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रोजगार सेवक की नौकरी छोड़ कर मधु हांदसा ने फूलों की खेती को बनाया आजीविका का साधन
सिंचाई की सुविधा ने महिलाओं की बदली तकदीर, सामूहिक खेती से आत्मनिर्भरता
रांची। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड की प्रगतिशील किसान मधु हांसदा ने रोजगार सेवक की नौकरी छोड़ कर फूलों की खेती को आजीविका साधन बनाया है। वहीं अगर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कर दी जाए तो झारखंड के मेहनतकश किसान पहाड़ में भी सोना उगा सकते हैं। इसका उदाहरण है लोहरदगा जिले का एक सुदूरवर्ती आदिवासी गांव उदरंगी। जबकि हिजला गांव में ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग और अपने मेहनत के दम पर महिला समूह खेती किसानी मे हाथ आजमा कर आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद तैयार करने में जुटी है।
सिंचाई की सुविधा ने महिलाओं की बदली तकदीर
सिंचाई की अगर समुचित व्यवस्था कर दी जाए तो झारखंड के मेहनतकश किसान पहाड़ में भी सोना उगा सकते हैं। इसका उदाहरण है लोहरदगा जिले का एक सुदूरवर्ती आदिवासी गांव उदरंगी। वर्ल्ड बैंक द्वारा संपोषित जोहार परियोजना के तहत लोहरदगा के भंडरा के उदरंगी गांव में बहने वाली नदी के पानी को लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से वीरान भूमि पर लाया गया और फिर ये हरियाली विकास की कहानी बताने के लिए काफी है। दो साल पहले यहां दर्जन भर महिलाओं ने विकास आजीविका किसान उत्पादक समूह बनाया और आज सैकड़ों महिला किसान इससे जुड़कर अपने आप को आत्मनिर्भर बनाने की राह पर चल पड़ी हैं। प्रमिला उरांव जैसी महिलाओं ने यहां पिछले दो सालों में विकास की नई इबारत लिखी है। प्रमिला का कहना है कि सिंचाई की सुविधा नहीं उपलब्ध रहने से साल में सिर्फ एक बार मक्का का फसल हो पाता था और शेष महीने काम की तलाश में बाहर जाना पड़ता था, लेकिन वर्षभर में तीन फसल होने से उनकी आमदनी बढ़ गयी और जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।
पहाड़ों और पठारों के बीच बसे इस गांव में सोलर के विकल्प ने महिलाओं के काम को और आसान कर दिया। खास बात यह है कि जल प्रबंधन से लेकर कृषि कार्य और बाजार तक की सारी व्यवस्था महिलाएं खुद संभालती हैं। दो साल पहले तक ये सिर्फ एक फसल उपजा पाते थे वो भी मानसून के बारिश के भरोसे लेकिन आज यहां सालों भर खेतों में फसलें लहलहाने लगी हैं।
सामूहिक खेती से आत्मनिर्भरता
सरकारी मदद अगर जमीन पर पहुंचने लगे तो बदलाव और विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है। लोहरदगा जिला के हिजला गांव में ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग और अपने मेहनत के दम पर महिला समूह खेती किसानी मे हाथ आजमा कर आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद तैयार करने में जुटी है। कई एकड़ में फैली ये हरियाली लोहरदगा जिले के दर्जनों गांव में महिलाओं की चेहरे पर खुशियां लाने का काम कर रही है। चाहे अनिता देवी हों या फिर मेरी उरांव सबने मिलकर सरकारी योजना का फायदा लिया और आज उन्हें सामूहिक खेती के जरिए अच्छी खासी आमदनी हो रही है।सामूहिक खेती में लगी राजमनी उरांव और रजनी उरांव ने बताया कि 25 महिलाओं के जरिए शुरू हुआ कारवां आज 70 तक पहुंच चुका है, जो समाहूकिता और एकता का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। इन महिलाओं ने यहां उत्म किस्म के पौधे तैयार किया और फिर खेतों में बेहतरीन पैदावार भी हासिल की।
महिलाओं के हौसले और मेहनत को उड़ान जोहर परियोजना से मिला। इलाके के प्रखंड परियोजना पदाधिकारी व्यास यादव ने बताया कि किस तरीके से इन महिलाओं को बीज, खाद से लेकर बाजार तक की वारीकियां सीखाई जा रही हैं। खेती किसानी आज रोजगार का एक अहम जरिया है। और अगर सरकारी मदद और प्रशिक्षण दे दिया जाए तो फिर गांव में पलायन तो रुकेगा ही ये महिलाएं नये भारत की ईबारत भी लिखने का काम करेंगी।
फूलों की खेती से प्रत्येक सप्ताह 10हजार रुपये की आदमनी
पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड के गोहला गांव की रहने वाले मधु ने स्नातक की पढ़ाई है। वे पूर्व में रोजगार सेवक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे बताते हैं रोजगार सेवक रहते हुए उन्होने समय निकालकर खेती-बाड़ी तथा बागवानी करना शुरू किया था जिसमें मन रमने के बाद उन्होने नौकरी छोड़कर पूरी तरह से अब संरक्षित फूलों की खेती पर अपना ध्यान केन्द्रित कर लिया है। प्रगतिशील किसान मधु हांसदा फूलों की खेती के लिए प्रशिक्षण भी प्राप्त हैं।मधु हांसदा कहते हैं कि जिला उद्यान पदाधिकारी श्री मिथिलेश कालिंदी के निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से उन्हें संरक्षित फूलों की खेती में आगे बढ़ने के लिए काफी बल मिला। इससे पूर्व वे अपने खेतों में पारंपरिक विधि से धान की खेती किया करते थे जिससे कुछ विशेष आय नहीं होने पर इन्होने फूलों की खेती की तरफ रूख किया। जिला उद्यान विभाग की ओर से वर्ष 2019-20 में इन्होने शेडनेट प्राप्त कर जरबेरा की फूलों की खेती प्रारम्भ किया। इसके अलावा मेडिसिन एरोमैटिक एवं डेयरी टेक्नोलॉजी का भी प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं। वे अपने खेतों में सिंचाई हेतु ड्रीप इरीगेशन विधि का प्रयोग कर जरबेरा फूल का उत्पादन करते हैं। मधु बताते हैं कि इस विधि से सिंचाई करने पर एक ओर जहां पानी की बचत होती वहीं पौधों को भी पानी से प्राप्त होने वाले आवश्यक पोषण मिल जाता है। मधु हांसदा के शेडनेट से प्रति सप्ताह 2000 रुपये के फूल का उत्पादन फिलहाल हो रहा है , जिसे 4-5 रुपये प्रति फूल की दर से बाजार में विक्रय करते हैं। मधु बताते हैं कि फूलों की खेती से लगभग 10,000रुपये प्रति सप्ताह मुनाफा हो जाता है जिससे इनके परिवार की आर्थिक स्थिति में पूर्व की अपेक्षा बहुत सुधार हुआ है।
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