानी का लाभ उठाएं।
विदेश राज्यमंत्री श्री एम जे अकबर ने इस अवसर पर कहा कि झारखण्ड आधुनिक भारत का जन्मस्थल है।आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था का शुभारम्भ झारखण्ड के जमशेदपुर से हुआ था।झारखण्ड की प्राकृतिक सुन्दरता, स्थानीय निवासियों का सहयोगात्मक रवैया और अकूत खनिज संपदा आप निवेशकों के लिए सहयोगात्मक तत्परता के साथ मौजूद है।विकास के ॰ष्टिकोण से प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न क़दमों से सूबे के आर्थिक विकास के पहिये को गति मिली है।
मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सबसे तेज गति से विकसित होती अर्थव्यवस्था वाला देश है और हमारा राज्य झारखण्ड भी विकास की असीम संभावनाएं रखता है।मेक इन इंडिया के लांच होने के बाद से वैश्विक निवेश की गति बढ़ी है और झारखण्ड भी इसकी रफ़्तार से कदमताल कर रहा है।झारखण्ड में देश का 40 प्रतिशत खनिज संसाधन है, प्रशिक्षित मानव संसाधन है, स्थिर सरकार है जो प्रदेश को न औद्य्नोगिक ऊंचाइयां देने के लिए प्रतिबद्ध है।औद्य्नोगिक विकास की समीचीन आवश्यकताओं को समझते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नियमों और प्रावधानों की गहन समीक्षा के बाद बहुत सारे नियमों में सुधार किया है और इसके सुखद प्रतिफल के रुप में झारखण्ड को इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में तीसरा स्थान मिला है।प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में झारखण्ड को पांचवां स्थान मिला है। गवर्नेंस हमारी सरकार ने लागू किया है।इन प्रक्रियागत सुधारों की वजह से अब झारखण्ड निवेश के लिए सबसे उपयुक्त प्रदेश है।खनन, ऑटोमोबाइल, कृषि आधारित उद्य्नोग, खा।प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, आ टी, आधारभूत संरचना क्षेत्र, शिक्षा, पर्यटन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में यहाँ निवेश की बेहतर गुंजाइश है।
मुख्य सचिव ने विभिन्न देशों के राजदूतों, दूतावास के अधिकारियों एवं वाणिज्यिक दूतावासों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने अपने देश में भारत और झारखण्ड की आर्थिक तरक्की का सन्देश दें ताकि निवेशक झारखण्ड में अलग अलग सेक्टर्स में निवेश करें।निवेशकों को आकर्षित करने के लिये फरवरी 2017 में रांची में वैश्विक निवेशक सम्मलेन हो रहा है।इस एक मंच से दुनिया भर के उद्य्नोगपतियों और निवेशकों को झारखण्ड के बारे में जानने समझने में सहूलियत होगी।इसी मकसद से मोमेंटम झारखण्ड कार्यक्रम लांच किया गया है।मोमेंटम झारखण्ड का प्रतीक चिह्न युवा हाथी है जो स्थायित्व, शक्ति और प्रचुरता का प्रतीक है।
इस अवसर पर उद्य्नोग सचिव सुनील बर्णवाल ने कहा कि झारखण्ड में संभावनाएं आपका इन्तजार कर रही हैं।प्रदेश में अनुकूल औद्य्नोगिक और सुरक्षित माहौल है।राज्य सरकार ने बेहतर औद्य्नोगिक माहौल बनाने के लिए क गंभीर प्रयास किये हैं।सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में दस न नीतियाँ लागू की गयी हैं, जिसमे सबसे अद्य्नतन है ॰ इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पालिसी 2016।झारखण्ड का सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकास का प्रमुख संकेतक है।यह को अध्यादेश नहीं वरन विधानसभा से पारित क़ानून है।इसके तहत मिल रहे हर प्रस्ताव को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है।बौद्धिक संपदा के मामले में झारखण्ड पहले से धनी है।यहाँ 1926 में स्थापित और अब आ आ टी का दर्जा प्राप्त इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस है जहां की प्रतिभाएं देश ही नहीं दुनिया के हर बड़े प्रोजेक्ट में सेवाएँ दे रही है।यहाँ बीआ टी मेसरा जैसा प्रतिष्ठित संस्थान है।दुनिया की बड़ी कंपनियों के लगभग 25 सी ओ यहाँ के छात्र हैं।एक्सएलआरआ , आइआइएम जैसे क प्रतिष्ठित संस्थान यहाँ हैं।झारखण्ड को नॉलेज हब बनाने के हमारे अभियान को मंजिल तक पहुंचाने के लिए अब भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में झारखण्ड को 692 प्रतिष्ठित संस्थानों की जरुरत है।विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से सरकार ग्रीनफील्ड मेडिको सिटी बनाने की योजना पर काम कर रही है।युवाओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से प्रदेश में 60 मेगा स्किल सेंटर बनाने की योजना है।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आर के श्रीवास्तव ने समापन संबोधन में एक बार फिर सभी राजनयिकों का अभिनंदन किया और उन्हें झारखण्ड में निवेश का न्यौता दिया।
शिक्षा के क्षेत्र में करें निवेश, सरकार देगी हर संभव सहायता -रघुवर दास
मुख्यमंत्री ने नइ दिल्ली में किया वर्ल्ड एजुकेशन समिट का उद्घाटन, शिक्षा क्षेत्र की मौजूदा जरुरतों को किया रेखांकित
रांची,5अगस्त। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ज्ञान-तकनीक के इस युग में दुनिया में गुणात्मक परिवर्तन हो रहे हैं। इस वैश्विक परि.श्य में दीवारें टूट रही हैं, अब झारखण्ड का भी कोई छात्र किसी अग्रणी वैश्विक विश्वविद्य्नालय से इन्टरनेट के जरिये जुड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली के होटल ली मैरेडियन में आयोजित वर्ल्ड एजुकेशन समिट 2016 को संबोधित करते हुए ये उदगार व्यक्त कियेद्य्न इस अवसर पर झारखण्ड को विकास की नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास को वर्ल्ड लीडरशिप अवार्ड भी प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के प्रयोग ने ज्ञान की राह को आसान बनाया है और शिक्षा के इस उन्नत युग में अब शिक्षक भी मार्गदर्शक और सुविधा प्रदाता की भूमिका में आ गए हैं। इस बड़े परिवर्तन में निजी विश्वविद्य्नालयों ने बड़ी भूमिका निभाई है। निजी विश्वविद्य्नालयों की वजह से व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थाओं को राज्य में निजी विश्वविद्य्नालय खोलने का आमंत्रण देते हुए उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
श्री दास ने कहा कि इस वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में हर क्षेत्र में प्रतियोगिता है, चाहे वह व्यापार का क्षेत्र हो या मीडिया का, शिक्षा के क्षेत्र में भी स्वस्थ प्रतियोगिता मौजूदा वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि हम ज्ञान आधारित युग में हैं, जिन के पास ज्ञान या विशिष्टता होगी, वही आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्धृत करते हुए रघुवर ने कहा कि तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल होना चाहिए, इससे पारदर्शिता आती है, इसलिए तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए और हमारी सरकार इसे बढ़ावा भी दे रही है। हमारी सरकार का मानना है कि जिस राज्य में शिक्षा की व्यवस्था बेहतर होगी वहाँ की अर्थव्यवस्था भी बेहतर होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड में एमिटी विश्वविद्य्नालय की कक्षाएं इसी सत्र से शुरु हो रही हैं । उन्होंने अन्य निजी विश्वविद्य्नालयों से झारखण्ड में शिक्षा के क्षेत्र में निवेश का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केवल उद्य्नोग और आईटी ही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी झारखण्ड में निवेश करें ताकि हमारे झारखण्ड के नौजवान वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो पाएं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी शिक्षा के क्षेत्र में झारखण्ड पर फोकस कर रही है। झारखण्ड सरकार अच्छे निजी विश्वविद्य्नालयों को इसलिए भी आमंत्रित करना चाहती है ताकि हमारे प्रदेश के नौजवानों को जॉब ओरिएंटेड एजुकेशन मिलेद्य्न उन्होंने कहा कि झारखण्ड में माइंस सेक्टर में भी काफी संभावनायें हैं।
देश की शिक्षण पद्धति पर सारगर्भित टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सन 91 से शुरु हुए आर्थिक सुधारों के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य पर लोगों का ज्यादा ध्यान गयाद्य्न जिनके पास पैसे हैं उनके बच्चों का दाखिला तो बढ़िया निजी स्कूलों में हो जाता है और उन्हें अच्छे निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा हासिल हो जाती है। लेकिन गरीब और गांव के लोग इन सुविधाओं से वंचित रह जाते है। अगर हम देश की स्थिति देखें तो 91 के बाद इन दोनों महत्वपूर्ण सेवाओं की स्थिति में और गिरावट आई है। सत्ता में बैठे लोगों ने इसपर ध्यान नहीं दिया ये सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता रही। राजनीतिज्ञों ने शायद इसलिए इन मूलभूत सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि बच्चे वोट बैंक नहीं हैं। इन वर्षों में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया जबकि मेरा मानना है कि जबतक जड़ें मजबूत नहीं होंगी तो पेड़ भी मजबूत नहीं होंगे। इस वजह से हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था पर आज भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षाविदों की अगुवाई में अनेक आयोग बने पर बहुत फर्क नहीं पड़ा है।
कार्यक्रम को बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित करते हुए झारखण्ड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कहा कि वर्ल्ड एजुकेशन समिट के मंच से झारखण्ड को विशिष्ट शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे निजी क्षेत्र और विशेषज्ञों से मजबूत संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे अगले पांच वर्षों में पूर्वी भारत में झारखण्ड नॉलेज हब बन पायेगा। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था देश के तेजी से बदलते आर्थिक परि.श्य की वजह से संक्रमण के दौर से गुजर रही हैद्य्न उन्होंने उम्मीद जताई कि 2020 तक भारत दुनिया की तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनेगा जो इसके मध्यवर्ग के आशातीत विकास की वजह से होगाद्य्न भारत की तकरीबन आधी आबादी औसतन 25 साल से कम उम्र के लोगों की है। यह युवा भारत 2020 तक चीन के प्रभुत्व को समाप्त कर देगा। भारत में लगभग 20 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्य्नालय हैं जिन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 200 विश्वविद्य्नालयों की ग्लोबल रैंकिंग में जगह बनायी है। हमें इस बात का गर्व है कि पिछले 20 वर्षों में छः भारतीयों को अलग -अलग श्रेणी में नोबल पुरस्कार मिले।। हालांकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां हैं। भारत में अभी भी औसतन 18 प्रतिशत युवा ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दाखिला ले पाते हैं जबकि चीन में यह आंकड़ा में 20 प्रतिशत और ब्राजील में 36 प्रतिशत है, इस दिशा में काफी काम करने की जरुरत है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2020 तक इस आंकड़े को 30 प्रतिशत किया जाय जिसके लिए विश्वविद्य्नालयों में 40 मिलियन छात्रों को प्रवेश देने लायक जगह बनाने की जरुरत होगीं गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण हमारी दूसरी बड़ी चुनौती है। शिक्षकों की कमी और पुराने ढर्रे के पाठ्यक्रम, रिसर्च के लिए अलग से शिक्षकों का नहीं होना, रिसर्च का नवोन्मेषी नहीं होना, पीएचडी करनेवालों की संख्या बेहद कम होना, बहुद्देशीय पाठ्यक्रम और कार्यक्रमों की कमी, पाठ्यक्रमों में औद्य्नोगिक भागीदारी का बेहद कम होना आदि चुनौतियां हमारे सामने हैं।
इस अवसर पर पोलैंड के राजदूत थॉमस लुकासा ने कहा कि शिक्षा व खनन के क्षेत्र में रांची व जमशेदपुर में निवेश की संभावनाओं पर पोलैंड सरकार सकारात्मक है और शीघ्र ही इस दिशा में हम काम शुरु करेंगे।
भारत सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग के अपर सचिव आर सुब्रमण्यम ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल क्रांति ज्ञान विस्तार की दुनिया बदल रही है, अब जरुरत इस बात की है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वसुलभ हो। लाखों लोग शिक्षा नीति को लेकर सलाह दे रहे हैं कि कक्षा 9 से लेकर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई ऑनलाइन हो और निःशुल्क हो। शिक्षा गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए, शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि शिक्षा के क्षेत्र में झारखण्ड बेहतर कर रहा है। यहाँ तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ किया जा रहा है।
वल्ड एजुकेशन समिट 2016 के आयोजक एलेट्स के सीईओ डॉ. रवि गुप्ता ने कहा कि झारखण्ड में शिक्षा के क्षेत्र में निवेश निवेशकों को इस क्षेत्र में लीडरशिप प्रदान करेगाद्य्न यहाँ शिक्षा के क्षेत्र में काफी बेहतर काम हो रहा है। इस कार्यक्रम में मैट्रिक्स के सीईओ रवि पंचानन, प्रजोध राजन के अलावा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित थे ।
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