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मृत छात्रा के माता-पिता ने प्रधानमंत्री से मांगी इच्छा मृत्यु की इजाजत
रांची,20जुलाई। भाजपा सरकार के अच्छे दिन और सरकार के पुलिस प्रशासन का स्वच्छ व पारदर्शी न्याय का नारा झारखण्ड में झूठा साबित हो रहा है । झारखण्ड में अपराधियों की जड़ इस कदर मजबूत है कि दो साल बीत जाने के बाद भी आज तक चतरा की होनहार बेटी को न्याय नहीं मिल पाया है । अपनी इकलौती बेटी विदिशा को खोने के बाद उसके हत्यारों को सजा दिलाने के लिए दो साल से भाग-दौड़ व परेशान होकर थक चुके इस लाडली के माता-पिता भी अब अपनी इच्छा मृत्यु की माँग प्रधानमंत्री से करने लगे है ।
चतरा जिला मुख्यालय के एक बंगाली दम्पति की इस वेदनाभरी मांग आज देश के न्यायिक इतिहास में एक काला अध्याय जोड़ने के लिए काफी है। आज केन्द्र के साथ-साथ झारखण्ड प्रदेश में भाजपा की बहुमत की सरकार है और यहाँ सरकार लगातार विधि-व्यवस्था सु॰ढ़ करने की दावे करने में लगी है। किन्तु चंद सरकारी नुमाइंदों के ही क्रियाकलापों व कारगुजारियों के कारण आज ये सरकार की घोषणाए खोखली साबित हो रही है,वहीं लोगों का ऐसी न्याय प्रक्रिया से विश्वास भी उठता चला जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण इन दिनों सूबे के सबसे पिछघ जिला चतरा में देखने को मिल रहा है,जहाँ अपनी मृत मासूम बच्ची के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए सरकारी तंत्र्ा का चक्कर लगाते थक चुके उसके पापा-मम्मी ने आज खुद अपनी मौत की मांग देश के प्रधानमंत्र्ाी नरेंद्र मोदी से कर डाली है।
घटना 13 सितम्बर 2013 की है जब झारखण्ड की राजधानी रांची के बरियातू
स्थित हाई क्यू इंटरनेशनल नामक स्कूल के दसवीं की एक छात्रा चतरा जिले के जतराहीबाग मुहल्ला निवासी विकास रॉय की इकलौती वारिस विदिशा रॉय की हत्या बलात्कार के बाद गला दबाकर दबाकर स्कूल के ही होस्टल में कर दी गई थी। इस जघन्य घटना के खिलाफ स्कूल कैम्पस के साथ-साथ पूरे प्रदेश स्तर पर लोगों ने आंदोलनरत होकर अपना रौद्र रुप भी दिखाया था ।
विदिशा के मां-बाप ने अपनी लाडली मासूम बेटी को बेहतर शिक्षा देने के लिए रांची के एक नामी गिरामी स्कूल में दाखिला दिलाया था, सोचा था कि पढ़ लिख कर वो एक कामयाब इंसान बनेगी। कमोबेश विदिशा मां-बाप के अरमानों को पूरा करने के लिए वह मेहनत भी खूब कर रही थी द्य्न लेकिन 13 सितम्बर 2013 को अचानक उसके माँ-बाप को मिली उसकी मौत की खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया।शुरु में तो स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें बताया गया कि उसने खुदकुशी की है,परन्तु एक दिन बाद इस केस में यू टर्न आ गया। घरवालों का इल्जाम था कि उनकी लाडली का कत्ल हुआ है । हाई क्यू इंटरनेशनल एकेडमी की छात्रा विदिशा की मौत का रहस्य गहराता जा रहा था। कल तक जहां इसे खुदकुशी करार दिया जा रहा था,वहीं आज यह पूरा मामला हत्या में तब्दील हो गया है । दरअसल घरवालों का सीधा आरोप था कि उसकी बेटी कि यौन शोषण के बाद हत्या की गई है तथा इस हत्याकांड में कोई और नहीं स्कूल का चेयरमैन सह प्रिंसिपल हरिनारायण चतुर्वेदी स्वयं शामिल है। वहीं दूसरी ओर रांची रिम्स ने भी अपने द्वारा जारी पोष्टमार्टम रिपोर्ट में उसके साथ बलात्कार के बाद हत्या किये जाने की मुहर लगा दी थी।
घरवाले विदिशा की मौत की जांच सीबीआई से कराने की बात कह रहे थे,ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इसके लिए पूर्व में भी उसके परिजनों व चतरा के साथ अन्य जिलों के तमाम राजनैतिक व सामाजितक कार्यकर्त्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन कर चुके हैं । इस मामले ने जब तुल पकड़ना शुरु किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी किरकिरी होती देख विदिशा के परिजनों से मुलाकात कर सीबीआई जांच करवाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजवाने का आश्वासन दिया था।लेकिन हेमंत सरकार के पतन के साथ ही ये मुद्दा भी हत्यारों की पैरवी के आगे दम तोड़ दिया। हत्यारों की पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तब प्रधानमंत्री कार्यालय से कार्रवाई की चिट्टी झारखण्ड सरकार को मिलने के बाद भी आजतक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये दम्पति इन्साफ की गुहार लेकर राज्यपाल के अलावा सभी अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर भी लगा चुके है। जिसके बाद हार-थककर बंगाली दम्पति ने इच्छा मृत्यु का फैसला लिया।
प्रदेश में रघुवर सरकार के सत्ता में आने के बाद विदिशा के परिजनों को इन्साफ की आस दिखी थी,लेकिन रांची पुलिस के रवैये ने उनके उम्मीदों को चकनाचूर कर रख दिया। बहरहाल रघुवर सरकार व रांची पुलिस मामले में अब क्या कदम उठाती है ये तो आने वाला समय ही बताएगा । हालांकि इस बात से इंकार नहीं की जा सकती की अगर मामले में कोई कठोर कदम अविलम्ब नहीं उठाया गया तो वो दिन दूर नहीं जब विदिशा के माता-पिता की तरह ही तमाम लोगों का पुलिस व सरकारी तंत्र से भरोसा उठ जाएगा । विदिशा की मौत ने अपने पीछे कई ऐसे अनसुलझे सवाल छोड़ गया है,जिसमे साजिश की बू आती साफ दिखती हैं।
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