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सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन से रैयतों को मिलेगा लाभ – निधि खरे
रैयती के जमीन पर स्वामित्व नहीं बदलेगा,जनजातीय समुदाय को होगा फायदा
रांची,19अक्टूबर। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 एवं संथाल परगना अधिनियम 1949 में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन झारखण्ड की जनता के हित में है। यह समय की मांग है, अगर हमें छोटानागपुर और संथाल परगना की जनता को सशक्त बनाना है, उनका आर्थिक उन्नयन करना है, तो हमें इस संशोधन को सहर्ष स्वीकार करना होगा। ये बातें प्रधान सचिव कार्मिक एवं प्रशासनिक सह राज्य सरकार की प्रवक्ता निधि खरे ने, सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 21 एवं धारा 13 संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम के तहत रैयत अपनी जमीन का उपयोग सिर्फ कृषि और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए ही कर सकते है, यानी उन्हें अपनी ही जमीन का गैर कृषि कार्यों के लिए उपयोग करने का अधिकार प्राप्त नहीं है, ऐसे में अगर वे चाहे कि अपनी जमीन पर, मैरिज हॉल, होटल, ढाबा, दुकान या अपनी मर्जी का को और प्रतिष्ठान खोल सकें तो वे ऐसा नहीं कर सकते, ऐसे में उनका आर्थिक विकास कैसे होगा, वे सशक्त कैसे होंगे। ये सब को सोचना होगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उनके आर्थिक उन्नयन के लिए संशोधन का प्रस्ताव रखा है, ताकि वे अपनी जमीन का अपनी मर्जी से अपने हित में सही इस्तेमाल कर सकें, साथ ही अपना विकास भी कर सकें। निधि खरे ने कहा कि जो ये भ्रांतियां फैलायी जा रही है कि इससे उनके जमीन पर स्वामित्व खत्म हो जायेगा, वे गलत कर रहे है, पूर्णतः भ्रांति फैला रहे है। इस संशोधन से किसी भी रैयती के जमीन पर स्वामित्व के उसके अधिकार को को चुनौती दे ही नहीं सकता, बल्कि इससे उनके स्वामित्व का सही आर्थिक लाभ रैयतों को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे जितना हिस्सा गैर कृषि कार्यों के लिये करेंगे, उतनी ही भूमि के बाजार मूल्य के अधिकतम एक प्रतिशत के बराबर ही उन्हें गैर कृषि लगान देना होगा। इससे रैयतों के अधिकार एवं स्वामित्व को और मजबूती मिलेगी। निधि खरे के अनुसार अगर को रैयत द्वारा ऐसे भूखण्ड पर गैर कृषि कार्य किया जा रहा है तो उसे नियमित भी किया जा सकेगा। जिससे रैयत भविष्य में होनेवाले कानूनी झंझट से भी बच जायेंगे, साथ ही कानूनी संरक्षण भी उन्हें प्राप्त हो जायेगा। निधि खरे ने कहा कि अगर भविष्य में भूमि के विधि सम्मत स्वरुप परिवर्तन होने के फलस्वरुप उनकी जमीन का यदि भविष्य में अर्जन भी होता है तो उन्हें उनकी जमीन का अधिक मूल्य प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि धारा 49 छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में भी संशोधन प्रस्तावित है। चूंकि राज्य में चल रहे रेलवे, सड़क, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्य्नालय, विभिन्न प्रकार की जनोपयोगी परियोजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता होती है। अतः उक्त आवश्यकताओं को देखते हुए इसमें भी बदलाव की आवश्यकता है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं के लिये को भी रैयत उपायुक्त से अनुमति प्राप्त कर अपनी भूमि जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए हस्तांतरित कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भूमि हस्तांतरित होगी, उनका कार्यान्वयन 5 वर्षों के अंदर करना होगा, अन्यथा संबंद्ध रैयतों को पूर्व में हस्तातंरण की गयी राशि बिना वापस किये उनकी भूमि उन्हें लौटा दी जायेगी। निधि खरे ने बताया कि राज्य सरकार ने जो संशोधन प्रस्ताव रखे है, वे पूर्णतः जनहित में है, पर कुछ लोगों ने इस बारे में गलत भ्रांतियां फैला दी, जिसका वे जवाब दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को तनिक भी संदेह में नहीं रहना चाहिए।
निधि खरे के अनुसार धारा 71 ए में भी संशोधन प्रस्तावित है। पूर्व में राज्य के आदिवासियों की अवैध रुप से हस्तांतरित भूमि को उन्हें एसएआर कोर्ट द्वारा वापस करने का प्रावधान है। धारा 71 ए के द्वीतिय और तृतीय की आड़ में बिहार अनुसूचित क्षेत्र विनियमन अधिनियम 1969 में प्रावधानित नियमों के विपरीत 30 वर्षों के बाद भी एसएआर कोर्ट द्वारा कम्पन्शेसन का आदेश जमीन माफिया व जमीन दलाल प्राप्त कर आदिवासियों की जमीन हड़पने में सफल होते रहे है। धारा 71 ए में कम्पन्शेसन का प्रावधान ही हटा दिया गया है तथा 6 महीने के अंदर आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस करने का प्रावधान कर दिया गया है। ऐसे में ये कहना कि इन संशोधनों से आदिवासियों का अहित होगा, वह पूर्णतः गलत है, सच्चा यह है कि इससे आदिवासियों का ही हित सधेगा। संवाददाता सम्मेलन में राजस्व विभाग के सचिव के के सोन एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक अवधेश कुमार पांडेय भी मौजूद थे।
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