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विस में विपक्षी सदस्यों का हंगामा

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अडाणी समूह के साथ हुए एमओयू के प्रावधान का विरोध व ईचा-खरकई डैम के विस्थापितों की समस्या को लेकर हंगामा

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रांची,11मार्च। झारखंड विधानसभा में आज विपक्षी सदस्यों ने अडाणी समूह के साथ ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए हुए एमओयू के विरोध और ईचा-खरकई डैम निर्माण से विस्थापितों के समक्ष उत्पन्न होने वाली समस्या को लेकर जोरदार हंगामा किया। इन दोनों मुद्दों को लेकर झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव और झारखंड मुक्ति मोर्चा के निरल पूर्ति की ओर से कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया गया,जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अमान्य कर दिया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण आज प्रश्नोत्तरकाल की कार्रवाही पूरी तरह से बाधित रही।
विधानसभा की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11 बजे शुरु होने पर विपक्षी सदस्य ऊर्जा नीति व ईचा-खरकई डैम के मुद्दे को लेकर शोर-शराबा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्य से अपनी बात को सदन में रखने का आग्रह किया। जिसके बाद झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव ने अडाणी समूह के साथ ऊर्जा संयंत्रा को लेकर स्थापित करने के लिए हुए एमओयू में कुछ प्रावधानों पर एतराज जताते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा घोषित ऊर्जा नीति 2012 में यह प्रावधान किया गया है कि यहां ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने वाली कंपनियों को झारखंड विद्य्नुत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर कुल उत्पादन में से 25 प्रतिशत बिजली झारखंड को उपलब्ध कराना होगा, लेकिन राज्य सरकार की ओर से पिछले महीने अडाणी समूह के साथ ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को लेकर एमओयू किया गया है, जिसके तहत 1600 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा और इसमें से एक मेगावाट बिजली भी झारखंड को नहीं मिलेगी। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा कि अडाणी समूह को इतनी बड़ी छूट क्यों दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी गोड्डा में अडाणी समूह को 2500 से 3000एकड़ जमीन देने के लिए नियम में बदलाव किये गये और जमीन की दर को कम कर दिया गया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के निरल पूर्ति ने ईचा-खरकई डैम निर्माण से विस्थापितों के समक्ष उत्पन्न होने वाली समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इस डैम के निर्माण से 184 गांव के लोग विस्थापित होंगे। उन्होंने बताया कि सुवर्णरेखा बहुउद्देश्यीय परियोजना से पहले भी कई लोग गांव के लोग विस्थापित हुए है और आज इन गांवों में प्रशासन की ओर से कोई भी विकास कार्य नहीं चल रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व की परियोजनाओं से बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अपने गांव-घर को छोड़ कर पश्चिम बंगाल और असम जाने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने बताया कि इन गांवों के हजारों विस्थापित अपनी मांग को लेकर आज राजभवन के समक्ष धरना देने के लिए रांची पहुंचे है। झामुमो के ही चंपई सोरेन ने बताया कि 1980 के दशक में भी इस परियोजना पर काम शुरु हुआ था, तो स्थानीय लोगों के विरोध के कारण काम बंद कर दिया गया था, लेकिन इस बार सैन्य बल उतार कर निर्माण कार्य शुरु किया गया है,इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने यह इन दोनों विषयों को विपक्षी सदस्य सदन में कार्यस्थगन के बजाए ध्यानाकर्षण सूचना अथवा प्रश्नकाल में उठाये जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह दोनों विषय ऐसा नहीं है, जिस पर तुरंत सदन में चर्चा जरुरी हो।
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विपक्षी सदस्यों के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अडाणी समूह के साथ ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को लेकर जो एमओयू किये है, उसके तहत 25 प्रतिशत बिजली झारखंड को मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह विपक्षी सदस्यों को अनर्गल आरोप लगाकर सदन की कार्यवाही को बाधित नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य प्रतिदिन अलग-अलग मुद्दा उठाकर कर सदन की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी सदस्य की ओर से कोई मुद्दे को सदन में उठाया जाता है, तो सरकार उस पर विचार करने को तैयार है, विपक्ष से ज्यादा जनता की चिंता सरकार को है, क्योंकि राज्य की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया है। मुख्यमंत्री ने विपक्षी सदस्यों को यह भी सलाह दी कि हर मुद्दे पर वोट की राजनीति नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य के बाद विपक्षी सदस्य हो-हंगामा करते हुए आसन के निकट आ गये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही मुख्यमंत्री ने स्पीकर से आग्रह किया कि इस तरह हंगामा जारी रहता है, तो एक दिन दिन में गिलोटिन के माध्यम से बजट पारित कर सदन बंद कर दें(अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दें)।
विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे की वजह से विधानसभा अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही अपराह्न 12बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दुबारा सभा की कार्यवाही शुरु होने पर भी विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और हंगामे के बीच ही कार्मिक विभाग के प्रभारी मंत्री सरयू राय ने झारखंड लोक सेवा आयोग,जेपीएससी का वार्षिक प्रतिवेदन सभा पटल पर रखा, वहीं प्रभारी ऊर्जा मंत्री सी.पी. सिंह ने 22.76 अरब रुपये की अनुदान मांग को पेश किया, वहीं झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव ने अपना कटौती प्रस्ताव पेश किया।

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