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विरासत में ट्रेन पटरी से उतरी मिली थी,अब एक्सप्रेस बनाःजयंत सिन्हा
भारत में टैक्स जीडीपी सिर्फ 10 प्रतिशत,दूसरे देशों में यह 20 प्रतिशत से ज्यादा
विधायकों की क्षमता संवर्द्धन पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न
रांची,5जुलाई। केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि वित्तीय प्रबंधन के मौलिक सिद्धांतों के अनुसरण के लिए सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि सबका साथ और सबका विकास की पगडंडियों पर चलकर बजट का प्रारुप तय करे। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए अंत्योदय सिद्धांत पर काम करने की आवश्यकता है। वे आज स्थानीय श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान के सभागर में आयोजित विधायकों की क्षमता संवर्द्धन एवं लोक वित्त प्रबंधन विषय पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र के मौके पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि केन्द्र में मई 2014 में जब सरकार बनी थी तो विरासत के रुप में पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतरी हुई थी जिसे अब एक्सप्रेस बनाया गया है। बीते दस सालों में पूर्व की सरकारों ने रेलवे की कुल 99 योजनाओं की घोषणा की थी जिसमें मात्र तीन योजनाओं को ही पूरा किया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की तरक्की का आधार वित्तीय प्रबंधन होता है। आंकड़ों की नजर से देखें तो आज भी केन्द्र सरकार का खर्च 18 लाख करोड़ है जबकि कमाई विभिन्न स्रोतों से मात्र 12.5 लाख करोड़ है, मतलब साफ है कि 5.5 लाख करोड़ के घाटे का बजट है। कुल खर्च में से करीब 4.5 लाख करोड़ सिर्फ ब्याज पर भुगतान किया जाता है।
केन्द्र सरकार की उपलब्धियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लोगों तक सुविधायें पहुंचाना चाहती है लेकिन आर्थिक परेशानियां जो विरासत में मिली हैं, उन्हें सुधारने में परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। एक साल के कालखंड में केंद्र सरकार ने आर्थिक माहौल बनाने की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाये गये हैं। जन-धन योजना के तहत पूरे देश में 14-15 करोड़ लोगों के खाते खोले गये हैं ताकि बिचौलियों की भूमिका को खत्म किया जा सके।
टैक्स स्लैब के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश में टैक्स जीडीपी सिर्फ 10 प्रतिशत है जबकि दूसरे देशों में यह 20 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी वजह से नीतियां बनाने में सरकार को परेशानी आती है। उन्होंने कहा कि इकॉनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए इस दिशा में काम हो रहा है। झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग में केंद्र सरकार ने राज्य के हिस्सेदारी को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया है साथ ही आइसीडीएस और बीआरजीएफ समेत कई योजनाओं को राज्यों को सौंपा दिया है ताकि वह अपने भौगोलिक माहौल के अनुकुल इनका क्रियान्वयन करा सकें। राज्य का बजट 55 हजार करोड़ रुपये का है लेकिन राज्य में टैक्स के रुप में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का ही संग्रह हो रहा है। सरकार को चाहिए कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में राजस्व में बढ़ोतरी करे।
जयंत सिन्हा ने कहा कि समाज के अन्तिम व्यक्ति को अगर लाभ पहुंचाना है तो डिलेवरी सिस्टम को दुरुस्त करना होगा। जनता की बुनियादी समस्याएं मसलन, बिजली, पानी और सड़क की आधारभुत ढांचे को दूरुस्त करना होगा। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार जन-धन योजना के साथ डायरेक्ट ट्रांसफर का सिस्टम डेवलप करने जा रही है। साथ ही जब पूरे देश में 1 अप्रैल 2016 से जीएसटी लागू हो जायेगा तो राज्यों को सर्विस टैक्स की राशि में से भी हिस्सेदारी मिल सकेगी।
शोध एवं प्रशिक्षण कोषांग की स्थापना शीघ्र
विधानसभा के अध्यक्ष प्रो. दिनेश उरांव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विधायिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए जल्द ही शोध एवं प्रशिक्षण कोषांग की स्थापना विधानसभा में की जायेगी। उन्होंने कहा कि जिस वक्त झारखंड राज्य का गठन हुआ था उस वक्त 2001-02 का बजट सरप्लस था लेकिन आज का बजट घाटे का है। निश्चित रुप से आत्मचिंतन करने की जरुरत है। संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन एक सजग प्रहरी के तौर पर सभी विधायकों, मंत्री और कार्यपालिका को करनी होगी। श्री उरांव ने कहा कि अनुभव प्राप्त करने की कोई उम्र और समयसीमा नहीं होती है। यह खुशी की बात है कि जिस एटीआई में प्रशासनिक स्तर के पदाधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर राज्य और देश की योजनाओं को आगे ले जाने का काम करते हैं, उसी प्रकार आज विधायकों ने भी दो दिनों की कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त किया है जो झारखंड के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साबित होगा।
कार्यशाला के समापन दिवस के द्वितीय सत्र में वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा के क्रम में कहा कि झारखंड को अगर विकास की राहों पर ले जाना है तो व्यय और राजस्व दोनों को बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड का बजट छतीसगढ़ के बजट से काफी पीछे है जिसे बढ़ाने की जरुरत है। माइंस के क्षेत्र में भले ही झारखंड छत्तीसगढ़ के बराबर हो लेकिन वाणिज्यकर के मामले में आज भी काफी पीछे है। केन्द्रीय करों में हिस्सेदारी को बढ़ाकर भले ही 32 प्रतिशत से 42 प्रतिशत कर दिया गया हो किन्तु केन्द्र प्रायोजित योजनाओं में केन्द्रीय अनुदान को खत्म किया जा रहा है।
अमित खरे ने कहा कि व्यवस्था और प्रक्रिया में योजनाएं उलझकर रह जाती हैं जिसका सरलीकरण करना अत्यावश्यक है। योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विकेन्द्रीकरण होना चाहिए इसलिए इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट लाने की जरुरत है। इस बार सितंबर माह से बजट निर्माण की प्रक्रिया शुरु की जायेगी और प्रमंडलवार विचार आमंत्रित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि खर्च के प्रबंधन के सुधार के लिए अलग -अलग खातों में राशि रखने की पंरपरा को खत्म किया जाना चाहिए।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं आद्री के सदस्य सचिव शैवाल गुप्ता ने कहा कि राज्य में फाउंडेशन कोर्स ऑफ झारखंड की कार्यशाला का आयोजन भी करने की जरुरत है ताकि जनप्रतिनिधियों को विधानसभा क्षेत्र के मूलभुत समस्याओं के निदान की विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि हम संस्कृति में बदलाव लाकर ही आर्थिक विकास के रास्तों को प्रशस्त कर सकते हैं। लोग अगर बिजली का उपभोग करते हैं तो उनके अंदर बिजली बिल के भुगतान करने की आदत डालने की जरुरत है। झारखंड को आंध्र प्रदेश की तर्ज पर विशेष राज्य का दर्जा देने की उन्होंने बात कही।
कार्यशाला में कोल्हान विश्वविद्य्नालय के उपकुलपति प्रो. आर. पी. सिंह, रांची विश्वविद्य्नालय के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डा. रमेश शरण, आद्री के सदस्य सचिव प्रो. शैवाल गुप्ता, डी.पी.ए.जी सुविमल मुखोपाध्याय ने वित्तीय प्रबंधन विषय पर अपने विचार रखे।
कार्यशाला में मुख्य रुप से संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय, खेल मंत्री अमर कुमार बाउरी, शिक्षा मंत्री नीरा यादव, समाज कल्याण मंत्री लुईस मरांडी, पेयजल एंव स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी सहित विधायक बादल पत्र्ालेख, विधायक कुणाल षांड़ंगी, विधायक अरुप चटर्जी, विधायक योगेश्वर महतो, विधायक नवीन जायसवाल, विधायक विरंची नारायण, विधायक अनंत ओझा, विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता सहित कई विधायकगण उपस्थित थे।
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