Connect with us

Latest News

‘पोटो हो’: हाथी पर चढ़कर आया था फांसी देने अंग्रेज अफसर, नाम सुनकर थर्राती थी अंग्रेजी फौज

Published

on

करीब दो सदी बाद ‘पोटो हो’ को हेमंत सोरेन ने दी सच्ची श्रद्धांजलि
रांची। ‘पोटो हो’, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से करीब 190 साल बाद इस शब्द को सुन महान क्रांतिकारी की आत्मा को इत्मीनान जरुर हुआ होगा कि उनकी शहादत साल-सखुआ के जंगलों से निकल 21वीं शताब्दी में भी याद की जा रही है । 1857 की क्रांति से पहले, उस जमाने में जब देश के बड़े राजाओं की बड़ी-बड़ी सेनाएं अंग्रेजों के आगे सिर झुका गुलामी को गले लगा रही थी उस दौर में आदिवासियों ने ना सिर्फ गुलामी की बेड़ियों को नामंजूर किया बल्कि अंग्रेजी सेना के दांत खट्टे किए ।

शहीद पोटो हो के नाम पर खेल योजना की शुरूआत करते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

एक तरफ थी उस दौर की आधुनिक हथियार से लैस दुनिया की सबसे ताकतवर सेना तो दूसरी ओर थे तीर-कमान के साथ प्रकृति के पुजारी । ‘पोटो हो’ को नई पीढ़ी भले ही भूल चुकी है, मगर आदिवासियों और मूलवासियों खासतौर से कोल्हान में इस महान क्रांतिकारी का नाम भगत सिंह के कमतर नहीं । कोल्हान विद्रोह की कहानी लंबी है इसलिए बात ‘पोटो हो’ और उनके साथियों की । 1820 में पहले कोल क्रांति के बाद अंग्रेजी हुकूमत और दिकुओं के खिलाफ जो आग लगी थी वो फौरी तौर पर भले ही बुझ गई हो लेकिन अंदर-अंदर ये धधक रही थी । जबरन टैक्स वसूली, शोषण के खिलाफ ‘हो’ ने बिगुल फूंक दिया था । कैप्टन विलकिंसन जो कि छोटानागपुर में अंग्रेजों को पॉलिटिकल एजेंट था उसने सिफारिश की थी कि कोल्हान में अंग्रेज खुद राज करें ना कि यहां के स्थानीय राजाओं को अधिकार दिया जाए । इसके पीछे कैप्टन विलकिंसन ने तीन तर्क दिए -1. 1821 में कर्नल रॉसेज और हो के बीच हुई संधि टूट चुकी थी, 2. हो समाज डायन प्रथा और निरक्षरता में जी रहा था और 3. मिशनरिज के जरिए आदिवासियों को बड़े पैमाने पर ईसाईकरण करना । शुरुआत में अंग्रेजों ने इसे नहीं माना लेकिन 1836 में कर्नल विलकिंसन को कोल्हान में डायरेक्ट एक्शन की इजाजत दे दी । 3 अक्टूबर 1836 को कंपनी के गवर्नर ने कोल्हान पर अटैक करने की मंजूरी दी थी । 18 नवंबर 1836 को विलकिंसन ने झांसा दे कर कुछ मानकी-मुंडा को सरायकेला से कोल्हान भेजा मगर बात नहीं बनी तो 3 दिसंबर 1836 को को दो टुकड़ी हो आदिवासियों को कुचलने के लिए रवाना किया । अंग्रेजों की सेना ने रास्ते में आते गए तमाम गांवों को तबाह करते हुए आगे बढ़ते गए , गांव के गांव खाली हो गए । अंग्रेजों ने अनाज और मवेशी लूट लिए ।
एक साल तक अंग्रेजी सैनिक आतंक मचाते रहे । सैकड़ों आदिवासियों की हत्या के बाद जैसे कुछ महीनों के लिए शांति हुई थी लेकिन इस बीच पोटो हो ने अपने साथियों के साथ रणनीति बनानी शुरु कर दी । अंग्रेजों से कोल्हान की धरती खाली कराने की जंग की शुरुआत होने ही वाली थी कि विलकिंसन को खबर लग गई कि जंगल में बड़ी संख्या में हो आदिवासी जंग की तैयारी कर रहे हैं , उन्होंने रसद इकट्ठा किया है । ‘पोटो हो’ को कैप्टन विलकिंसन पहले से ही जानता था । ‘पोटो हो’ इससे पहले अंग्रेजों की चंगुल से बचकर निकल चुके थे । पोटो हो के साथ उनके साथी नर्रा, बोरहा, पंडुआ,बुरारी जुल्म का बदला लेने की तैयारी में थे ।
‘पोटो हो’ की कहानी का लिखित दस्तावेज जो हमें मिलता है वो अंग्रेजों द्वारा तैयार किया गया इसीलिए ज्यादातर जानकारियां एकपक्षीय ही है हांलाकि किस्से कहानियों में ‘पोटो हो’ दो सदी से जिंदा है । इसमें कोई शक नहीं की पोटो हो की नेतृत्व क्षमता के अंग्रेज भी कायल थे । विलकिंसन की चिट्ठयियों और उस दौर के इतिहास से ये जानकारी मिलती है की पोटो हो आदिवासियों के बीच बेहद ही लोकप्रिय थे । अंग्रेजों के खिलाफ अपने लोगों को इकट्ठा करने की उनकी क्षमता शानदार थी । हजारों लोग पोटो हो की एक जुबान पर जान देने के लिए तैयार रहते थे । 1838 के आखिरी महीनों में पोटो हो ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक बड़ी पूजा की जिसमें अंग्रेजों को मात देने की मन्नत मांगी गई । गांव- गांव में तीर भेजकर युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया । पोटो हो बड़ा जनसमर्थन प्राप्त हुआ । ‘पोटो हो’ अपने सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतरीन रणनीतिकार, कुशल योद्धा थे । उन्हें अंग्रेजों की ताकत का पूरी तरह इल्म था इसीलिए ‘साहब लोगों को खत्म करो’ के मिशन की तैयारियां पूरजोर थी इसीलिए अंग्रेजों के आक्रमण से पहले जंगल में अनाज, बर्तन और जरुरी चीजें इकट्ठा कर ली थी .
कैप्टन विलकिंसन को इसकी खबर मिल रही थी । इसीलिए 12 नवंबर 1837 को खुद चाईबासा पहुंच गया । 17 नवंबर 1837 को विलकिंसन ने कैप्टन आर्मस्ट्रांग को पोटो हो की क्रांति को खत्म करने के लिए रवाना किया ।
उसके साथ 400 सैनिक थे जो रामगढ़ कैंट से पहुंचे थे । विलकिंसन को भी पोटो हो के नेतृत्व क्षमता का भान था और उनकी तैयारियों से अंग्रेजों के खेमे में भी दहशत थी । अंग्रोजों के पास बंदूक थी जिसे पोटो हो और दूसरे साथी एक प्रेत की तरह देखते थे अंग्रेजीं बंदूकों के भूत को हराने के लिए पोटो हो, मगनी नाइक, भूइया, पंडवा, जोतोंग जोंको, कोचे और सरधन, नारा जैसे साथियों का ना सिर्फ समर्थन हासिल किया बल्कि एक साथ अपने देवताओं की पूजा भी की ।
19 नवंबर 1837 को अंग्रेजी सेना सेरंगसिया घाटी पहुंची, दोनों ओर घने जंगल और चट्टानी पहाड़ियों के बीच जैसे ही अंग्रेजी सेना पहुंची दो तीर ने रास्ता काट दिया । ये चेतावनी थी कि आगे मत बढ़ो, अंग्रेजों ने इसे हल्के में लिया और सेना आगे बढ़ने लगी लेकिन जैसे ही कुछ गज आगे कदम बढ़े तीरों की बारिश होने लगी । चारों तरफ से तीर बरसने लगे । अंग्रेजों की फौज दहशत में आ गई । इस हमले में अंग्रेजी रिकॉर्ड के मुताबिक 4 अंग्रेज सैनिक मारे गए , तीन दर्जन सैनिकों को तीर लगा और वे घायलल हो गए । हांलाकि सेंरगसिया घाटी से निकल विलकिंसन की फौज जगन्नाथपुर पहुंच चुकी थी । यहां विलसिंकन ने नई रणनीति बनाते हुए पोटो हो के गांव राजबासा पर हमले की साजिश रची । 20 नवंबर 1837 को हमला तो हुया लेकिन पोटो हो नहीं मिले । हांलाकि 6 लोगों को अंग्रेजों ने पकल लिया। 21 नवंबर को विलसिंसन ने पोटो हो के पिता को गिरफ्तार कर लिया और राजबासा गांव को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया । अनाज लूट लिए गए, घरों में आग लगा दी गई । 22 नवंबर को विलकिंसन की फौज ने टोडांग हातू पर हमला किया , गांव खाली था लेकिन आठ महिलाओं और एक आदमी को पकड़ लिया गया और उसकी हत्या कर दी गई । महिलाओं के साथ क्या हुआ इसका लिखित इतिहास अंग्रेजी दस्तावेज में मौजूद नहीं । इधर अंग्रजों के गुप्तचरों ने जानकारी दी कि पोटो हो उत्तर और दक्षिण कोल्हान के के लोगों ने पोटो हो को अपना समर्थन दिया है और लगभग 2 हजार की तादाद में कोयला बुरु में इकट्ठा हुए हैं । 24 नवंबर को कैप्टन आर्मस्ट्रांग ने कोयला बुरु की ओर कूच किया । उसके साथ 300 की फौज थी । लेकिन जगह खाली मिली। पोटो हो और उनके सिपाही तब तक दूसरी जगह रवाना हो चुके थे। अंग्रेजों ने कोयला बुरु, रुइया, निजाम रुइया जैसे दर्जनों छोटे -छोटे गांवों पर कहर बरपाते हुए लूटपाट की, गांव के गांव जला दिए गए ।
अंग्रेजी फौज रुइया गांव में 11 दिसंबर तक डेरा डाले रही । 22 दिनों के दौरान अंग्रेजों ने जबरदस्त लूटपाट की अत्याचार किया । लगभग एक हजार मवेशियों को अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले लिया,अनाज की बोरियां इतनी हो गई कि ढोने वाले थक गए । आखिरकार सेंरगसिया घाटी में ‘पोटो हो’ और उनके साथियों को अंग्रजों ने गिरफ्तार कर लिया । कैप्टन विलकिंसन को इसकी खबर भेजी गई जो उस वक्त चाईबासा में था । उसके मन में हो आदिवासियों को लेकर इतनी नफरत थी कि खुद ही फांसी की सजा देने के लिए रवाना हुआ, ना कोई अदालत थी और ना ही कोई जिरह हुई, विलकिंसन ने अंग्रेजी सरकार से खुद ही अधिकार हासिल करते हुए फांसी की सजा देने की योजना बनाई जिसमें वो कामयाब भी हो गया । पोटो हो फांसी की सजा देने के लिए हाथी पर चढ़कर विलकिंसन चाईबासा से जगन्नाथपुर पहुंचा, एक जगह वो हाथी से गिरकर घायल भी हुआ लेकिन रुका नहीं और 25 दिसंबर 1837 को ट्रायल शुरु किया । पोटो हो और पांच क्रांतिकारियों के खिलाफ 31 दिसंबर 1837 तक सुनवाई चली और आखिर में जो फैसला तय था वही सुनाया गया । पोटो हो और पांच साथियों को सरेआम सजा फांसी की सजा सुनाई गई । 1 जनवरी 1838 को पोटो हो, बराई और नारा को हजारों हो आदिवासियों के सामने फांसी पर लटका दिया गया । 2 जनवरी को बोरा और पंडवा को सेरंगसिया गांव में फांसी दी गई । 22 जनवरी 1838 को कैप्टन विलकिंसन की सेना वापस लौट गई लेकिन इस 2 महीने के दौरान कोल्हान ने अंग्रेजों के अत्याचार का वो दौर देखा जिसके जख्म आज भी ताजा हैं। किस्से, कहानियों और गीतों में पोटो हो और उनके साथियों की शहादत कोल्हान में पिछले 190 सालों से जिंदा है अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘पोटो हो’ के नाम पर खेल योजना शुरु कर के पूरे भारत को बता दिया कि झारखंड की धरती में वीरों की कहानी बहुत पुरानी है, मंगल पांडेय और भगत सिंह से भी पहले की ।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

Lieliska balona piedzīvojuma pozīcija hitnspin pieteikšanās datorā H5G laikā Harbors reklāmas pasākuma laikā

Published

on

By

Kas nav saistīts ar kādu citu spēļu automātu, bet iedomājieties, ka iegūstat maksimālu uzvaru uz desmit hitnspin pieteikšanās datorā dolāru likmi – tā, visticamāk, iztērēsiet desmit tūkstošus dolāru. Šajās piedzīvojumu iedvesmotajās ostās ir vienkārši viss, ko var piedāvāt kādam, kurš atgriežas. Tomēr jums nav jāspēlē viens un tas pats spēļu automāts visu laiku, tāpēc jums vajadzētu pieminēt šo lielo spēļu automātu industrijas kategoriju. (more…)

Continue Reading

Latest News

1 250+ Spielautomaten Online Glücksspiel Slots kostenlos abzüglich Eintragung vortragen

Published

on

By

Sic profitierst Du durch dem Effizienz, wirklich so Respons nebensächlich Echtgeld obsiegen ferner lohnenswert zulassen kannst. Unter anderem sie sind diese WMS Spiele auf diese weise für etliche Glücksspieler maßgeblich spannender. (more…)

Continue Reading

Latest News

Akcijas hitnspin kontakts Latvijā Spēles

Published

on

By

Mūsu vestibilā ir pieejams plašs sadaļu klāsts, sākot no klasiskām klasiskajām pieslēgvietām līdz Megaways un beidzot ar modernām video spēļu automātu spēlēm, kas piedāvā inovatīvus risinājumus, lai palielinātu jūsu peļņu. Spēļu fanātiķi var kļūt arī par daļu no valsts populārākās tiešsaistes spēles, kas piedāvā augstas atdeves spēlētājam (RTP) likmes, laimestu izmaksas, papildu bonusa pirkumus un daudz ko citu. (more…)

Continue Reading



Trending

Copyright © 2020 Viewpointjharkhand.com, Maintained & Designed by Horizon IT Consultancy Services Pvt. Ltd.