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स्थानीय नीति पर सभी दल सुझाव दें,मानसून सत्र में लेंगे निर्णयःसीएम
स्थानीयता के प्रारुप पर कई दिलों ने असहमति जतायी
रांची,31जुलाई। स्थानीयता नीति के प्रारुप में आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में कई दलों ने अपनी आपत्ति जतायी और अपने-अपने दल की ओर से सरकार के समक्ष सुझाव रखें। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सभी दल लिखित रुप में अपना सुझाव दें, सरकार चलते मॉनसून सत्र में स्थानीयता के मसले पर निर्णय लेगी।
सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बैठक में सरकार की ओर से गठित समिति के प्रारुप पर लगभग सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखें। उन्होंने बताया कि बैठक में विभिन्न दलों की ओर से बताया गया है कि समिति के प्रारुप पर कई त्रूटियां है और रिपोर्ट पर असहमति जतायी गयी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में सभी दलों के प्रतिनिधियों की ओर से लिखित रुप से सुझाव मांगे गये है और जो सुझाव आएंगे, उनसभी विचारों को समाहित करते हुए सरकार नीति पर फैसला करेगी। उन्होंने बताया कि सुझाव आने के बाद इसी सत्र में सदन में सरकार निर्णय लेगी। हेमंत सोरेन ने बताया कि दो दिनों के अंदर सभी दलों को लिखित सुझाव मांगा गया है, सभी दलों की ओर से लिखित सुझाव आने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार किया जाएगा और सदन में चर्चा के बाद सरकार इस मसले पर निर्णय लेगी।
इस बैठक में झामुमो की ओर से विनोद पांडेय व अशोक कुमार सिंह, कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत,भाजपा की ओर से विधायक बड़कुंवर गगराई, राजद के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह, आजसू पार्टी के डॉ.देवशरण भगत, झाविमो के राजीव रंजन प्रसाद, भाकपा-माले के भुवनेश्वर केवट , भाकपा के राज्य सचिव भुवनेश्वर मेहता, मासस की ओर से शीतल ओहदार, माकपा के राज्य सचिव गोपीकांत बख्शी और जदयू की ओर से एनके झा ने अपने-अपने विचार रखें।
सरकार गंभीर नहीं, सिर्फ आई-वॉश हैःदेवशरण भगत
आजसू पार्टी के वरिष्ठ नेता देवशरण भगत ने कहा है कि स्थानीयता के मसले पर राज्य सरकार गंभीर नहीं है और आज बुलायी गयी बैठक सिर्फ आई-वॉश है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आहूत बैठक में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में देवशरण भगत ने कहा कि इस मसले पर सरकार न तो गंभीर है और न ही कोई फैसला ले पायी है, सिर्फ आगामी विधानसभा चुनाव के पहले वातावरण तैयार करने के लिए सरकार ने यह बैठक बुलायी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति के प्रारुप में स्थानीयता के मसले पर मूलवासियों और झारखंडवासियों के लिए अलग-अलग परिभाषा तय की गयी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरा प्रारुप पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का हुबहू नकल है।
उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी की यह स्पष्ट मांग है कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में यहां के लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर मूलवासियों के लिए खतियान और तीन पीढ़ी झारखंड में रहने का प्रमाण देना होगा,वहीं झारखंडवासियों के लिए सिर्फ यहां पैदा लेना, पढ़ाई व नौकरी ही अर्हता रखा गया है, यह मूलवासियों के साथ अन्याय होगा,क्योंकि यहां रहने वाले कई मूलवासियों के पास खतियान मिलना मुश्किल है। इसलिए पार्टी का यह स्पष्ट मानना है कि आपसी सौहार्द व सामंजस्य के तहत स्थानीय नीति लागू किया जाए और अलग झारखंड राज्य के संघर्ष के सपने को साकार किया जाए।
सभी दलों से सुझाव मांगा गयाःराजेंद्र प्रसाद सिंह
कांग्रेस विधायक दल के नेता व मंत्र्ी राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि आज मुख्यमंत्र्ी की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए गठित समिति के प्रारुप पर विचार किया गया। उन्होंने बताया कि कई नेताओं ने सुझाव दिये है, कार्मिक विभाग को सभी दलों का लिखित सुझाव लेकर सरकार को अवगत कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी बिन्दुओं पर विचार करने के बाद इस पर निर्णय लेगी।
बिहार सरकार के निर्णय को लागू करेंःगिरिनाथ सिंह
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह ने कहा है कि तृतीय और चतुर्थ वर्गाें की सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के लिए एकीकृत बिहार में ही 1982 में निर्णय लिये गये थे, उस वक्त कर्पूरी ठाकुर के कार्यकाल जो प्रारुप बनाया गया था, झारखंड में भी उसे ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिम जनजाति वर्ग के 8वीं व 10वीं पास युवक-युवतियों की भी सीधी नियुक्ति होनी चाहिए। इस पर सभी दलों में सहमति है।
सभी को न्याय मिलेंःबड़कुंवर गगराई
रांची,31जुलाई। भारतीय जनता पार्टी विधायक बड़कुंवर गगराई ने कहा है कि स्थानीय नीति में सभी को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों और कानून के मुताबिक नीति बनायी जानी चाहिए, 14वर्ष के कार्यकाल में पहली बार प्रारुप सामने आया है, यदि सिर्फ इसे राजनीति के लिए लाया गया ै, तो पार्टी इसका विरोध करेगी और जनहित में लाया गया है, तो समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में 1982 में स्थानीय नीति लागू किया गया थ,उसे ही लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय नीति के तहत यहां के मूलवासियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
स्थानीय नीति पर सरकार कतई गंभीर नहींःराजीव रंजन
झारखंड विकास मोर्चा के महासचिव राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि राज्य सरकार स्थानीयता के मसले पर कतई गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर लगातार बैठक बुलाने की बात सरकार करती रही और टालमटोल के बाद आज बैठक बुलायी, वह भी एक घंटे बाद शुरु हुआ, इससे सरकार की गंभीरता का पता चलता है। उन्होंने बताया कि जो प्रारुप तय किया गया है, वह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ की नीति का नकल है और उसे अक्षरशः उठा लिया गया है। झाविमो नेता ने कहा कि पार्टी का यह मानना है कि स्थानीय नीति के माध्यम से यहां रह रहे लोगों की जनआकांक्षा पूरी होनी चाहिए।
जिला को आधार बनाया जाएःभुवनेश्वर मेहता
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा है कि 1981582 में स्थानीयता को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था और उस वक्त तृतीय और चतुर्थ वर्ग की सरकारी नौकरियों में जिला को ही आधार बनाया गया था,इसे ही आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड वर्षाें से उपेक्षित रहा है, यहां के लोगों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिम जनजाति के 8वीं व 10वीं पास युवक-युवतियों को नौकरी मिलनी चाहिए,इस पर सभी ने सहमति जतायी है।
जनता फिर ठगी की शिकारःकेवट
भाकपा-माले के भुवनेश्वर प्रसार केवट ने कहा है कि झारखंड की जनता एक बार फिर ठगी की शिकार हुई है।उन्होंने कहा कि बैठक में पार्टी की ओर से सारे पक्षों से सरकार को अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य एक बड़े आंदोलन से हासिल हुआ और यह राज्य 14वर्षाें बाद भी पिछड़ा हुआ है,इसलिए पार्टी का यह स्पष्ट मानना है कि यहां के लोगों को तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में प्राथमिकता मिलें। उन्होंने कहा कि वर्ष 1951-52 के जनगणना को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मूलवासी व झारखंडवासी जैसे शब्द को पार्टी खारिज करती हैःविनोद पांडेय
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता विनोद पांडेय ने कहा है कि स्थानीयता के मसले पर सरकार द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट में मूलवासी और झारखंडवासी जैसे शब्द को पार्टी एक सिरे से खारिज करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का यह मानना है कि स्थानीयता नीति को स्पष्ट रुप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि तृतीय और चतुर्थ वर्ग की सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और इस संबंध में झामुमो की ओर से दो दिनों के अंदर लिखित सुझाव सरकार को उपलब्ध करा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी स्थानीय नीति के प्रारुप को लेकर जो भाषा का प्रयोग किया गया है, उसे झामुमो खारिज करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मसले पर सर्वमान्य हल निकाला चाहिए और उच्च न्यायालय के पूर्व के आदेश को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
न्यायिक आयोग गठित होःगोपीकांत बख्शी
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव गोपीकांत बख्शी ने कहा है कि मूलवासी और झारखंडवासी के नाम पर विभाजन की कोशिश की गयी है। उन्होंने कहा कि प्रारुप न तो संविधान और न ही कानूनी रुप से सही है। उन्होंने कहा कि झारखंड की तुलना छत्तीसगढ़ से नहीं की जा सकती है, राज्य में सीएनटी व एसपीटी एक्ट लागू है, यह किसी दूसरे राज्य में नहीं है,इसकी एक विशेष पहचान है। उन्हांेने मांग की कि स्थानीयता के प्रारुप को तय करने के लिए न्यायिक आयोग गठित हो और कमेटी छह महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट दें, तब तक तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलें।
प्रारुप में संशोधन जरुरीःमासस
मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के वरिष्ठ नेता सुशांतो मुखर्जी और शीतल ओहदार ने आज स्थानीयता के मसले पर पार्टी की राय से सरकार को अवगत कराया। पार्टी नेताओं ने समिति द्वारा तैयार प्रारुप में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया है। पार्टी ने स्थानीयता पर कट ऑफ डेट 1950रखे जाने की वकालत की है।
समिति का प्रारुप खतरनाकःजदयू
जनता दल यूनाईटेड के वरिष्ठ नेता एन.के.झा ने स्थानीय नीति के प्रारुप को खतरनाक बताया है। उन्होंने बताया कि इस प्रारुप में झारखंडवासी और मूलवासियों की अलग-अलग व्याख्या की गयी है, इससे फिर से वही स्थिति उत्पन्न होगी, जिस तरह से बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में विवाद हुआ था। उन्होंने समता के आधार पर नीति बनाये जाने की वकालत की।
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