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सीएम ने छह मामलों में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिये
मुख्यमंत्री जन संवाद के तहत सीधी बात कार्यक्रम में20 मामलों की हुई समीक्षा

रांची,30दिसंबर। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि राज्य में अब लूट की छूट किसी को नहीं मिलेगी। सरकारी धन से होनेवाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दास आज सूचना भवन स्थित सभागार में “सीधी बात” कार्यक्रम में आम लोगों की शिकायतें सुन रहे थे।
इस क्रम में पाकुड़ के हिरणपुर प्रखंड से यह शिकायत आयी कि दुलमीडांगा गांव में रैयती तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य पंचायती राज पदाधिकारी के द्वारा करवाया जा रहा था। योजना की प्राक्कलित राशि- 9,43,200ध्- रुपये है। ग्रामीणों के अनुसार इस कार्य में मात्र 1-2 लाख रुपये का ही कार्य करवाया गया है। अलग-अलग 9 किस्तों में कुल 8,86,380ध्- रुपये की निकासी की गयी, जिले से प्राप्त प्रतिवेदन में भी इस बात को स्वीकार किया गया है कि इस कार्य में अनियमितता बरती गयी है और मापी पुस्तिका के हिसाब से मात्र 5,55,780ध्- रुपये का ही काम किया गया और 3,30,600ध्- रुपये कि फर्जी निकासी कर ली गयी है। मुख्यमंत्री श्री दास ने जब पाकुड़ के उपायुक्त से जवाब मांगा, तो उन्होंने कहा कि चूंकि जांच कमेटी जब गयी थी, तब तालाब में पानी भरा था, इसलिए मापी नहीं की गयी। उन्होंने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
रांची स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में सामुदायिक विकास सलाहकार के पद पर कार्यरत किम्मी प्रसाद कुमारी ने बताया कि प्रभारी प्राचार्य उमेश कुमार ने उन्हें प्रताडघ्ति किया है। आरोप यह भी था कि इससे पहले भी वह तीन अन्य महिलाओं को प्रताडघ्ति कर चुके हैं, लेकिन विभाग ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर मुख्यमंत्री ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव को गहन जांच कर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने सचिव से कहा कि जो कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुर्व्यहार करते हैं। ऐसे लोगों के ही कारण राज्य की छवि खराब होती है।
जामताड़ा से राजेश मंडल की शिकायत थी कि उन्हें नेत्रहीन होने के बावजूद विकलांगता पेंशन नहीं दिया जा रहा है। शिकायत के बाद अधिकारियों ने सूचित किया कि श्री मंडल के खाते में पेंशन का पैसा डाल दिया गया है। चतरा से शिकायत थी कि नगर परिषद् के अध्यक्ष जमुना प्रसाद के द्वारा पानी टंकी और कूड़ेदान की खरीदगी में अनियमितता बरती गयी है। इस आरोप पर जिले के अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जांच की गयी और पाया गया कि जितनी सामग्री खरीदी गयी है, उसकी गुणवत्ता उच्च स्तरीय है।
देवघर से आये नयनकांत पाठक को सेवानिवृत्ति के बाद बयाज सहित पूरी राशि का भुगतान करने का आदेश मुख्यमंत्र्ाी श्री दास ने दिया। निरसा (धनबाद) से आये एक शिकायतकर्ता ने फुटपाथ दुकानदारों का मामला उठाया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके इलाके के अंचल अधिकारी रिश्वत मांगते हैं। जिले के उपायुक्त ने जानकारी दी कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर मुख्यमंत्री श्री दास ने शिकायतकर्ता और उपायुक्त को बैठकर समाधान निकालने का निर्देश दिया।
दुमका, गिरिडीह और लोहरदगा जिलों से बिजली की समस्या से जुड़ी चार शिकायतें मुख्यमंत्र्ाी के समक्ष रखी गयीं। सभी मामलों में शिकायतकर्ता खुद उपस्थित हुए और ट्रांसफार्मर के जले होने तथा लो वोल्टेज के कारण पेय जल की सप्लाई नहीं होने से जुड़ी अपनी समस्याएं रखीं। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेश श्री राहुल पुरवार से मुख्यमंत्र्ाी ने खुद इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया।
गढ़वा से आये शिकायतकर्ता सुखदेव राम ने बताया कि परिहारा गांव के चौकीदार मुंद्रिका पासवान के द्वारा गांव के कई लोगों पर फर्जी मुकदमा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच डीआईजी स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया। गिरिडीह के स्वर्गीय किटी रविदास के पारिवारिक पेंशन का मामला भी कार्यक्रम में रखा गया। इस पर शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि दिसंबर तक का पैसा कल ही दे दिया गया है। लोहरदगा से शिकायत थी कि भरगांव पंचायत के पूर्व मुखिया- प्रकाश उरांव और जल सहिया के द्वारा वर्ष 2011-12 से पंचायत में शौचालय का निर्माण करवाया जा रहा है, जिसमें शौचालय निर्माण में घटिया किस्म की मैटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री दास ने जिले के उपायुक्त से कहा कि वे खुद जाकर इसकी जांच करें। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण की जांच के लिए टीम गठित करना पड़े, तो यह दुख की बात है।
इसके अलावा खूंटी की नीलकमल हांसदा ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने पिता के पेंशन की मांग रखी। उसने बताया कि स्वर्गीय हांसदा बिरसा कॉलेज में मुंडारी भाषा के प्राध्यापक थे। वे 2009 में सेवानिवृत्त हुए और पेंशन की आस में ही 2011 में उनकी मृत्यु हो गयी। मुख्यमंत्री ने विभाग से तत्काल उनके परिवार को पेंशन देने का निर्देश दिया। विभाग की ओर से कहा गया कि 4 जनवरी के बाद पेंशन चालू करवा दिया जायेगा।
हजारीबाग से आये सुरेंद्र सिंह ने बताया कि एक तालाब के गहरीकरण के कार्य में 50 मजदूरों को लगाया गया और काम 12 दिन चला, लेकिन प्रखण्ड कार्यक्रम पदाधिकारी और रोजगार सेवक के द्वारा मात्र 19 मजदूरों को भुगतान किया गया। इस पर मुख्यमंत्री ने जिले के उपायुक्त से कहा कि वे मजदूरों से मिलकर उनकी मजदूरी का भुगतान कराएं।
पश्चिमी सिंहभूम से आये अवकाशप्राप्त फौजी लालजी राम तियु ने शिकायत की कि उन्हें बैंकों के द्वारा कर्ज नहीं दिया जा रहा है। इस पर संबंधित बैंक अधिकारी से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि बैंक अपनी सामाजिक जिम्मेवारी का निर्वहन करें। अगर आदिवासियों-गरीबों को लोन देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका नहीं दिया जायेगा, तो उनका भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा। श्री दास ने कहा कि लोग व्यवस्था से तंग आकर उग्रवाद के रास्ते पर चल निकलते हैं। उन्होंने बैंकों के साथ एक बैठक आयोजित करने का निर्देश विभागीय सचिव को दिया।
सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष एक पत्रकार सह पारा शिक्षक का मामला भी आया। एक गुमनाम शख्स ने शिकायत की थी कि लातेहार जिले के बालूमाथ स्थित चेताग गांव के उत्क्रमित मध्य विद्य्नालय, बरहनिया खांड़ में कार्यरत पारा शिक्षक रमेश पाण्डेय विद्य्नालय से हमेशा अनुपस्थित रहते हैं। ये प्रखण्ड स्तर पर एक समाचार पत्र के पत्रकार भी हैं। पत्र्ाकार होने के कारण दबंगई भी दिखाते हैं, जिसके डर से इनके विरुद्ध कोई कुछ नहीं बोलता है। इनके घर में दो-पहिया वाहन है। इनका परिवार आर्थिक रुप से सम्पन्न है, इसके बावजूद इनका नाम बीपीएल की सूची में है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस शिक्षक सह कथित पत्रकार का नाम तत्काल बीपीएल सूची से हटायी जाए। जिले के अधिकारियों ने कहा कि पारा शिक्षक के पद से उन्हें बर्खास्त करने का आदेश निर्गत कर दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री श्री दास ने कहा कि पत्र्ाकार बिरादरी को बदनाम करनेवालों को मीडिया चिह्नित करे। एक-दो लोगों के कारण पूरा पत्रकार जगत बदनाम होता है। मुख्यमंत्रीदास ने अपेक्षा की कि ऐसे मामलों को मीडिया को जरुर प्रकाशित करना चाहिए।
शिकायतों को नजरअंदाज न करें अधिकारी
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज सीधी बात कार्यक्रम के समापन के पश्चात अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि सत्ता संभालने के साथ ही उन्होंने जनता से वादा किया था कि जवाबदेह, पारदर्शी और जिम्मेदार प्रशासन देंगे। इन तीनों को जोड़ दिया जाये, तो सुशासन सामने आता है। जन संवाद के माध्यम से राज्य की जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान चाहती है। ऐसे वक्त में अधिकारियों को बेहद संवेदनशीलता के साथ जन समस्याओं का निबटारा करना होगा। अधिकारी-कर्मचारी शिकायतों को नजरअंदाज न करें। जनता जब 181 पर फोन करती है, तो उसकी कुछ उम्मीदें होती हैं। हम एक संवेदनशील प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध हैं। जब हम आम लोगों की समस्याएं दूर करेंगे, तो जनता का शासन पर विश्वास बढ़ेगा। शासन को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य है और वर्ष 2016 में इसे और प्रभावी तरीके से अंजाम भी दिया जायेगा।
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